राजस्थान

मलबे में दबे मजदूर बाहर निकाले गए, तीन सुरक्षित एक की मौत

तिलोरा गांव में सेप्टिक टैंक के गड्ढे में अचानक मिट्टी ढहने से मलबे में दबे मजदूर, तीन को सुरक्षित निकाला गया जबकि एक की मौत हो गई।

By अजय त्यागी 1 min read
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मलबे में दबे मजदूर बाहर निकाले गए, तीन सुरक्षित एक की मौत

अजमेर, राजस्थान। पुष्कर के समीपवर्ती तिलोरा गांव में गुरुवार को एक मकान के बाहर सेप्टिक टैंक के लिए गड्ढा खोदते समय मिट्टी ढहने की बड़ी दुर्घटना हो गई। इस हादसे के दौरान वहां कुल चार श्रमिक काम कर रहे थे जो अचानक ऊपर से गिरी भारी ढहती मिट्टी के नीचे पूरी तरह से फंस गए। स्थानीय ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए तुरंत राहत कार्य शुरू किया और मलबे में दबे मजदूर साथियों में से तीन को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

बचाव अभियान

तिलोरा के निकट सरदार सिंह की ढाणी में कालूराम के घर के बाहर यह सेप्टिक टैंक निर्माण कार्य चल रहा था। लगभग आठ फीट गहरे गड्ढे में नीचे काम करते समय अचानक ऊपर से भारी मिट्टी ढह गई जिससे चीख पुकार मच गई। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन एंबुलेंस और एसडीआरएफ की रेस्क्यू टीम भी तेजी से मौके पर पहुंच गई। घटना स्थल पर बड़ी जेसीबी मशीन की सहायता से मलबे में दबे मजदूर को निकालने का काम शुरू हुआ।

कड़ी मशक्कत के बाद एसडीआरएफ कर्मियों ने उस अंतिम श्रमिक को बाहर निकाला जो काफी गहराई में फंसा हुआ था। उसे गंभीर अवस्था में तत्काल एक सौ आठ एंबुलेंस की मदद से पुष्कर के राजकीय अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों द्वारा किए गए सघन उपचार के दौरान उसकी दर्दनाक मौत हो गई। पुष्कर तहसीलदार इंद्रजीत सिंह चौहान ने बताया कि मृतक नागौर जिले के डेगाना थाना क्षेत्र के खानपुरा गांव का रहने वाला बीरबल था।

मजदूरों का रेस्क्यू

प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि मृतक के पीड़ित परिवार को उचित आर्थिक सहायता राशि दिलाने के लिए आवश्यक सरकारी प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। एसडीएम गुरु प्रसाद ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि तिलोरा गांव में कालूराम के मकान पर सेप्टिक टैंक के गहरे गड्ढे में काम करते समय अचानक चार श्रमिक मिट्टी के नीचे आ गए थे। सजग ग्रामीणों और रेस्क्यू टीम ने मिलकर तीन को सुरक्षित निकाला पर एक मलबे में दबे मजदूर की जान नहीं बच सकी।

इस दुखद हादसे के बाद मृतक के रोते बिलखते परिजनों को सूचना दे दी गई है। निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी अक्सर इस प्रकार की बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बनती है। प्रशासनिक अधिकारियों ने निर्माण कार्य करवा रहे लोगों को भविष्य में अत्यधिक सावधानी बरतने के कड़े निर्देश दिए हैं। गहरे गड्ढों की खुदाई के समय आसपास की मिट्टी को सुरक्षित रखने के पूरे इंतजाम किए जाने चाहिए ताकि दोबारा किसी निर्दोष मजदूर को अपनी जान न गंवानी पड़े।

प्रशासन की सतर्कता

क्षेत्र के विकास कार्यों में श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर अब प्रशासन और अधिक गंभीर हो गया है। इस हादसे की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए गए हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को पूरी तरह रोका जा सके। ग्रामीणों ने भी मांग की है कि पीड़ित श्रमिक के परिवार को जल्द से जल्द उचित मुआवजा राशि प्रदान की जाए क्योंकि वह अपने घर का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

स्थानीय सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए निर्माण स्थलों पर सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता अनिवार्य करने की मांग उठाई है। मलबे में दबे मजदूर के इस दर्दनाक हादसे ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। मजदूरों के कल्याण और उनकी कार्यदशाओं में सुधार के लिए कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि वे सुरक्षित माहौल में अपना काम कर सकें और अपनी आजीविका बिना किसी डर के कमा सकें।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। अजमेर के तिलोरा गांव में सेप्टिक टैंक निर्माण के दौरान मिट्टी ढहने की दुर्घटना, एसडीआरएफ के बचाव कार्य, श्रमिक की मौत और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दी गई आर्थिक सहायता की जानकारी को समझने के लिए यह सामग्री प्रस्तुत है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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