विश्व प्लास्टिक सर्जरी दिवस पर जानिए प्लास्टिक सर्जरी के लाभ और इसके विभिन्न प्रकार, जो तकनीक और एआई के समन्वय से मरीजों को नया जीवन दे रहे हैं।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
हर साल 15 जुलाई को विश्व प्लास्टिक सर्जरी दिवस मनाया जाता है जिसका मकसद लोगों को इस तकनीक के प्रति जागरूक करना है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में प्लास्टिक सर्जरी के लाभ केवल सौंदर्य बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं बल्कि यह गंभीर हादसों और कैंसर जैसी जटिल बीमारियों के बाद अंगों के पुनर्निर्माण में जीवनदायिनी साबित हो रही है। बदलते दौर में यह तकनीक मरीजों को सामान्य जीवन जीने की नई उम्मीद और खोया हुआ आत्मविश्वास लौटा रही है।
इस विधा का इतिहास बेहद गौरवशाली और प्राचीन है क्योंकि भारत के महान महर्षि सुश्रुत को दुनिया का सबसे पहला प्लास्टिक सर्जन और इस विधा का जनक माना जाता है। आज से लगभग 2500 वर्ष पहले उन्होंने अपने ऐतिहासिक ग्रंथ सुश्रुत संहिता में शल्य चिकित्सा के कई जटिल सिद्धांतों का प्रतिपादन किया था। उन्होंने उस प्राचीन काल में युद्ध के मैदान में या दंड स्वरूप क्षत विक्षत हुए लोगों के अंगों को ठीक करने के लिए अद्भुत चिकित्सा पद्धतियों का विकास किया था।
महर्षि सुश्रुत ने विशेष रूप से राइनोप्लास्टी यानी कटी हुई नाक को ठीक करने की अनूठी शल्य क्रिया खोजी थी जिसे आज भी चिकित्सा जगत में सराहा जाता है। उनके द्वारा विकसित की गई त्वचा के प्रत्यारोपण यानी स्किन ग्राफ्टिंग की प्राचीन तकनीक ही आज की आधुनिक प्लास्टिक सर्जरी का मुख्य आधार स्तंभ बनी है। प्राचीन काल के इस अविश्वसनीय भारतीय ज्ञान को आज पूरी दुनिया के बड़े वैज्ञानिक और आधुनिक शल्य चिकित्सक बेहद सम्मान के साथ स्वीकार करते हैं।
प्लास्टिक सर्जरी मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित है जिसमें कॉस्मेटिक सर्जरी और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी प्रमुख स्थान रखती हैं। सामान्य तौर पर कॉस्मेटिक सर्जरी का उपयोग रूप रंग और शारीरिक बनावट को सुधारने के लिए किया जाता है ताकि व्यक्ति का आकर्षण बढ़ सके। इस विधा का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति की बाहरी सुंदरता को निखारना और उसकी त्वचा में मनचाहा सुधार करना होता है।
रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी का उपयोग मुख्य रूप से जन्मजात विकृतियों, जलने के पुराने निशानों और कैंसर सर्जरी के बाद प्रभावित अंगों को ठीक करने में होता है। बदलते दौर में कैंसर के गंभीर मरीज सर्जरी के बाद रिकंस्ट्रक्टिव और माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी को अधिक तवज्जो दे रहे हैं। यह तकनीक जटिल रोगों के प्रभाव को कम करने तथा प्रभावित हिस्सों को पहले की तरह क्रियाशील बनाने में अत्यधिक सहायक सिद्ध होती है।
इस आधुनिक युग में प्लास्टिक सर्जरी की प्रक्रिया वैज्ञानिक अविष्कारों के कारण बेहद उन्नत, सुलभ और सुरक्षित हो गई है। आजकल सर्जरी के सटीक परिणामों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई, 3D प्रिंटिंग और अत्याधुनिक माइक्रोसर्जरी जैसी नई तकनीकों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है। यह आधुनिक विधाएं शल्य चिकित्सा के क्षेत्र को अधिक प्रभावी और पूरी तरह सुरक्षित बना रही हैं।
विशेष रूप से एआई की मदद से सर्जन पहले ही सर्जरी के सटीक प्रभाव और बनावट का आकलन कर लेते हैं जिससे जटिल और बड़ी सर्जरी के दौरान जोखिम बहुत कम हो जाता है। यह आधुनिक तकनीक डॉक्टरों को सर्जरी से पहले एक सटीक ब्लूप्रिंट बनाने में सहायता प्रदान करती है। इस कारण चिकित्सा के क्षेत्र में अप्रत्याशित सफलता दर देखने को मिल रही है।
इस जटिल प्रक्रिया के सफल परिणाम प्राप्त करने के लिए सर्जरी के बाद कई तरह की सावधानियां बरतनी बेहद आवश्यक होती हैं। मरीजों को घाव की उचित देखभाल करने, सीधे धूप के संपर्क से बचने और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं का नियमित सेवन करने की सलाह दी जाती है। इन नियमों का पालन करने से रिकवरी की प्रक्रिया बहुत तेज और प्रभावशाली हो जाती है।
इसके अलावा किसी भी प्रकार के संक्रमण से बचने के लिए शारीरिक गतिविधियों को कुछ समय के लिए नियंत्रित करना और खानपान का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। लापरवाही बरतने से सर्जरी के परिणाम प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा दिए गए सभी निर्देशों का कड़ाई से पालन करना मरीज की सेहत के लिए अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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