PM मोदी ने युवाओं से शॉर्टकट से बचें की अपील करते हुए रामनाथ कोविंद की आत्मकथा पढ़ने की सलाह दी। बोले, मुश्किलों से लड़कर आगे बढ़ने की सीख लें।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
नई दिल्ली, दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को युवाओं से कहा कि कामयाबी के लिए शॉर्टकट तलाशने के बजाय मेहनत और संघर्ष से सीख लेनी चाहिए। IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री ने यह बात विज्ञान भवन में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles के विमोचन के दौरान कही। मोदी ने युवाओं से शॉर्टकट से बचें की अपील करते हुए कहा कि कोविंद का जीवन मुश्किल हालात में आगे बढ़ने और देश की सेवा करने की प्रेरणा देता है। [1]
प्रधानमंत्री ने कहा कि रामनाथ कोविंद का जीवन इस बात की मिसाल है कि साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाला व्यक्ति भी कठिनाइयों को पार करके देश के सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि कोविंद ने अपने जीवन को सम्मान देने के साथ उन लोगों के सपनों को भी मजबूती दी जो समाज के वंचित वर्गों से आते हैं। मोदी के मुताबिक उनकी यात्रा युवाओं को शॉर्टकट से बचें और धैर्य के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने की सीख देती है।
मोदी ने युवाओं से कहा कि आज सोशल मीडिया और रील्स का दौर है। ऐसे माहौल में जल्दी सफलता पाने की चाह बढ़ रही है और कई लोग आसान रास्ते को ही सबसे बेहतर मानने लगते हैं। प्रधानमंत्री ने रेलवे स्टेशनों पर लिखे संदेश का जिक्र करते हुए कहा कि शॉर्टकट आखिरकार रास्ता छोटा करने के बजाय व्यक्ति की संभावनाओं को भी छोटा कर सकता है। उन्होंने युवाओं से शॉर्टकट से बचें और अपने काम में लगातार मेहनत करने की अपील की।
Watch | दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा 'ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्ट्रगल्स' का विमोचन किया।
— यूनीवार्ता (@univartaindia1) August 12, 2026
इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और पूर्व प्रथम महिला सविता कोविंद भी मौजूद रहीं।@PMOIndia | @narendramodi |… pic.twitter.com/pRRMXt8CLf
प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं को जिस भी व्यक्ति से प्रेरणा मिलती है उसकी आत्मकथा पढ़नी चाहिए। उनके मुताबिक आत्मकथा केवल किसी व्यक्ति की जिंदगी नहीं बताती बल्कि उस दौर की घटनाओं और इतिहास को समझने का अलग नजरिया भी देती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि कोविंद की किताब आने वाली पीढ़ी के लिए उपयोगी साबित होगी। मोदी ने कहा कि ऐसी किताबों के जरिए युवा संघर्ष, धैर्य और शॉर्टकट से बचें जैसे जीवन मूल्यों को वास्तविक अनुभवों से समझ सकते हैं।
मोदी ने आत्मकथा में पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के साथ कोविंद के अनुभवों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन के दौरान मिले ऐसे अनुभवों ने कोविंद के काम करने और राजनीति को समझने के तरीके को प्रभावित किया। प्रधानमंत्री ने कोविंद के जीवन में सादगी, ईमानदारी और जिम्मेदारी को खास महत्व दिया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों से निकलने वाले व्यक्ति के अनुभव आगे चलकर समाज और देश के लिए काम करने की ताकत बन सकते हैं।
वीडियो । नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "मैं युवा पीढ़ी से आग्रह करता हूं कि वे रामनाथ कोविंद जी की जीवन यात्रा को उन्हीं के शब्दों में जानें और उनके लेखन तथा अनुभवों के बारे में पढ़ें। इससे हर किसी को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। मैं कोविंद जी को उनकी आत्मकथा के लिए… pic.twitter.com/edlQhHG8H6
— पीटीआई न्यूज_भाषा (@PTINews_Bhasha) August 12, 2026
प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविंद ने संसद सदस्य से लेकर राज्यपाल और फिर राष्ट्रपति तक अलग अलग जिम्मेदारियां निभाईं और हर भूमिका में कर्तव्य भावना दिखाई। उनके मुताबिक राष्ट्रपति पद पूरा होने के बाद भी कोविंद राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों से जुड़े रहे। मोदी ने खास तौर पर One Nation, One Election जैसे विषयों पर उनकी सक्रियता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च संवैधानिक पद से हटने के बाद भी कोविंद का सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह दूर न होना युवाओं के लिए एक अलग संदेश देता है।
मोदी के संबोधन का मूल संदेश यही रहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए आसान रास्ते की तलाश हमेशा सही रणनीति नहीं होती। उन्होंने कोविंद के जीवन को उदाहरण बनाते हुए कहा कि मुश्किल समय इंसान को मजबूत बनाता है और ईमानदारी तथा जिम्मेदारी लंबे सफर की नींव तैयार करती है। युवाओं के लिए यह संदेश खास तौर पर सोशल मीडिया के दौर में महत्वपूर्ण है, जहां तेज सफलता अक्सर सबसे बड़ा आकर्षण बन जाती है। प्रधानमंत्री ने इसी संदर्भ में शॉर्टकट से बचें और मेहनत को प्राथमिकता देने की बात कही।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। प्रधानमंत्री के संबोधन और पुस्तक से जुड़े सभी संदर्भ उपलब्ध समाचार तथ्यों पर आधारित हैं और किसी व्यक्ति के विचारों को स्वतंत्र संपादकीय निष्कर्ष के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।