SIA की छापेमारी से 1990 के दोहरे हत्याकांड की जांच फिर तेज हुई है। जम्मू कश्मीर में 9 ठिकानों पर तलाशी के बाद पुराने मामले में नए सुराग तलाशे जा रहे हैं।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
श्रीनगर, जम्मू कश्मीर। 1990 के चर्चित दोहरे हत्याकांड की जांच में बुधवार को बड़ा कदम सामने आया। जम्मू कश्मीर पुलिस की विशेष जांच एजेंसी SIA ने कश्मीरी पंडित कवि और विद्वान सरवनंद कौल प्रेमी तथा उनके बेटे वीरेंद्र कौल की हत्या के मामले में 9 ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली। IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्रवाई FIR 45/1990 से जुड़ी है, जो अनंतनाग के दूरू थाने में दर्ज हुई थी और अब इसकी जांच SIA कर रही है। तीन दशक से ज्यादा पुराने मामले में कार्रवाई से जांच फिर चर्चा में आ गई है। [1]
सरवनंद कौल प्रेमी और उनके बेटे वीरेंद्र कौल अनंतनाग के कोकरनाग इलाके के सोफ शाली गांव में रहते थे। 1990 में दोनों को उनके घर से अगवा किया गया था। इसके बाद उन्हें प्रताड़ित कर गोली मार दी गई थी और बाद में उनके शव पेड़ से लटके मिले थे। यह वारदात घाटी में आतंक के उस दौर की बेहद भयावह घटनाओं में शामिल रही। इस घटना ने कश्मीरी पंडित समुदाय के बीच सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा की और उस दौर की हिंसा की गंभीर तस्वीर सामने रखी।
अब SIA की छापेमारी के जरिए उन लोगों और ठिकानों से जुड़े संभावित सुराग तलाशे जा रहे हैं जिनका कथित तौर पर इस मामले से संबंध हो सकता है। अधिकारियों के मुताबिक जम्मू कश्मीर में कुल 9 स्थानों पर तलाशी ली गई। इनमें राजौरी जिले के 6 इलाके, जम्मू के 2 स्थान और घाटी का एक ठिकाना शामिल बताया गया है। हालांकि तलाशी के दौरान क्या बरामद हुआ और किन लोगों से पूछताछ हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। इसलिए जांच के नतीजे को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
सरवनंद कौल प्रेमी की पहचान सिर्फ इस हत्याकांड के पीड़ित के तौर पर नहीं थी। वे कश्मीर के सम्मानित कवि, लेखक और विद्वान थे। उन्होंने राष्ट्रीय एकता, सांप्रदायिक सद्भाव और विभिन्न समुदायों के बीच भाईचारे के लिए काम किया था। वे भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से भी जुड़े रहे थे। ऐसे में उनकी हत्या का असर केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रहा। यह मामला घाटी में उस दौर की लक्षित हिंसा और कश्मीरी पंडित समुदाय के पलायन से जुड़े सबसे गंभीर मामलों में भी गिना जाता रहा है।
SIA conducts raids across multiple locations in Kashmir Valley and at Shahbaaz Colony, Jammu, 36 years after the killing of Kashmiri Pandit writer Sarwanand Koul Premi and his son Virender Koul, as part of efforts to trace those involved.@SIAJKPolice
— Akashvani News Jammu (@radionews_jammu) August 12, 2026
Report: @RahiKapoor2 pic.twitter.com/eMgCrVLX2r
SIA की छापेमारी ऐसे समय हुई है जब आतंकवाद के दौर में हुई पुरानी हत्याओं की जांच को फिर से आगे बढ़ाया जा रहा है। एजेंसी पुराने दस्तावेजों, संभावित आरोपियों और उपलब्ध साक्ष्यों की कड़ियों को खंगाल रही है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि तलाशी उन संपत्तियों और लोगों से जुड़ी हो सकती है जिनका कथित तौर पर 1990 की इस वारदात की साजिश से संबंध रहा हो। हालांकि अभी किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने या किसी नई गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इस कार्रवाई से पहले जून में SIA की छापेमारी ने कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट की 1990 में हुई हत्या के मामले में 737 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। इस मामले में जेल में बंद JKLF प्रमुख यासीन मलिक को कथित साजिश के प्रमुख आरोपी के तौर पर नामित किया गया था। सरला भट को उस समय अगवा किया गया था जब घाटी में हालात तेजी से बिगड़ रहे थे। बाद में उनकी हत्या कर दी गई थी। यह मामला भी लंबे समय तक लंबित रहने के बाद जांच के दायरे में वापस आया।
अब प्रेमी और उनके बेटे की हत्या के मामले में SIA की छापेमारी को पुराने अनसुलझे मामलों की जांच आगे बढ़ाने की इसी प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है। FIR 45/1990 के तहत चल रही जांच में एजेंसी का फोकस संभावित साजिश, उससे जुड़े लोगों और उपलब्ध साक्ष्यों पर है। फिलहाल तलाशी के बाद किसी बड़ी बरामदगी या गिरफ्तारी की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में आगे की जांच और एजेंसी की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी। 1990 का यह मामला दशकों बाद फिर जांच के केंद्र में आ गया है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्य, संभावित आरोप और कार्रवाई को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।