हेलमेट जागरूकता की मिसाल कांस्टेबल चालक बस्तीराम बिश्नोई- 9 साल से साइकिल पर हेलमेट पहनकर लोगों को जीवन सुरक्षा का संदेश दे रहे हैं।
हेलमेट जागरूकता की मिसाल कांस्टेबल चालक बस्तीराम बिश्नोई
बीकानेर, राजस्थान। हेलमेट जागरूकता की एक अभूतपूर्व मिसाल यहां सामने आई है। सीआईडी सीबी रेंज सेल बीकानेर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रघुवीर प्रसाद शर्मा के कांस्टेबल चालक बस्तीराम बिश्नोई पिछले 9 वर्षों से रोज करीब 15 से 20 किलोमीटर साइकिल चलाते हैं। खास बात यह है कि वह साइकिल चलाते समय भी हेलमेट पहनते हैं और रास्ते में लोगों को सड़क सुरक्षा के लिए जागरूक करते हैं। उनका अभियान मेरी साइकिल, मेरा हेलमेट नाम से चलता है।
बस्तीराम का साफ संदेश है, "हेलमेट चालान से बचने के लिए नहीं, जिंदगी बचाने के लिए जरूरी है।"
वर्ष 2018 में घर से कार्यालय जाते समय बस्तीराम ने पीबीएम अस्पताल के पास एक युवक को बिना हेलमेट बाइक चलाते देखा। अचानक बाइक का संतुलन बिगड़ा और युवक सड़क पर गिर गया। सिर में गंभीर चोट लगने के बाद उसे पीबीएम अस्पताल ले जाया गया और बाद में मेदांता अस्पताल भेजा गया। वहां 4 दिन उपचार के बाद युवक की मौत हो गई। अखबार के माध्यम से घटना की पूरी जानकारी मिलने पर बस्तीराम अंदर तक हिल गए। उन्होंने उसी दिन खुद हमेशा हेलमेट पहनने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया। यही घटना उनके अभियान की वजह बनी।
इसके बाद बस्तीराम ने साइकिल चलाते समय भी हेलमेट पहनना शुरू कर दिया। पिछले 9 वर्षों से उनका यह नियम लगातार जारी है। वह रोज 15 से 20 किलोमीटर साइकिल चलाकर लोगों के बीच सड़क सुरक्षा का संदेश पहुंचाते हैं। उनका मानना है कि केवल यातायात नियम बताने से ज्यादा असर तब होता है जब कोई व्यक्ति खुद उनका पालन करता दिखाई दे। इसी सोच के साथ हेलमेट जागरूकता उनके रोजमर्रा के सफर का हिस्सा बन गई। उनका कहना है कि सड़क पर छोटी सी लापरवाही भी परिवार की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है, इसलिए सुरक्षा को आदत बनाना जरूरी है।
बस्तीराम का मानना है कि सड़क सुरक्षा केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। उनका प्रयास है कि लोग हेलमेट को केवल यातायात नियम या चालान से बचने का माध्यम न समझें, बल्कि इसे अपने और अपने परिवार के जीवन की सुरक्षा से जोड़कर देखें। उनका कहना है कि एक हादसे ने उन्हें जिंदगी की कीमत समझाई और उसी घटना ने उन्हें हेलमेट जागरूकता का संदेशवाहक बना दिया। मेरी साइकिल, मेरा हेलमेट अभियान इसी सोच का प्रेरणादायी उदाहरण बन गया है।
हेलमेट जागरूकता की मिसाल कांस्टेबल चालक बस्तीराम बिश्नोई के जीवन रक्षक अभियान मेरी साइकिल, मेरा हेलमेट का हम पूर्ण समर्थन करते हैं। आम जन से अपील है कि सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों का आवश्यक रूप से पालन करें।