ईरान द्वारा नया जलमार्ग बंद करने की धमकी और बढ़ते मिसाइल हमलों से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है, जिससे कच्चे तेल की आपूर्ति ठप हो सकती है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
काहिरा/वॉशिंगटन/बेरूत। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण हवाई व मिसाइल हमलों के कारण इस समय वैश्विक ऊर्जा संकट अत्यंत विनाशकारी मोड़ पर पहुँच चुका है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को पूरी तरह बंद करने और अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष शुरू हो गया है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी सेना ने अमेरिका और उसके सहयोगियों को लाभ पहुँचाने वाले सभी अन्य वैश्विक निर्यात गलियारों को भी बंद करने की खुली चेतावनी दे दी है। [1]
इस भीषण टकराव के बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने बहरीन में मौजूद अमेरिकी पांचवें बेड़े के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। इसके साथ ही कुवैत और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी रसद केंद्रों और हवाई अड्डों को भी ईरानी मिसाइलों द्वारा निशाना बनाया गया है। जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी सेना ने ईरानी तटीय क्षेत्रों पर 7 घंटे तक लगातार बमबारी की है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति के इस सबसे महत्वपूर्ण केंद्र में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है और वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है।
दूसरी ओर यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर मिसाइलें दागकर पिछले 4 वर्षों से जारी युद्धविराम को पूरी तरह तोड़ दिया है। हूतियों ने चेतावनी दी है कि यदि सऊदी अरब ने अपने हमले बंद नहीं किए, तो वे लाल सागर को जोड़ने वाले बाब अल-मंडेब जलमार्ग को भी पूरी तरह अवरुद्ध कर देंगे। विश्लेषकों का मानना है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के बाद यदि यह दूसरा मार्ग भी बंद हुआ, तो दुनिया की दो सबसे बड़ी ऊर्जा धमनियां पूरी तरह चोक हो जाएंगी।
यदि हूती बल इस दूसरे जलमार्ग को बंद करने में सफल होते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच सकती हैं। इस भीषण खतरे को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि वह तुरंत वार्ता के लिए तैयार नहीं हुआ, तो अमेरिकी सेना ईरान के सभी प्रमुख बिजली संयंत्रों, पुलों और मुख्य ऊर्जा ठिकानों को बमबारी करके पूरी तरह नष्ट कर देगी।
इस युद्ध के कारण वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल पुथल मच गई है और ब्रेंट क्रूड व वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट की कीमतें लगातार रिकॉर्ड स्तर पर बंद हो रही हैं। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग एजेंसियों ने वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे इन हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। पिछले 1 सप्ताह में 7 व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों में 12 से अधिक नाविकों के मारे जाने या घायल होने की पुष्टि हुई है।
इस नाकेबंदी और युद्ध ने दुनिया के सामने एक ऐसा ऐतिहासिक वैश्विक ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था के पूरी तरह ठप होने का खतरा उत्पन्न हो गया है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के बंद होने से दुनिया की 20 प्रतिशत गैस और तेल की दैनिक आपूर्ति पहले ही रुक चुकी है। अब सभी प्रमुख औद्योगिक और विकासशील देश अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए आपातकालीन रणनीतिक तेल भंडारों के उपयोग की योजना बनाने में जुट गए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि दोनों महाशक्तियों के बीच यह जंग तुरंत नहीं रुकी, तो आने वाले समय में ईंधन की भारी किल्लत और अभूतपूर्व मंदी का सामना करना पड़ेगा। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक क्षेत्र से अमेरिकी दखल पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, तब तक स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर नाकेबंदी जारी रहेगी। कूटनीतिक प्रयासों के पूरी तरह विफल होने के बाद अब दुनिया एक बेहद अनिश्चित और भयावह आर्थिक दौर की तरफ बढ़ रही है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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