यूपीआई लेनदेन में नया रिकॉर्ड दर्ज किया गया है क्योंकि जून में बायोमेट्रिक भुगतान 60 करोड़ के पार पहुँच गया है जिससे लेनदेन काफी सुरक्षित हो गया है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
नई दिल्ली, दिल्ली। यूपीआई लेनदेन में नया रिकॉर्ड बनने से भारतीय डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच गया है। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम यानी एनपीसीआई ने बुधवार को जानकारी देते हुए बताया है कि जून महीने में ऑन डिवाइस बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण आधारित भुगतान ने एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। इस नई प्रणाली के माध्यम से अकेले जून में इकसठ करोड़ से अधिक का सफल लेनदेन किया गया है। [1]
इस पूरे लेनदेन का कुल मूल्य पच्चीस हजार चार सौ सोलह करोड़ रुपये दर्ज किया गया है जो रोजमर्रा के भुगतान मामलों में मजबूत स्वीकार्यता को दर्शाता है। यह आधुनिक सुविधा उपयोगकर्ताओं को अपने स्मार्टफोन के फिंगरप्रिंट या चेहरे की पहचान का उपयोग करके सीधे भुगतान को अधिकृत करने में सक्षम बनाती है। इसकी सफलता से यह साफ हो गया है कि भारतीय उपभोक्ता अब तेजी से बदल रहे हैं।
यूपीआई लेनदेन में नया रिकॉर्ड बनने के साथ ही ऑन डिवाइस बायोमेट्रिक भुगतान अब आम लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है। एनपीसीआई की विकास कार्यकारी निदेशक सोहिनी राजोला ने बताया कि बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को अपनाना यूपीआई उपयोगकर्ताओं के बीच सरल और कुशल भुगतान अनुभवों के प्रति बढ़ती प्राथमिकता को दर्शाता है। जून में साठ करोड़ से अधिक का यह आंकड़ा इस बात का बड़ा सबूत है।
यह अनूठी समाधान तकनीक रूपे क्रेडिट कार्ड ऑन यूपीआई सहित विभिन्न प्रकार के भुगतानों में मजबूत स्वीकृति देख रही है। कई प्रमुख बैंक और लोकप्रिय यूपीआई ऐप्स पहले से ही अपने ग्राहकों को बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की सुविधा दे रहे हैं। आने वाले समय में इसके और अधिक बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि अधिक से अधिक उपयोगकर्ता इस सुरक्षित और सुविधाजनक तरीके को चुन रहे हैं।
यूपीआई लेनदेन में नया रिकॉर्ड इस बात का भी संकेत है कि लोग अब पारंपरिक पिन आधारित भुगतान के बजाय अधिक सहज और तेज डिजिटल पेमेंट अनुभवों की ओर बढ़ रहे हैं। यह आधुनिक सुविधा पर्सन टू पर्सन और पर्सन टू मर्चेंट दोनों प्रकार के भुगतानों का पूरी तरह समर्थन करती है जिससे नियमित रूप से होने वाले सभी छोटे बड़े सौदे बहुत त्वरित और निर्बाध हो गए हैं।
बायोमेट्रिक तकनीक रूपे क्रेडिट कार्ड लेनदेन के लिए भी उपलब्ध है जिससे बिना पिन के क्रेडिट भुगतान संभव हो पाता है। फिंगरप्रिंट या चेहरे की पहचान का उपयोग करने से पारंपरिक यूपीआई पिन पर निर्भरता काफी कम हो जाती है जिससे लेनदेन पूरा होने की गति और सफलता दर में भारी सुधार होता है। एनपीसीआई को उम्मीद है कि यह देश के खुदरा भुगतान परिदृश्य को और मजबूत करेगा।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। डिजिटल भुगतान और यूपीआई वित्तीय सुरक्षा के इस तकनीकी मामले में उपभोक्ता अपने डिवाइस की सुरक्षा सेटिंग्स का विशेष ध्यान रखें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।