सूडान का गृहयुद्ध अब भीषण जनसंहार बन चुका है। महिलाओं के साथ यौन शोषण, अत्याचार और भूखमरी को हथियार बनाकर नरसंहार किया जा रहा है।
शिविरों में शरणार्थी
जेनेवा, स्विट्जरलैंड। सूडान का गृहयुद्ध अब बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है जहां रैपिड सपोर्ट फोर्सेज द्वारा बड़े पैमाने पर हिंसा और अत्याचार किए जाने की पुष्टि हुई है। रायटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त राष्ट्र की एक ताजा जांच रिपोर्ट में बुधवार को यह खुलासा हुआ है कि सेना से मुकाबला कर रहे इस अर्धसैनिक बल ने पिछले साल एक प्रमुख शहर पर कब्जा करने के बाद वहां सुनियोजित तरीके से जनसंहार को अंजाम दिया था। इस हिंसक कार्रवाई में महिलाओं और बच्चियों का अपहरण कर उनके साथ बर्बरता की गई है। [1]
इस रिपोर्ट के अनुसार सूडान का गृहयुद्ध नागरिकों के लिए काल बन चुका है क्योंकि सुरक्षा बलों ने वहां भुखमरी को एक सैन्य हथियार की तरह इस्तेमाल किया है। शहर की लंबी घेराबंदी करके राहत सामग्री की आपूर्ति पूरी तरह से रोक दी गई थी और खाद्य उत्पादन प्रणालियों पर भारी गोलाबारी की गई थी। इसके कारण वहां रहने वाले आम लोगों के सामने भोजन का एक अभूतपूर्व संकट खड़ा हो गया जो अब एक भयावह अंतरराष्ट्रीय युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है।
दूसरी ओर अर्धसैनिक बल ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि यह सभी कहानियां उनके विरोधियों द्वारा गढ़ी गई हैं ताकि उनकी छवि को खराब किया जा सके। हालांकि संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख ने चेतावनी दी है कि सूडान का गृहयुद्ध अब एक और बड़े शहर अल ओबैद की तरफ बढ़ रहा है जिससे वहां भी अल फशिर जैसी बड़ी मानवीय तबाही होने की पूरी आशंका बनी हुई है।
ब्रिटेन और अन्य देशों ने भी इस बात की चेतावनी दी है कि यदि इस सैन्य बल का जमावड़ा अल ओबैद के आसपास बढ़ता रहा तो वहां बड़े पैमाने पर अत्याचार हो सकते हैं। वर्तमान में इस शहर में करीब पांच लाख लोग रह रहे हैं जिनमें अस्सी हजार से अधिक आंतरिक रूप से विस्थापित नागरिक भी शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने इस हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए वहां हो रहे मानवाधिकारों के हनन की तुरंत जांच के आदेश दिए हैं।
जांच दल के प्रमुख का कहना है कि अल फशिर में जो तौर-तरीके देखे गए थे वे एक गंभीर चेतावनी हैं। सूडान का गृहयुद्ध केवल सत्ता का संघर्ष नहीं रह गया है बल्कि यह गैर अरब समुदायों को पूरी तरह खत्म करने की एक सोची समझी नीति बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है ताकि विस्थापित नागरिकों को सुरक्षा प्रदान की जा सके और इस देश को और अधिक बर्बादी से समय रहते बचाया जा सके।
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने अल ओबैद के आसपास के ग्रामीण इलाकों से बेहद चौंकाने वाले साक्ष्य एकत्र किए हैं। इन एकत्रित दस्तावेजों के अनुसार अर्धसैनिक बलों ने इस पूरे क्षेत्र में बिना किसी कानूनी मुकदमे के आम लोगों को सीधे फांसी देने की भयानक प्रवृत्ति अपनाई है। इसके साथ ही बेकसूर लोगों का अपहरण कर उन्हें गुप्त ठिकानों पर अमानवीय यातनाएं दी जा रही हैं जिसने इस अंतरराष्ट्रीय मानवीय संकट को और अधिक भयावह बना दिया है।
सूडान का गृहयुद्ध अब यौन हिंसा और बर्बरता का पर्याय बन चुका है क्योंकि यूएन की रिपोर्ट में इन तटीय और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को दर्ज किया गया है। पीड़ितों और चश्मदीदों के बयानों से स्पष्ट है कि यह कृत्य किसी व्यक्तिगत स्तर पर नहीं बल्कि एक सोची-समझी सैन्य रणनीति के तहत किए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इन अपराधियों को दंडित करने के लिए वैश्विक दबाव बनाने की मांग तेज कर दी है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। सूडान में जारी गृहयुद्ध, मानवीय संकट और संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार रिपोर्ट से जुड़े गंभीर वैश्विक घटनाक्रम को समझने के लिए यह सामग्री प्रस्तुत है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।