जम्मू और कश्मीर

माता वैष्णो देवी यात्रा के नए मार्ग पर गिरा भारी मलबा

माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर भारी बारिश के बाद भूस्खलन हुआ है लेकिन इसके बावजूद श्रद्धालुओं की पवित्र तीर्थयात्रा बिना किसी बाधा के जारी है।

By अजय त्यागी 1 min read
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माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर गिरा मलबा

जम्मू, जम्मू कश्मीर। भारी भूस्खलन और बारिश के बाद भी प्रसिद्ध माता वैष्णो देवी यात्रा बिना किसी रुकावट के पूरी तरह से सुरक्षित रूप से चल रही है। रियासी जिले के कटरा कस्बे में स्थित पवित्र त्रिकुटा पहाड़ियों पर बुधवार की शाम को मौसम खराब होने के बाद अचानक मिट्टी का एक बड़ा हिस्सा ढह गया। आईएएनएस की एक रिपोर्ट के अनुसार इस प्राकृतिक हादसे के कारण भवन की ओर जाने वाले नए मार्ग पर चलने वाली विशेष वाहन सेवा को तुरंत रोक दिया गया है। [1]

नया मार्ग

श्राइन बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि यह भूस्खलन नए मार्ग पर हिमकोटी के पास हुआ है जहां पहाड़ी का एक हिस्सा अचानक टूटकर रास्ते पर आ गिरा। मलबे की जानकारी मिलते ही प्रशासन ने तुरंत बचाव दल और आधुनिक मशीनों को काम पर लगा दिया है ताकि रास्ते को जल्द साफ किया जा सके। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केवल आधुनिक वाहन सेवा को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया है जबकि आम श्रद्धालुओं की पैदल माता वैष्णो देवी यात्रा पुराने पारंपरिक मार्ग से सुचारू रूप से जारी है।

पवित्र त्रिकुटा पर्वत पर मौसम खराब होने के बावजूद देश के कोने कोने से आए सैकड़ों श्रद्धालु बिना किसी डर के भवन की ओर लगातार बढ़ रहे हैं। भक्तों का अटूट विश्वास इस प्राकृतिक आपदा पर भारी पड़ रहा है और वे पवित्र जयकारे लगाते हुए अपनी चढ़ाई पूरी कर रहे हैं। श्राइन बोर्ड का आपदा प्रबंधन दल पूरे रास्ते पर पैनी नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। माता वैष्णो देवी यात्रा को सुरक्षित रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

धार्मिक आस्था

सनातन धर्म में माता वैष्णो देवी को शक्ति का साक्षात स्वरूप माना जाता है जिन्हें वैष्णवी और शेरावाली के पवित्र नामों से भी श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है। मुख्य गुफा के भीतर आदि शक्ति तीन दिव्य प्राकृतिक पिंडियों के रूप में स्वयं प्रकट हैं जिन्हें पौराणिक मान्यताओं में महाकाली महालक्ष्मी और महासरस्वती का रूप माना जाता है। इस पूर्ण शाकाहारी और अविवाहित देवी को संपूर्ण उत्तर भारत में सात बहनों में सबसे बड़ी देवी के रूप में पूजा जाता है।

यह विश्व प्रसिद्ध पावन मंदिर जम्मू संभाग की सुंदर पहाड़ियों में लगभग पांच हजार दो सौ फीट की ऊंचाई पर स्थित है जहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को कटरा मुख्य शिविर से तेरह किलोमीटर की कठिन पैदल चढ़ाई पूरी करनी पड़ती है। दुर्गम रास्ता होने के कारण ही यहां हवाई सेवा और टट्टू की सुविधा भी दी जाती है। इस समय चल रही माता वैष्णो देवी यात्रा में हर दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर दरबार में हाजिरी लगाने पहुंच रहे हैं।

सुरक्षा अलर्ट

पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून के मौसम के दौरान इस तरह के भूस्खलन की घटनाएं आम हो जाती हैं जिससे निपटने के लिए श्राइन बोर्ड का दस्ता हमेशा तैयार रहता है। मौसम विभाग ने अगले चौबीस घंटों के दौरान इस पूरे पर्वतीय क्षेत्र में और अधिक भारी बारिश होने की चेतावनी जारी की है जिसके बाद पूरे ट्रैक पर सुरक्षा बलों की मुस्तैदी बढ़ा दी गई है। मलबे को हटाने का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है और स्थिति सामान्य होते ही वाहन सेवा को दोबारा बहाल कर दिया जाएगा।

भवन पर तैनात अधिकारियों ने सभी तीर्थयात्रियों से अपील की है कि वे चढ़ाई के दौरान केवल निर्धारित और सुरक्षित रास्तों का ही उपयोग करें तथा किसी भी प्रकार की भ्रामक खबरों पर ध्यान न दें। इस संकट के समय में भी भक्तों की अटूट आस्था और प्रशासन के पुख्ता इंतजामों के कारण माता वैष्णो देवी यात्रा बिना रुके आगे बढ़ रही है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं को आश्वस्त किया है कि पूरी यात्रा के दौरान उनके स्वास्थ्य और ठहरने का पूरा ध्यान रखा जाएगा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। जम्मू कश्मीर में माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के यात्रा मार्ग पर हुए भूस्खलन, मौसम के ताजा अपडेट और श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े घटनाक्रम को समझने के लिए यह सामग्री प्रस्तुत है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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