राजस्थान

कला कार्यशाला के जरिए बादलों को रिझाने का अनूठा प्रयास

अच्छी बारिश की कामना के लिए आयोजित अनूठी कला कार्यशाला में सैकड़ों चित्रकारों ने पुरानी संदूकों पर रंगों से खूबसूरत बादल उकेरे हैं।

By अजय त्यागी 1 min read
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रंग मल्हार उत्सव

बीकानेर, राजस्थान। रेगिस्तानी इलाके में मानसून की अच्छी बारिश की कामना के लिए सत्रहवें रंग मल्हार का बेहद भव्य और सफल आयोजन किया गया। इस एक दिवसीय कला कार्यशाला में शहर के नामचीन कलाकारों ने अपने घरों की पुरानी संदूक पर सुंदर कैनवास बनाकर रंगों के माध्यम से बादलों की मनमोहक आकृतियां उकेरी। इस कलात्मक और सांस्कृतिक परंपरा की शुरुआत वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय चित्रकार विद्यासागर उपाध्याय की प्रेरणा से वर्ष दो हजार नौ में जयपुर से हुई थी। 

बादलों का स्वागत

अब मानसून के समय होने वाला यह भव्य आयोजन न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशेष पहचान बना चुका है। कार्यक्रम के मुख्य संयोजक मनोज सोलंकी ने बताया कि बीकानेर में बरसात की विशेष कामना के लिए पूरी दुनिया में एक ही दिन इस कार्यक्रम को आयोजित किया जाता है। जब भी नन्हे बच्चों और कलाकारों की कल्पना के रंग इस तरह बिखरते हैं तब मेघ भी धरती पर मेहरबान हो जाते हैं और शहर में अच्छी बारिश होती है।

इस बार के सांस्कृतिक आयोजन का मुख्य विषय संदूक रखा गया था जिस पर बच्चों ने बादलों और सावन की फुहारों के सुंदर चित्र बनाकर अपनी अंतरात्मा की भावनाएं व्यक्त की हैं। वहीं स्थानीय चित्रकार पृथ्वीसिंह ने बताया कि हर साल इस कला कार्यशाला के जरिए अलग अलग माध्यमों पर रंग बिखेरे जाते हैं। इस बार लक्ष्मीनाथ मंदिर परिसर में आयोजित हुई इस अनूठी कार्यशाला में प्रसिद्ध मिनिएचर चित्रकार महावीर स्वामी सहित करीब एक सौ तीस चित्रकारों ने भाग लिया।

पारंपरिक धरोहर

इस रचनात्मक मंच पर सभी आयु वर्ग के कलाकारों ने अपनी कूची का जादू दिखाया और धरती की प्यास बुझाने के लिए बादलों को आमंत्रित किया। बुजुर्ग कलाकारों के साथ बच्चों के अनूठे चित्रों ने सबका मन मोह लिया और कलाप्रेमियों की भारी भीड़ मंदिर परिसर में उमड़ पड़ी। इस रंगारंग उत्सव ने बीकानेर की सांस्कृतिक और पारंपरिक कला धरोहर को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय पटल पर बेहद मजबूती के साथ स्थापित करने का बड़ा काम किया है।

इस अनूठे प्रयास की सराहना पूरे शहर में की जा रही है क्योंकि यह आधुनिकता के दौर में पुरानी वस्तुओं के संरक्षण का संदेश भी देता है। कला प्रेमियों का मानना है कि इस तरह की कला कार्यशाला समाज को अपनी जड़ों से जोड़े रखने में बेहद मददगार साबित होती है। इस सफल आयोजन के समापन पर सभी प्रतिभागी कलाकारों को सम्मानित भी किया गया ताकि भविष्य में भी वे अपनी सुंदर कलाकृतियों के माध्यम से पर्यावरण और संस्कृति को सहेजने का प्रयास निरंतर करते रहें।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट स्थानीय संवाददाताओं और प्राथमिक स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। प्रस्तुत समाचार बीकानेर में आयोजित रंग मल्हार कला कार्यशाला और चित्रकारों की कलाकृतियों से संबंधित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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