अंतरराष्ट्रीय

रूस यूक्रेन युद्ध में नया मोड़: पुतिन ने ठुकराया शांति प्रस्ताव

डोनबास पर पूर्ण कब्जे को लेकर रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने शांति वार्ता का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। जिससे रूस यूक्रेन युद्ध और भीषण होने की आशंका। 

By अजय त्यागी 1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

मास्को, रूस। क्रेमलिन के करीबी सूत्रों के अनुसार राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के साथ शांति वार्ता के सभी प्रस्तावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। यूक्रेन द्वारा हाल ही में रूसी तेल रिफाइनरियों और बंदरगाहों पर किए गए ड्रोन हमलों ने पुतिन के इरादों को और मजबूत कर दिया है। अब इस संघर्ष के और तेज होने की पूरी आशंका जताई जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दावों के विपरीत पुतिन युद्ध को समाप्त करने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। रूस यूक्रेन युद्ध अब दोनों देशों के लिए आने वाले समय में और विनाशकारी साबित हो सकता है। [1]

पुतिन की रणनीति

सूत्रों का कहना है कि पुतिन डोनबास क्षेत्र के शेष हिस्से पर कब्जा करने की अपनी मुख्य योजना पर पूरी तरह टिके हुए हैं। उन्होंने अपने उन सलाहकारों को भी फटकार लगाई है जिन्होंने मौजूदा मोर्चे पर युद्धविराम और समझौते का सुझाव दिया था। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने साफ किया है कि रूस शांतिपूर्ण समाधान के लिए तैयार है लेकिन वह अपनी स्वतंत्र सैन्य कार्रवाई जारी रखने में पूरी तरह सक्षम है। इस सैन्य संघर्ष का यह नया चरण वैश्विक स्तर पर भी बड़ा असर डाल सकता है।

यूक्रेन की खुफिया रिपोर्ट भी यही संकेत देती हैं कि रूस शांति के बजाय नए हमलों की तैयारी में जुटा है। इसके कारण आने वाले दिनों में जंग और भीषण होने की आशंका है। पश्चिमी सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि डोनबास क्षेत्र पर पूरी तरह नियंत्रण पाने के लिए रूस को बड़ी संख्या में अतिरिक्त सैनिकों की जरूरत पड़ सकती है। इस बड़े सैन्य संकट के कारण रूस यूक्रेन युद्ध का अंत फिलहाल संभव नहीं दिख रहा है और वैश्विक भू राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है।

नाटो से टकराव

रूसी सैन्य विशेषज्ञ अब सार्वजनिक रूप से बाल्टिक देशों में नाटो ठिकानों पर हमला करने जैसी आक्रामक रणनीतियों पर चर्चा कर रहे हैं। ऐसे कदमों से रूस का अमेरिका के नेतृत्व वाले नाटो गठबंधन के साथ सीधा और खतरनाक टकराव हो सकता है। जानकारों का मानना है कि रूस नाटो के भीतर मतभेद पैदा करने के लिए कुछ सीमित हवाई हमले भी कर सकता है। इस भयानक तनाव के बीच रूस यूक्रेन युद्ध वैश्विक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है।

लगातार बढ़ते हमलों से दोनों पक्षों को भारी नुकसान हो रहा है। यूक्रेन द्वारा रूसी तेल डिपो और बंदरगाहों पर किए गए हमलों ने रूस के भीतर ईंधन की भारी किल्लत पैदा कर दी है। पुतिन की लोकप्रियता पर भी इसका आंशिक असर पड़ा है लेकिन उनका इरादा कड़ा बना हुआ है। हाल ही में रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव सहित कई शहरों पर बड़े मिसाइल हमले किए हैं जिसमें कई नागरिकों की जान गई है और बुनियादी ढांचे तबाह हुए हैं।

डोनबास में जंग

रणभूमि में रूस की धीमी प्रगति से यह साफ है कि डोनबास पर कब्जा करने के लिए उसे अभी लंबा समय और बड़ी संख्या में सैनिकों की आहुति देनी होगी। एक अनुमान के मुताबिक इस भीषण संघर्ष में अब तक दोनों पक्षों के लाखों सैनिक हताहत हो चुके हैं। रूसी सेना यूक्रेनी ड्रोनों का सामना करने के लिए काफी संघर्ष कर रही है जो उसकी संख्यात्मक बढ़त को चुनौती दे रहे हैं। फिर भी रूस अपनी इस आक्रामक नीति पर पूरी तरह अडिग दिखाई दे रहा है।

रूसी राष्ट्रपति पुतिन पूर्वी शहर कोस्तियानतिनिवका पर नियंत्रण का दावा कर रहे हैं जिसे यूक्रेन ने सिरे से खारिज कर दिया है। पुतिन डोनबास के शेष हिस्से को जीतना अपनी प्रतिष्ठा का सवाल मानते हैं और उन्हें किसी भी कीमत पर एक बड़ी सैन्य जीत चाहिए। इस हठ के कारण ही रूस यूक्रेन युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है और दोनों देश विनाश की ओर बढ़ रहे हैं। शांति की सभी उम्मीदें फिलहाल पूरी तरह से धूमिल हो चुकी हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे इस सैन्य संघर्ष के अंतरराष्ट्रीय भू राजनीतिक प्रभावों को इस रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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