अंतरराष्ट्रीय

रिसर्च फंडिंग पर नए सरकारी नियम को लेकर हुआ भारी बवाल

रिसर्च फंडिंग पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाने के नए नियम का भारी विरोध शुरू हो गया है जिससे वैज्ञानिकों में खलबली मच गई और सांसदों ने मोर्चा खोला।

By अजय त्यागी 1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

वाशिंगटन, डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया। अमेरिका में विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में मिलने वाली रिसर्च फंडिंग को लेकर एक बहुत बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आईएएनएस की एक रिपोर्ट के अनुसार, चालीस से अधिक अमेरिकी सांसदों के एक समूह ने नए नियमों का खुलकर विरोध किया है। सांसदों ने इस संबंध में सरकार को एक तीखा पत्र लिखकर इस नए प्रस्ताव को तुरंत वापस लेने की मांग की है। उनका मानना है कि इस नए नियम से विज्ञान के क्षेत्र में अनावश्यक राजनीतिक हस्तक्षेप बहुत अधिक बढ़ जाएगा। [1]

नियमों का विरोध

सांसदों ने अपने पत्र में लिखा है कि प्रस्तावित नियम से स्वतंत्र अनुसंधान की प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावित होगी। इस नए नियम के लागू होने से सरकारी अधिकारी अपनी पसंद के अनुसार वित्तीय अनुदानों का फैसला करेंगे जिससे पूरी व्यवस्था में पक्षपात बढ़ेगा। वर्तमान में वैज्ञानिक और शोधकर्ता मिलकर तय करते हैं कि किस परियोजना को बढ़ावा जाना चाहिए। लेकिन इस नए बदलाव के बाद पूरी वैज्ञानिक स्वतंत्रता और पारदर्शिता समाप्त हो जाएगी जिसका देश के विकास पर बहुत बुरा असर पड़ेगा।

इस नए विवाद का सबसे अधिक नुकसान कैलिफोर्निया जैसे राज्यों को होगा जहां दुनिया के सबसे बड़े विश्वविद्यालय और तकनीकी संस्थान स्थित हैं। इन संस्थानों को बड़े पैमाने पर रिसर्च फंडिंग मिलती है जिसके बल पर वे नए आविष्कार करते हैं। सांसदों का कहना है कि पिछले पचहत्तर वर्षों से देश ने विज्ञान और तकनीक में जो भी ऐतिहासिक प्रगति की है, वह केवल निष्पक्ष और स्वतंत्र समीक्षा के बल पर ही संभव हो पाई है जिसमें कोई राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं था।

चीन से चुनौती

अमेरिकी सांसदों ने चेतावनी दी है कि इस नियम से देश की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता बेहद कमजोर हो जाएगी। विशेष रूप से चीन जैसे प्रतिद्वंद्वी देशों के खिलाफ अमेरिका पिछड़ सकता है क्योंकि चीन इस समय वैज्ञानिक अनुसंधान में बहुत बड़ा निवेश कर रहा है। इसके साथ ही नए नियमों के कारण दुनिया भर से आने वाली बेहतरीन प्रतिभाओं को आकर्षित करना भी मुश्किल होगा जिससे विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में देश का नेतृत्व पूरी तरह समाप्त हो सकता है।

पत्र में यह भी आशंका व्यक्त की गई है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और जनकल्याण से जुड़ी वैज्ञानिक खोजों में रुकावट आ सकती है। इसके तहत कैंसर और अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं भी बीच में ही लटक सकती हैं। इसलिए सांसदों ने सरकार से अपील की है कि वे इस नए नियम को तुरंत वापस लें ताकि रिसर्च फंडिंग की गरिमा बनी रहे और देश की वैज्ञानिक संप्रभुता हमेशा सुरक्षित रह सके।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। यह रिपोर्ट अमेरिकी सरकार के नए अनुदान नियमों और उस पर सांसदों के विरोध प्रदर्शन से संबंधित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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