अंतरराष्ट्रीय

हिंदू नेता की गिरफ्तारी के बाद पड़ोसी मुल्क में सांप्रदायिक तनाव बढ़ा

बांग्लादेश में राम मंदिर परिसर में मूर्ति निर्माण का प्रस्ताव देने वाले हिंदू नेता की गिरफ्तारी के बाद मानवाधिकार संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

By अजय त्यागी 1 min read
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हिंदू नेता गिरफ्तार

ढाका, बांग्लादेश। बांग्लादेश के गायकवाड़ जिले के पलाशबाड़ी में एक मंदिर परिसर के भीतर भगवान राम की इक्यासी फीट ऊंची मूर्ति बनाने का प्रस्ताव देने वाले हरिदास चंद्र तरणी दास को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। आईएएनएस की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश के कई प्रमुख मानवाधिकार संगठनों ने इस हिंदू नेता की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण और पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया है। पुलिस ने उन्हें ढाका के उत्तरा वेस्ट थाने में दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग के एक पुराने मामले में अचानक गिरफ्तार किया है। [1]

मूर्ति निर्माण पर विवाद

इस गिरफ्तारी के बाद देश में अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद का आरोप है कि कट्टरपंथी और सांप्रदायिक समूह लंबे समय से इस प्रस्तावित मूर्ति का विरोध कर रहे थे। इन संगठनों का कहना है कि पुलिस द्वारा की गई इस हिंदू नेता की गिरफ्तारी से पहले उन असामाजिक तत्वों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई जिन्होंने खुलेआम हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत किया और सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाया।

परिषद ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए सरकार पूरी तरह विफल रही है। इसके विपरीत उस व्यक्ति को जेल भेज दिया गया जो खुद लगातार सांप्रदायिक धमकियों और डराने धमकाने का शिकार हो रहा था। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना ​​है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से लोकतंत्र और कानून के शासन के सिद्धांतों के विपरीत है। इससे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

अधिकारों का हनन

एक अन्य प्रमुख संगठन एचआरसीबीएम ने भी इस गिरफ्तारी की कड़े शब्दों में निंदा की है। संगठन का कहना है कि यह हिंदू नेता की गिरफ्तारी कई हफ्तों से चल रहे धार्मिक तनाव और कट्टरपंथी धमकियों के बाद की गई है। उन्होंने पहले ही स्थानीय प्रशासन को चेतावनी दी थी कि पलाशबाड़ी मंदिर और वहां के स्थानीय हिंदू समुदाय पर मूर्ति हटाने के लिए लगातार अनुचित दबाव बनाया जा रहा है और धमकियां दी जा रही हैं।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि वित्तीय मामले को केवल एक बहाने के रूप में इस्तेमाल किया गया है तो यह सीधे तौर पर आस्था के अधिकार का हनन है। अपनी धार्मिक गतिविधियों और पहचान के कारण की गई इस हिंदू नेता की गिरफ्तारी के बाद मानवाधिकार संगठनों ने सरकार से मांग की है कि वह हिरासत में लिए गए व्यक्ति को तुरंत बिना शर्त रिहा करे और क्षेत्र में शांति बनाए रखे।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। यह रिपोर्ट बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता और वहां हाल ही में हुई गिरफ्तारी से संबंधित घटनाक्रम को दर्शाती है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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