बाज़ार और निवेश

विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ा, भारत के खाते में आएंगे 95 अरब डॉलर

आरबीआई की नीतियों से विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ने की उम्मीद है। FY27 में 95 अरब डॉलर तक पूंजी आने और भुगतान संतुलन में 64 अरब डॉलर अधिशेष का अनुमान है।

By अजय त्यागी 1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो

आरबीआई की नई नीतियों से विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ने की उम्मीद है। अनुमान है कि FY27 में भारत को 90 से 95 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह मिल सकता है और भुगतान संतुलन 64 अरब डॉलर के अधिशेष में जा सकता है। केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह बदलाव वैश्विक उतार चढ़ाव के बीच भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकता है और विदेशी मुद्रा के मोर्चे पर बड़ा सहारा दे सकता है। [1]

विदेशी धन का बढ़ा जोर

केयरएज रेटिंग्स ने एफसीएनआर बी जमा से मिलने वाले प्रवाह का अनुमान बढ़ाकर करीब 80 अरब डॉलर कर दिया है। इसके अलावा बाहरी वाणिज्यिक उधारी और विदेशी मुद्रा प्रवाह से 10 से 15 अरब डॉलर मिलने की उम्मीद है। इस तरह FY27 में कुल पूंजी प्रवाह 90 से 95 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे भारत के पूंजी खाते का अधिशेष करीब 108 अरब डॉलर हो सकता है, जबकि पिछले साल यह केवल 2 अरब डॉलर था। यानी बाहरी खाते में बड़ा बदलाव दिख सकता है।

आरबीआई की ओर से 5 जून 2026 को घोषित रियायती स्वैप व्यवस्था और दूसरी नीतिगत पहलों को बैंकों तथा विदेशी निवेशकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। 5 जून से 31 जुलाई 2026 के बीच इन उपायों से 40.8 अरब डॉलर आए। इसमें एफसीएनआर बी जमा का हिस्सा 36.7 अरब डॉलर रहा, जबकि बाहरी वाणिज्यिक उधारी और विदेशी मुद्रा उधारी से 4.1 अरब डॉलर आए। मजबूत विदेशी पूंजी प्रवाह ने बाजार में विदेशी मुद्रा की उपलब्धता बढ़ाने के साथ भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति को सहारा देने का काम किया है।

भुगतान खाते में राहत

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का भुगतान संतुलन FY27 में 64 अरब डॉलर के अधिशेष में रह सकता है। इसके मुकाबले FY26 में 23.6 अरब डॉलर और FY25 में 5 अरब डॉलर का घाटा दर्ज किया गया था। अगर यह अनुमान सही रहता है तो भारत की बाहरी स्थिति में काफी सुधार माना जाएगा। रेटिंग एजेंसी का कहना है कि मजबूत पूंजी प्रवाह वैश्विक अस्थिरता के दौर में देश के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच बन सकता है। इससे विदेशी वित्तीय दबाव से निपटने की क्षमता भी बेहतर हो सकती है।

बैंकों की जमा दरों ने भी इस योजना को आकर्षक बनाया है। बड़े बैंक एफसीएनआर जमा पर 6 से 6.5 प्रतिशत तक ब्याज दे रहे हैं, जबकि कुछ छोटे और नए बैंक करीब 7 प्रतिशत तक की दर पेश कर रहे हैं। इसके अलावा कुछ विदेशी बैंक निवेशकों को 19 गुना से 29 गुना तक का लाभ उठाने की सुविधा दे रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस तरह की शर्तों ने योजना में भागीदारी बढ़ाने में मदद की है। इससे विदेशी पूंजी प्रवाह उम्मीद से बेहतर रहने की संभावना मजबूत हुई है।

घरेलू तरलता को सहारा

रिपोर्ट में घरेलू बैंकिंग व्यवस्था की तरलता में भी सुधार का संकेत दिया गया है। जुलाई में बैंकिंग प्रणाली की औसत तरलता करीब 1.1 ट्रिलियन रुपये रही थी। अगस्त में यह अब तक बढ़कर करीब 3 ट्रिलियन रुपये हो गई है। महीने के अंत में आने वाले विदेशी धन ने भी इसमें मदद की है। अगर विदेशी पूंजी प्रवाह आगे भी मजबूत बना रहता है तो बैंकिंग व्यवस्था में नकदी की उपलब्धता को सहारा मिल सकता है। इससे घरेलू वित्तीय बाजार पर दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

केयरएज रेटिंग्स का अनुमान भारत के बाहरी खाते के लिए एक सकारात्मक तस्वीर पेश करता है, लेकिन यह भविष्य का अनुमान है और वास्तविक आंकड़े वैश्विक बाजार, ब्याज दरों, विदेशी निवेशकों के फैसलों तथा बाहरी वित्तीय परिस्थितियों पर निर्भर करेंगे। फिलहाल एफसीएनआर बी जमा, बाहरी वाणिज्यिक उधारी और विदेशी मुद्रा प्रवाह से मिल रहा समर्थन अहम माना जा रहा है। अगर यही रुझान जारी रहता है तो विदेशी पूंजी प्रवाह भारत के भुगतान संतुलन और बाहरी आर्थिक मजबूती के लिए बड़ा सहारा बन सकता है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। आर्थिक अनुमान और पूंजी प्रवाह से जुड़े आंकड़े भविष्य की संभावनाओं पर आधारित हैं और वास्तविक परिणाम वैश्विक तथा घरेलू आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार बदल सकते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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