विदेशी धरती पर प्रधानमंत्री के भव्य स्वागत समारोह को पैसे देकर बुलाई गई भीड़ बताने वाले दावों पर आयोजकों ने राहुल गाँधी को घेरा है और माफी की मांग की है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित भीड़ का एक दृश्य
मेलबर्न, विक्टोरिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत में आयोजित भव्य कार्यक्रम को लेकर एक बहुत बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। आईएएनएस की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्यक्रम के आयोजकों ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को एक खुला पत्र लिखकर अपनी कड़ी आपत्ति जताई है। कांग्रेस नेताओं द्वारा इस ऐतिहासिक सभा को प्रायोजित और बिकाऊ भीड़ बताने के दावों को आयोजकों ने सिरे से खारिज कर दिया है। इसी गंभीर मुद्दे को लेकर विदेशी धरती पर प्रवासियों ने राहुल गाँधी को घेरा है। [1]
समारोह के आयोजकों का कहना है कि इस भव्य आयोजन में तीस हजार से अधिक लोग शामिल हुए थे जिन्होंने अपनी इच्छा से इसमें भाग लिया था। कांग्रेस नेताओं के इस दावे ने कि लोगों की यात्रा का खर्च किसी राजनीतिक दल ने उठाया था, पूरे प्रवासी भारतीय समुदाय को आहत किया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि इस तरह के दावों से वहां पहुंचे लोगों की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े किए गए हैं। वे लोग किसी राजनीतिक दल के बहकावे में आकर वहां एकत्र नहीं हुए थे।
इस कार्यक्रम के लिए विशेष रूप से चलाई गई उड़ानों के प्रबंधन को भी स्वयंसेवकों ने अपनी मेहनत से पूरा किया था। किसी भी सरकार या राजनीतिक संगठन ने इस यात्रा के लिए कोई वित्तीय सहायता प्रदान नहीं की थी। आयोजकों ने आरोप लगाया है कि घरेलू राजनीति के विवादों में विदेश में रह रहे सम्मानजनक नागरिकों को घसीटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इस तरह के झूठे बयानों से न केवल उनकी स्वतंत्र सोच बल्कि उनकी गरिमा को भी ठेस पहुंची है जिसके चलते आयोजकों ने राहुल गाँधी को घेरा और माफ़ी की मांग की है।
इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों में डॉक्टर, इंजीनियर, छात्र और वरिष्ठ नागरिक शामिल थे जिन्होंने अपनी व्यस्त दिनचर्या से समय निकालकर इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनना स्वीकार किया था। आयोजकों ने पत्र में इस बात पर जोर दिया है कि प्रवासी भारतीयों का अपना एक स्वतंत्र अस्तित्व है और वे भारत के घरेलू राजनीतिक दलों के हाथों की कठपुतली नहीं हैं। वे बिना किसी बाहरी दबाव या लालच के अपनी संस्कृति और लोकतांत्रिक ढंग से चुने गए नेता का स्वागत करने पहुंचे थे।
विपक्ष के इस अपमानजनक रवैये के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न शहरों जैसे सिडनी, एडिलेड, पर्थ और ब्रिस्बेन से आए प्रवासियों में भी भारी रोष देखा जा रहा है। आयोजकों ने कहा है कि जब आप किसी समुदाय के सच्चे प्रयासों को एक राजनीतिक साजिश का नाम दे देते हैं, तो इससे वहां दिन-रात काम करने वाले हर एक स्वयंसेवक का दिल टूटता है। इस तरह के बेबुनियाद दावों को पूरी तरह से नकारते हुए ही ऑस्ट्रेलिया में प्रवासियों ने राहुल गाँधी को घेरा है।
आयोजकों ने कांग्रेस अध्यक्ष और विपक्ष के नेता से इस अभद्र टिप्पणी के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। उनका कहना है कि विपक्षी दल को अपनी राजनीति करने का पूरा अधिकार है लेकिन उन्हें सामान्य नागरिकों की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचानी चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि बिना तथ्यों की जांच किए लगाए गए आरोपों से वैश्विक स्तर पर रहने वाले लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं और इस वजह से ही अब सीधे तौर पर प्रवासियों ने राहुल गाँधी को घेरा है।
यह पूरा आयोजन दोनों देशों के आपसी संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया था जिसमें सभी क्षेत्रों के प्रबुद्ध लोगों ने बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी सुनिश्चित की थी। प्रवासियों का कहना है कि वे किसी दल के बंधक नहीं हैं और वे अपनी मर्जी से अपनी सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाने के लिए स्वतंत्र हैं। जब उनके इस प्रयास को साजिश करार दिया जाता है तो इससे हर स्वाभिमानी नागरिक आहत होता है जिसके विरोध में अब पूरा समुदाय एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद कर रहा है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। यह रिपोर्ट ऑस्ट्रेलिया में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम पर कांग्रेस के आरोपों और प्रवासी भारतीय समुदाय के विरोध पत्र से संबंधित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।