बीकानेर में रिश्वत के मामले में सीबीआई ने 48 करोड़ के रेलवे टेंडर का बिल पास कराने के बदले 1.20 लाख लेते 2 रेलकर्मियों को पकड़ा है, जांच जारी है।
प्रतीकात्मक फोटो
बीकानेर, राजस्थान। बीकानेर में रिश्वत के एक बड़े मामले में सीबीआई ने रेलवे के 2 कर्मचारियों को 1.20 लाख रुपये की कथित रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। मामला कोलकाता की एमआरटी कंपनी को मिले करीब 48 करोड़ रुपये के रेलवे टेंडर से जुड़ा है। आरोप है कि काम के बिलों का भुगतान मंजूर कराने और फाइल आगे बढ़ाने के बदले लगातार पैसे मांगे जा रहे थे। शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने सत्यापन किया और फिर जाल बिछाकर कार्रवाई की। [1]
जानकारी के मुताबिक कंपनी के कर्मचारी नवल किशोर ने रेलवे कर्मचारियों की कथित रिश्वत मांग से परेशान होकर सीबीआई से शिकायत की थी। शिकायत मिलने के बाद एजेंसी ने पहले आरोपों की पुष्टि के लिए गोपनीय सत्यापन किया। सत्यापन में मांग की पुष्टि होने के बाद ट्रैप की तैयारी की गई। तय योजना के मुताबिक कंपनी के प्रतिनिधि को रकम लेकर भेजा गया। जैसे ही 1.20 लाख रुपये की राशि आरोपियों तक पहुंची सीबीआई की टीम ने मौके पर दोनों कर्मचारियों को पकड़ लिया।
बताया जा रहा है कि गिरफ्तार कर्मचारियों में रेलवे के सीनियर सेक्शन ऑफिसर राजेंद्र चौधरी और राकेश शामिल हैं। आरोप है कि दोनों टेंडर के तहत हुए काम के बिलों को मंजूरी दिलाने और भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत मांग रहे थे। कार्रवाई के दौरान कंपनी के प्रतिनिधि नवल किशोर को भी सीबीआई ने हिरासत में लिया है। उससे मामले को लेकर पूछताछ की जा रही है ताकि रिश्वत की मांग और पूरे लेनदेन से जुड़े बाकी तथ्यों को समझा जा सके।
गिरफ्तारी के बाद सीबीआई की टीम ने आरोपियों से जुड़े दफ्तरों और आवासीय ठिकानों पर तलाशी शुरू कर दी। जांच में टेंडर से संबंधित कागजात के साथ डिजिटल सबूत और दूसरे रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित रिश्वत की मांग केवल इन 2 कर्मचारियों तक सीमित थी या इसमें दूसरे अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल थे। तलाशी के दौरान मिलने वाली सामग्री आगे की जांच में अहम मानी जा रही है।
बीकानेर में रिश्वत का यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आरोप करीब 48 करोड़ रुपये के बड़े रेलवे टेंडर से जुड़े भुगतान पर लगाए गए हैं। सीबीआई अब यह जांच कर रही है कि कंपनी के काम से जुड़े बिलों की स्थिति क्या थी और भुगतान की प्रक्रिया में किन अधिकारियों की भूमिका थी। साथ ही कथित रिश्वत की मांग कब और किस तरीके से की गई इसकी जानकारी भी जुटाई जा रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में और लोगों की भूमिका सामने आ सकती है।
रेलवे से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों में बीकानेर में रिश्वत की यह कार्रवाई अकेली नहीं है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक हाजीपुर में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर टेंडर से जुड़े मामले में करीब 98.81 लाख रुपये की बरामदगी हुई थी। मुंबई में 40.54 करोड़ रुपये के टेंडर से जुड़े मामले में 10 लाख रुपये की पहली किस्त लेने का आरोप सामने आया था। सिलचर में 20 लाख रुपये के बकाया बिल से जुड़े मामले में 20,000 रुपये की कथित रिश्वत पर कार्रवाई हुई थी। इन मामलों में भी रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई।
बीकानेर में रिश्वत के इस मामले में अब सीबीआई की जांच कई सवालों के जवाब तलाश रही है। 48 करोड़ रुपये के टेंडर में भुगतान की पूरी प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच होगी। एजेंसी यह भी देखेगी कि क्या कथित रिश्वत मांगने के पीछे कोई और व्यक्ति शामिल था। फिलहाल 1.20 लाख रुपये लेते 2 रेलकर्मियों की गिरफ्तारी इस कार्रवाई का मुख्य घटनाक्रम है। आरोपों की अंतिम स्थिति जांच और अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही साफ होगी।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट उपलब्ध तथ्यों और संबंधित स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।