विभागों द्वारा जारी की गई विसंगतियों से भरी तबादला सूची में मृत कर्मचारियों और विधायकों के नाम शामिल होने से गंभीर प्रशासनिक लापरवाही उजागर हुई।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
राजस्थान। राज्य सरकार की ओर से विभिन्न सरकारी विभागों में की गई बड़ी प्रशासनिक सर्जरी अब एक बड़ा मजाक बनकर रह गई है। इस बीच जारी हुई विवादित तबादला सूची सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल हो रही हैं क्योंकि इनमें भारी लापरवाही बरतते हुए कई जीवित और मृत कर्मचारियों के नामों में भारी उलटफेर कर दिया गया है। हालात यह हैं कि किसी विभाग की सूची में सीधे मौजूदा विधायक का ही ट्रांसफर कर दिया गया तो कहीं पर मृत कार्मिक का तबादला कर दिया गया। [1]
सबसे चर्चित मामला राजस्व विभाग का सामने आया है जहां एक पटवारी के स्थान पर गलती से डीग क्षेत्र के विधायक शैलेश सिंह का नाम ही ट्रांसफर लिस्ट में दर्ज कर दिया गया। जो सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुपों में जमकर वायरल हो रहा है। इस गंभीर त्रुटी के कारण संबंधित कर्मचारी नए पद पर कार्यभार ग्रहण नहीं कर सकता।
इसी तरह वर्षों से अपने गृह क्षेत्र में स्थानांतरण का इंतजार कर रहे एक शिक्षक का मामला सबसे अधिक दुखद और चर्चा का विषय बना हुआ है। इस अत्यंत विवादित तबादला सूची में शिक्षा विभाग ने एक ऐसे शिक्षक का नाम भी शामिल कर दिया है जिसने तबादला न होने से अवसाद में आकर पिछले महीने ही आत्महत्या कर ली थी। इस घटना के बाद से मृतक शिक्षक के परिजनों और शिक्षक संगठनों में विभाग की इस घोर संवेदनहीन कार्यशैली को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। [2]
विभिन्न जिलों से लगातार मिल रही शिकायतों और त्रुटियों की प्रारंभिक जांच के बाद अब संबंधित विभागों में आनन-फानन में संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रशासनिक जानकारों का स्पष्ट रूप से मानना है कि स्थानांतरण जैसे महत्वपूर्ण आदेश जारी करने से पहले उच्च अधिकारियों को हमेशा कर्मचारियों के सेवा अभिलेखों का अद्यतन सत्यापन बहुत गंभीरता से करना चाहिए था। इस बड़ी लापरवाही ने पूरे सिस्टम की जवाबदेही और अद्यतन डेटा प्रबंधन की पोल खोलकर रख दी है।
कई प्रभावित कर्मचारी अभी भी नए आदेशों के इंतजार में अपनी जॉइनिंग के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं जिससे सरकारी कामकाज भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। सोशल मीडिया पर आम जनता इस पूरी व्यवस्था पर सवाल उठा रही है कि आखिर इतने लंबे समय की तैयारी के बाद भी ऐसी संवेदनहीन और विवादित तबादला सूची कैसे सार्वजनिक हो सकती है। फिलहाल सरकार ने इस पूरे मामले में सख्त रुख अपनाते हुए जिम्मेदार लिपिकों के खिलाफ भी आंतरिक जांच के आदेश दे दिए हैं।
कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि त्रुटियों को जल्द नहीं सुधारा गया तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। प्रशासनिक स्तर पर मचे इस घमासान के कारण आम जनता के जरूरी काम भी विभिन्न दफ्तरों में अटक गए हैं जिससे लोगों की परेशानी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे आगामी तीन दिनों के भीतर अपनी सभी सूचियों का पुनरीक्षण कर अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य सरकार की प्रशासनिक कार्यकुशलता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है जिसे सुधारने में काफी समय लगेगा। सरकार की छवि को बचाने के लिए अब मंत्रियों के स्तर पर बैठकों का दौर शुरू हो चुका है ताकि नाराज विधायकों और कर्मचारियों को शांत किया जा सके। आने वाले दिनों में इस पूरी विवादित तबादला सूची को निरस्त कर नए सिरे से पारदर्शी नीति के तहत आदेश जारी किए जाने की प्रबल संभावना व्यक्त की जा रही है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट स्थानीय संवाददाताओं और प्राथमिक स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। प्रस्तुत समाचार राजस्थान में विभिन्न विभागों द्वारा जारी की गई स्थानांतरण सूचियों में आई विसंगतियों और प्रशासनिक प्रतिक्रिया से संबंधित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।