राजस्थान में इस वर्ष होने वाली राज्य पात्रता परीक्षा के माध्यम से अब सहायक प्रोफेसर बनने के साथ साथ पीएचडी में प्रवेश का नया रास्ता भी खुल सकता है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
कोटा, राजस्थान (राहुल पारीक)। राजस्थान राज्य पात्रता परीक्षा प्रदेश के युवाओं के लिए अब केवल सहायक प्रोफेसर बनने का माध्यम नहीं रहेगी बल्कि भविष्य में पीएचडी में प्रवेश का नया रास्ता भी खोल सकती है। कोटा विश्वविद्यालय ने राज्य सरकार को इस परीक्षा को पीएचडी प्रवेश के लिए मान्यता देने का एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भेजा है। इस बड़े प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर राज्य के हजारों अभ्यर्थियों को राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा की तर्ज पर शोध एवं उच्च शिक्षा में प्रवेश का एक बेहतरीन अवसर मिल सकेगा।
कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत ने बताया कि उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग नई दिल्ली को पत्र भेजकर इस राज्य पात्रता परीक्षा को पीएचडी प्रवेश के लिए मान्यता प्रदान करने का अनुरोध किया गया है। वर्तमान में केवल नेट उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को ही पीएचडी में सीधे प्रवेश की सुविधा उपलब्ध है। यदि इस परीक्षा को भी यह मान्यता मिलती है तो प्रदेश के विद्यार्थियों को शोध एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए और बड़े अवसर प्राप्त होंगे।
उन्होंने कहा कि इस परीक्षा का पाठ्यक्रम परीक्षा प्रणाली एवं मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी तरह यूजीसी नेट के मानकों के अनुरूप तैयार की गई है। इससे अभ्यर्थियों को राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा जैसी तैयारी का अवसर मिलेगा और उच्च शिक्षा में गुणवत्ता आधारित चयन प्रणाली को मजबूती मिलेगी। कुलगुरु ने अभ्यर्थियों से विशेष अपील करते हुए कहा कि आगामी राज्य पात्रता परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि पंद्रह जुलाई निर्धारित की गई है इसलिए सभी समय रहते आवेदन कर लें।
विश्वविद्यालय द्वारा इस परीक्षा का भव्य आयोजन तेरह सितंबर दो हजार छब्बीस को किया जाएगा। आवेदन शुल्क सामान्य एवं ओबीसी वर्ग के लिए पंद्रह सौ रुपये, ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए बारह सौ रुपये तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं दिव्यांग वर्ग के लिए सात सौ पचास रुपये निर्धारित किया गया है। इस वर्ष की राज्य पात्रता परीक्षा में जनसंचार एवं पत्रकारिता तथा संस्कृत पारंपरिक विषयों को पहली बार शामिल किया गया है जिससे अब कुल सैंतीस विषयों में परीक्षा होगी।
गौरतलब है कि राजस्थान सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार इस वर्ष परीक्षा के आयोजन की जिम्मेदारी कोटा विश्वविद्यालय को सौंपी गई है। वर्ष दो हजार तेईस के बाद आयोजित हो रही यह परीक्षा राज्य के राजकीय एवं निजी महाविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर पद के लिए पात्रता निर्धारित करेगी। यदि यूजीसी से इस परीक्षा को मान्यता मिलती है तो यह परीक्षा प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के साथ साथ शोध और अकादमिक करियर की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगी।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। राजस्थान राज्य पात्रता परीक्षा (SET-2026) के नियमों में बदलाव और पीएचडी मान्यता से जुड़ा यह प्रस्ताव अभी राज्य सरकार और यूजीसी के समक्ष विचाराधीन है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।