अवैध सट्टेबाजी महादेव ऑनलाइन बुक मामले में ईडी की कार्रवाई के तहत विकास गर्ग की नौ सौ चालीस करोड़ से अधिक की चल अचल संपत्ति जब्त की गई है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
रायपुर, छत्तीसगढ़। प्रवर्तन निदेशालय के रायपुर जोनल ऑफिस ने अवैध सट्टेबाजी महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज के मामले में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत एक और प्रोविजनल अटैचमेंट आदेश जारी किया है। इसके तहत विकास गर्ग, उनके परिवार के सदस्यों और उनकी कंपनियों की चल और अचल संपत्तियों को जब्त किया गया है। ईडी की कार्रवाई के तहत जब्त की गई संपत्तियों की कुल कीमत लगभग 940.77 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसमें रिहायशी प्रॉपर्टी, जमीन के टुकड़े, इक्विटी शेयर और अन्य सिक्योरिटीज मुख्य रूप से शामिल हैं। [1]
ईडी ने छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर और अन्य राज्यों की पुलिस द्वारा अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म के ऑपरेटरों, प्रमोटरों और सहयोगियों के खिलाफ दर्ज शिकायतों के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की थी। इन प्राथमिकियों में मुख्य रूप से आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी के गंभीर आरोप लगाए गए थे। जांच से पता चला कि यह सट्टेबाजी सिंडिकेट विदेश से चलाए जा रहे फ्रेंचाइजी आधारित पैनल नेटवर्क के जरिए काम करता था और हर महीने करोड़ों रुपये कमाता था।
जांच में यह भी सामने आया कि महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज के गैर कानूनी काम से हुई अवैध कमाई को शेल कंपनियों के जाल और कई तरह के लेन देन के जरिए लॉन्डर किया गया था। इसका मुख्य मकसद इस काली कमाई को वैध दिखाना था। सट्टेबाजी सिंडिकेट पर हुई इस बड़ी ईडी की कार्रवाई के अनुसार अवैध कमाई को विकास गर्ग के मालिकाना हक वाली कंपनियों में भेजकर शेयर और संपत्तियां खरीदने में इस्तेमाल किया गया था ताकि इसे बचाया जा सके।
प्रवर्तन निदेशालय द्वारा इस मामले में पहले भी सात प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किए जा चुके हैं और रायपुर की स्पेशल कोर्ट में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट्स भी दायर की जा चुकी हैं। अदालत ने इस मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध का कड़ा संज्ञान लिया है। इस मामले में पहले ही लगभग 2,825 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां, जिनमें विदेशी संपत्तियां भी शामिल हैं, अटैच और फ्रीज की जा चुकी थीं जो अब जांच के आगे बढ़ने के साथ काफी बढ़ चुकी हैं।
मौजूदा अटैचमेंट के बाद इस पूरे मामले में अब तक अटैच और फ्रीज की गई कुल संपत्तियों की कीमत बढ़कर लगभग 3,800 करोड़ रुपये हो गई है। केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा की गई इस बड़ी कार्रवाई से अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क से जुड़े सिंडिकेट और फर्जी कंपनियों के संचालकों में हड़कंप मच गया है। मामले की आगे की जांच और मनी लॉन्ड्रिंग के इस बड़े नेटवर्क के अन्य सुराग तलाशने के लिए ईडी की कार्रवाई का अगला चरण अब भी लगातार जारी है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। सट्टेबाजी नेटवर्क और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी इस कुर्की की कार्रवाई को जांच एजेंसी द्वारा अनंतिम माना गया है और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के अधीन होगा। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।