अमेरिका चीन व्यापार विवाद एक बार फिर गहरा गया है क्योंकि वाशिंगटन द्वारा शुरू की गई व्यापारिक जांच के बाद बीजिंग ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
वाशिंगटन, संयुक्त राज्य अमेरिका। अमेरिका द्वारा जबरन श्रम और कथित औद्योगिक अति-क्षमता को लेकर चीन सहित दर्जनों अर्थव्यवस्थाओं को निशाना बनाकर शुरू की गई नई व्यापार जांच के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। अमेरिका चीन व्यापार पर की गई इस कार्रवाई पर चीनी दूतावास ने वाशिंगटन के समक्ष औपचारिक विरोध दर्ज कराते हुए कड़ी असंतोष व्यक्त किया है। चीन ने अमेरिका पर अपने घरेलू व्यापार कानून का दुरुपयोग करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को जानबूझकर बाधित करने का गंभीर आरोप लगाया है। [1]
चीनी दूतावास ने पत्रकारों के लिए आयोजित एक ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि वे अमेरिकी जांच की प्रगति पर बारीकी से नजर रखेंगे। उन्होंने कहा कि देश अपने वैध अधिकारों और हितों की दृढ़ता से रक्षा करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है। इस कदम से अमेरिका चीन व्यापार विवाद के एक नए दौर में प्रवेश करने की आशंका बढ़ गई है जिससे दोनों देशों के व्यापारिक संगठनों के बीच अनिश्चितता का माहौल बन रहा है।
इस तनातनी के बीच चीनी उद्योग जगत में भी गहरी चिंता देखी जा रही है। चीनी विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि वाशिंगटन द्वारा लगाए गए ये एकतरफा आरोप वास्तव में प्रतिस्पर्धा को दबाने का एक राजनीतिक प्रयास हैं। बीजिंग ने अपने निर्यातकों से अपील की है कि वे वैकल्पिक बाजारों की तलाश करें ताकि किसी भी संभावित अमेरिकी प्रतिबंध के प्रभाव को कम किया जा सके और घरेलू अर्थव्यवस्था की स्थिरता बनी रहे।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार अमेरिका ने अति-क्षमता का हवाला देते हुए चीन सहित सोलह अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ धारा तीन सौ एक के तहत जांच शुरू की है। इसके अतिरिक्त जबरन श्रम से बने सामानों के आयात पर प्रतिबंध न लगाने के आरोपों को लेकर चीन समेत साठ देशों के खिलाफ एक अन्य जांच भी खोल दी गई है। इन दोतरफा प्रतिबंधात्मक कदमों ने दोनों महाशक्तियों के बीच पहले से जारी आर्थिक मोर्चे की तनातनी को और अधिक हवा दे दी है जिससे यह अमेरिका चीन व्यापार विवाद और जटिल हो गया है।
चीनी पक्ष का तर्क है कि विश्व व्यापार संगठन का पैनल पहले ही यह निर्णय दे चुका है कि चीन के खिलाफ अमेरिकी धारा तीन सौ एक के तहत लगाए गए टैरिफ उपाय नियमों का पूरी तरह उल्लंघन करते हैं। दूतावास ने कहा कि अमेरिका एक बार फिर इस प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहा है। घरेलू कानून को अंतर्राष्ट्रीय नियमों से ऊपर रखकर वाशिंगटन एक गंभीर गलती कर रहा है जिससे अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक और व्यापारिक व्यवस्था पूरी तरह छिन्न-भिन्न हो रही है।
यह नया विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब बीजिंग और वाशिंगटन टैरिफ पर बातचीत जारी रखे हुए थे और अपने आर्थिक संबंधों को स्थिर करने का प्रयास कर रहे थे। दोनों पक्ष पारस्परिक टैरिफ कटौती और अन्य जटिल मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक व्यापार बोर्ड स्थापित करने पर सहमत हुए थे। इसके साथ ही दोनों देशों ने द्विपक्षीय कृषि व्यापार का विस्तार करने और प्रासंगिक कृषि उत्पादों को पारस्परिक टैरिफ कटौती ढांचे में शामिल करने का लक्ष्य भी रखा था।
व्यापारिक वार्ता के इस दौर में दोनों पक्षों ने कृषि क्षेत्र में स्वतंत्र और स्वतंत्र व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की वकालत की थी। दोनों देशों की तकनीकी टीमों के बीच निरंतर संवाद बनाए रखने पर भी सहमति बनी थी ताकि बाजार की वास्तविक मांग के अनुसार आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। हालांकि इस नई अमेरिकी जांच के शुरू होने से अब चल रही द्विपक्षीय वार्ता के भविष्य पर भी गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।
चीन ने चीनी कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंधों का विरोध करते हुए वाशिंगटन पर राष्ट्रीय सुरक्षा की अवधारणा का अत्यधिक विस्तार करने का आरोप लगाया है। इसके जवाब में बीजिंग ने सैन्य गतिविधियों में शामिल दस अमेरिकी संस्थाओं को अपनी निर्यात नियंत्रण सूची में डाल दिया है। यह कार्रवाई इन संस्थाओं को दोहरे उपयोग वाली वस्तुओं के निर्यात को प्रतिबंधित करती है जो दर्शाती है कि अमेरिका चीन व्यापार विवाद रणनीतिक रूप से अत्यधिक जटिल हो चुका है।
बीजिंग ने साफ किया है कि उसका यह कदम गैर-प्रसार दायित्वों को पूरा करने और अपनी संप्रभुता की रक्षा करने के लिए पूरी तरह से वैध है। इस जवाबी कार्रवाई से अमेरिकी रक्षा और तकनीकी कंपनियों के लिए चीनी बाजार से महत्वपूर्ण कलपुर्जों की आपूर्ति रुकने का खतरा पैदा हो गया है। वैश्विक बाजार विश्लेषकों का मानना है कि दोनों आर्थिक शक्तियों का यह टकराव आने वाले दिनों में वैश्विक मंदी के खतरे को और अधिक बढ़ा सकता है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। पाठकों को ध्यान रखना चाहिए कि किन्हीं भी दो संप्रभु राष्ट्रों के मध्य द्विपक्षीय राजनयिक एवं वाणिज्यिक संबंध समय समय पर विभिन्न भू राजनीतिक रणनीतियों और सरकारी नीतियों के अधीन होते हैं जिनमें वैश्विक परिदृश्यों के अनुसार निरंतर बदलाव संभव हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।