अंतरराष्ट्रीय

ऑस्ट्रेलिया में बढ़ा संकट: बर्ड फ्लू का प्रकोप मचाएगा भारी तबाही

ऑस्ट्रेलिया के स्थानीय समुद्री पक्षी में घातक एच5एन1 वायरस का पहला मामला मिला है जिससे बर्ड फ्लू का प्रकोप बढ़ गया और एक चिंताजनक चरण शुरू हो गया है।

By अजय त्यागी 1 min read
Twitter Facebook WhatsApp

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

सिडनी, ऑस्ट्रेलिया। ऑस्ट्रेलिया में एक स्थानीय समुद्री पक्षी में पहली बार घातक एच5एन1 वायरस के संक्रमण की पुष्टि की गई है। इस नए मामले के सामने आने के बाद देश में इस खतरनाक बीमारी के प्रसार का एक नया और चिंताजनक चरण शुरू हो गया है। राष्ट्रीय विज्ञान एजेंसी की प्रयोगशाला जांच में दक्षिण ऑस्ट्रेलियाई तटीय शहर रोब में पाए गए एक समुद्री पक्षी ग्रेटर क्रेस्टेड टर्न में संक्रमण पाया गया है। कृषि मंत्री जूली कोलिन्स ने शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर इस गंभीर मामले की पुष्टि की है। [1]

बढ़ता संक्रमण

यह ऑस्ट्रेलिया के किसी स्थानीय तटीय पक्षी में संक्रमण का पहला पुख्ता मामला है। इससे पहले के सभी मामले केवल प्रवासी पक्षियों में ही पाए गए थे। इस नए मामले के साथ ही देश में कुल संक्रमित पक्षियों की संख्या बढ़कर अब बारह हो गई है। शुक्रवार को अधिकारियों ने दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में दो और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में एक अन्य नए मामले की पुष्टि की है। इस कारण पूरे तटीय क्षेत्र में अब बर्ड फ्लू का प्रकोप फैलने की आशंका काफी ज्यादा बढ़ गई है।

कृषि मंत्री ने कहा कि यह घटनाक्रम बेहद चिंताजनक है, हालांकि वैज्ञानिकों के लिए यह पूरी तरह अप्रत्याशित नहीं था। राहत की बात यह है कि अभी तक पक्षियों की सामूहिक मृत्यु या पोल्ट्री क्षेत्र में इसके फैलने के कोई सबूत नहीं मिले हैं। हमारे वैज्ञानिक इस बात की गहन जांच कर रहे हैं कि यह स्थानीय पक्षी आखिर किस माध्यम से संक्रमित हुआ। इस तटीय पक्षी का क्षेत्र उन प्रवासी पक्षियों के साथ मेल खाता है जो पहले संक्रमित पाए गए थे।

वैज्ञानिकों की जांच

वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रवासी पक्षियों के संपर्क में आने के कारण ही स्थानीय प्रजातियों में बर्ड फ्लू का प्रकोप फैलना शुरू हुआ है। ऑस्ट्रेलिया इस वर्ष जून में एच5एन1 वायरस के मुख्य भूमि आधारित मामले की पुष्टि करने वाला दुनिया का अंतिम महाद्वीप बना था। हालांकि, इससे पहले वर्ष 2025 के अंत में मुख्य भूमि से दूर सब अंटार्कटिक क्षेत्र में इस वायरस का पता चला था। अब मुख्य भूमि के तटीय इलाकों में इसका पहुंचना पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा है।

कृषि और पर्यावरण मंत्रालय ने तटीय क्षेत्रों में निगरानी को पहले से कहीं अधिक सख्त कर दिया है। वन्यजीव विशेषज्ञों को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी संदिग्ध मामले की तुरंत पहचान की जा सके। पोल्ट्री फार्मों को भी विशेष सावधानी बरतने और जैविक सुरक्षा के कड़े नियम लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। वैज्ञानिकों की टीम लगातार तटीय पक्षियों के नमूनों की जांच कर रही है ताकि बर्ड फ्लू का प्रकोप कृषि क्षेत्र तक न पहुंचे।

वैश्विक संकट

दुनिया भर के वैज्ञानिक इस वायरस के बदलते स्वरूप को लेकर लगातार चेतावनी दे रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में इसका प्रसार यह दिखाता है कि यह वायरस कितनी तेजी से नए भौगोलिक क्षेत्रों और नई प्रजातियों को अपनी चपेट में ले रहा है। यदि यह संक्रमण रोकने में कामयाबी नहीं मिली, तो स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भारी नुकसान हो सकता है। सरकार अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर इस जैविक संकट से निपटने के लिए नई गाइडलाइंस तैयार करने में जुटी है।

आने वाले दिन ऑस्ट्रेलिया के पोल्ट्री उद्योग और वन्यजीव संरक्षण के लिए बेहद संवेदनशील साबित होने वाले हैं। प्रभावित क्षेत्रों में आम जनता को भी मृत या बीमार पक्षियों से दूरी बनाए रखने की सख्त सलाह दी गई है। प्रशासन स्थिति पर पूरी तरह नजर बनाए हुए है और आवश्यक कदम उठा रहा है। बर्ड फ्लू का प्रकोप रोकने के लिए सभी संभव वैज्ञानिक संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि इस बड़े पर्यावरणीय संकट को समय रहते टाला जा सके।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। ऑस्ट्रेलिया में फैले इस नए वायरस संकट और उसके वन्यजीवों पर पड़ने वाले प्रभावों को इस रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Source Source
#BirdFlu #H5N1 #AustraliaNews #WildlifeCrisis #AvianInfluenza #SouthAustralia
Read Full Article on RexTV India