श्रृद्धांजलि

अमर धुनों के निर्माता मदन मोहन की पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रृद्धांजली 

भारतीय सिनेमा के सबसे महान संगीतकारों में शुमार मदन मोहन की पुण्यतिथि पर पूरा देश उनके सदाबहार और अमर गीतों को याद कर नमन कर रहा है।

By अजय त्यागी 1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

मुंबई, महाराष्ट्र। हिंदी फिल्म जगत में अपने अनूठे संगीत से अमिट छाप छोड़ने वाले महान संगीतकार मदन मोहन को आज उनकी 51वीं पुण्यतिथि पर याद किया जा रहा है। आईएएनएस की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस खास मौके पर सिनेमा जगत के तमाम कलाकारों और प्रशंसकों ने इस जादुई संगीतकार के योगदान को सलाम किया है। दिग्गज अभिनेता जैकी श्रॉफ ने भी सोशल मीडिया पर एक श्वेत-श्याम तस्वीर साझा कर इस उस्ताद कलाकार को भावुकता से याद किया है। आज मदन मोहन की पुण्यतिथि पर हर तरफ उनकी ही चर्चा है। [1]

अमर धुनों का सफर

मदन मोहन को हिंदी सिनेमा में गजलों का राजा माना जाता है क्योंकि उन्होंने इस विधा को एक नई ऊंचाई दी थी। उन्होंने अपने करियर में वो कौन थी, हकीकत, मेरा साया, अनपढ़, हीर रांझा और दस्तक जैसी शानदार फिल्मों में ऐसा संगीत दिया जो आज भी प्रासंगिक है। लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी, तलत महमूद और मन्ना डे जैसे महान गायकों ने उनकी धुनों को अपनी आवाज देकर अमर बना दिया था। मदन मोहन की पुण्यतिथि के अवसर पर उनके ये क्लासिक गीत हर जगह गूंज रहे हैं।

मदन मोहन का जन्म 25 जून 1924 को हुआ था और उन्होंने सेना की नौकरी छोड़ने के बाद ऑल इंडिया रेडियो से अपने संगीत के सफर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने मुंबई आकर फिल्मों में स्वतंत्र संगीत निर्देशक के रूप में पहचान बनाई। 14 जुलाई 1975 को उनका निधन हो गया था लेकिन उनका काम आज भी संगीत की दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी पाठशाला माना जाता है। मदन मोहन की पुण्यतिथि उनके इस महान और ऐतिहासिक संगीत सफर को सम्मानित करने का एक जरिया है।

संगीत की अनूठी कला

मदन मोहन की संगीत रचनाओं में शास्त्रीय संगीत का एक बहुत ही गहरा और अद्भुत प्रभाव देखने को मिलता था। वे गानों के शब्दों की गरिमा और उनकी भावनाओं को धुन में ढालने में माहिर थे। उनके बनाए गीतों की बारीकियों को गाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता था। यही वजह है कि आज के दौर के नए संगीतकार भी उनके काम से प्रेरणा लेते हैं। मदन मोहन की पुण्यतिथि पर फिल्म समीक्षकों ने उनके इसी बेजोड़ हुनर और कलात्मक ईमानदारी को याद किया है।

महान संगीतकार मदन मोहन जी के संगीत से सजे कुछ सदाबहार नगमे :

सुर कोकिला लता मंगेशकर के साथ उनका पेशेवर और व्यक्तिगत रिश्ता बेहद खास था क्योंकि वे उन्हें अपने भाई की तरह मानती थीं। दोनों की जोड़ी ने लग जा गले और नैना बरसे जैसे कई ऐतिहासिक गीत दिए हैं जो आज भी लोगों की आंखों में आंसू ला देते हैं। मदन मोहन ने कभी भी व्यावसायिक सफलता के लिए अपने संगीत की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया। मदन मोहन की पुण्यतिथि पर उनके इस सिद्धांत की फिल्म इंडस्ट्री में काफी सराहना की जाती है।

सिनेमा जगत का नमन

सोशल मीडिया पर आम लोगों से लेकर जैकी श्रॉफ जैसे बड़े अभिनेताओं तक ने इस महान आत्मा को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है। जैकी श्रॉफ ने अपनी पोस्ट में उनके प्रति गहरा सम्मान प्रकट किया है जो दिखाता है कि आज की पीढ़ी भी उनके संगीत की कितनी बड़ी मुरीद है। सिनेमा के जानकार मानते हैं कि सच्चा संगीत कभी पुराना या अप्रासंगिक नहीं होता है। मदन मोहन की पुण्यतिथि यह साबित करती है कि उनकी धुनें आज भी उतनी ही ताजा हैं।

इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस आधुनिक दौर में भी युवाओं के बीच मदन मोहन के गानों का क्रेज लगातार बढ़ता जा रहा है। उनकी कला समय की सीमाओं को पार कर चुकी है और आने वाले कई दशकों तक लोगों का मार्गदर्शन करती रहेगी। आज मदन मोहन की पुण्यतिथि पर उन्हें याद करना केवल एक औपचारिकता नहीं है बल्कि भारतीय संगीत के उस सुनहरे युग को सलाम करना है जिसके वे एक बेहद मजबूत स्तंभ थे।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। यह रिपोर्ट हिंदी सिनेमा के महान संगीतकार मदन मोहन की जीवनी, उनके संगीत सफर और मदन मोहन की पुण्यतिथि पर दी गई श्रद्धांजलि के विषय से संबंधित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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