कोटा पुलिस ने एक बड़े वाहन चोर गिरोह का शनिवार को पर्दाफाश करते हुए पांच शातिर आरोपियों को गिरफ्तार कर सैंतीस मोटरसाइकिल बरामद करने में सफलता पाई है।
बरामद मोटरसाइकिलें
कोटा, राजस्थान। कोटा ग्रामीण पुलिस ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए दोपहिया वाहन चोर गिरोह का खुलासा शनिवार को किया है। इस पूरे मामले में पुलिस ने विभिन्न स्थानों से सैंतीस मोटरसाइकिल बरामद की है और पांच शातिर आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है। कोटा पुलिस ने इस बड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए कोटा, बूंदी, झालावाड़, बारां और पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में कई जगह पर ताबड़तोड़ कार्रवाई की है। यह संयुक्त कार्रवाई कोटा ग्रामीण के अलग-अलग थाना इलाकों में पुलिस टीमों ने मिलकर सफलतापूर्वक पूरी की है। [1]
कोटा ग्रामीण एसपी सुजीत शंकर ने बताया कि पुलिस ने जिले के खातौली निवासी तीस वर्षीय मुबारिक, चेचक निवासी पैंतालीस वर्षीय रमेश कुमार उर्फ रामहेत बैरवा, सुकेत के उनतीस वर्षीय दिलराज भील और झालावाड़ के सुनेल निवासी चालीस वर्षीय टीकमचंद को गिरफ्तार किया है। इस मामले के शेष आरोपी अनिल पोटर व दिनेश प्रजापति को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। यह आरोपी कोटा, बूंदी व झालावाड़ में अलग-अलग जगह से मोटरसाइकिल चोरी कर लेते थे और इस तरह एक सक्रिय वाहन चोर गिरोह चला रहे थे।
इसके बाद यह चोरी की मोटरसाइकिलों को रमेश और रवि बैरवा के घर पर छिपाकर रख देते थे। फरार आरोपी अनिल और दिनेश प्रजापति फर्जी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट बनाकर इन मोटरसाइकिलों को बाजार में बेच देते थे। यह लोग गाड़ियों को औने पौने दाम में नहीं, बल्कि पूरे पैसे लेकर बेचते थे। मोटरसाइकिलों को बेचने के लिए अधिकांश काम रमेश और रवि करते थे। यह लोग ग्रामीण क्षेत्र के भोले भाले लोगों को सस्ते कागजात के नाम पर फंसा लेते थे और अपना शिकार बनाते थे।
इस मामले में गिरफ्तार हुए मुख्य आरोपी मुबारिक के खिलाफ पांच मुकदमे हैं, जबकि दिलराज के खिलाफ दो मुकदमे पहले से पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हैं। वहीं, इन आरोपियों के पास से कोटा ग्रामीण इलाके में आठ, कोटा शहर से नौ, झालावाड़ से चार, बूंदी से छह और मध्य प्रदेश से दो मोटरसाइकिल बरामद की गई है। इसके अलावा आठ अन्य मोटरसाइकिलों के संबंध में पुलिस का गहन अनुसंधान लगातार जारी है जिससे इस वाहन चोर गिरोह की अन्य संपत्तियों का पता लगाया जा सके।
पुलिस ने बताया कि आरोपी सुनसान जगह या पार्किंग में खड़ी हुई गाड़ियों के लॉक तोड़कर उन्हें आसानी से चोरी कर ले जाते थे। ऐसे चोरी के मामलों में पुलिस ने संदिग्धों की पहचान की थी और सीसीटीवी फुटेज के जरिए टेक्निकल अनुसंधान किया। इसके बाद ही इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया है। इस मामले में मुख्य आरोपी अनिल पोटर और दिनेश प्रजापति की गिरफ्तारी अभी शेष है, जिनके संबंध में पुलिस टीमों द्वारा लगातार प्रयास चल रहा है।
पकड़े गए आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि वे काफी समय से इस अवैध कारोबार में संलिप्त थे। इस बड़े वाहन चोर गिरोह के सदस्य फर्जी दस्तावेज तैयार करने में माहिर थे जिससे आम लोगों को गाड़ियों के चोरी होने का शक नहीं होता था। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि इस नेटवर्क में आरटीओ कार्यालय या किसी अन्य एजेंसी के लोग तो शामिल नहीं हैं जो फर्जी कागजात बनाने में इनकी मदद करते थे।
ग्रामीण इलाकों में इस कार्रवाई के बाद वाहन स्वामियों ने राहत की सांस ली है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इस वाहन चोर गिरोह के फरार सदस्यों की धरपकड़ के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि आगामी पूछताछ में कई अन्य चोरी की वारदातों का खुलासा हो सकता है और कुछ अन्य लोगों की गिरफ्तारियां भी संभव हैं जिससे क्षेत्र में दोपहिया वाहनों की चोरी पर पूरी तरह से लगाम लगाई जा सके।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। वाहन चोरी के मामलों, पुलिस कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया की आधिकारिक जानकारी पूरी तरह से संबंधित पुलिस प्रशासन के दावों के अधीन हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।