वायुवीर बनी बेटी ने 0.25 फीसदी कम अंकों से मिली पहली हार के बाद 6 महीने तक खुद को संभाला और फिर ट्रेनिंग पूरी कर नया मुकाम हासिल कर लिया।
पीजी कॉलेज में स्वागत कार्यक्रम में प्रियदर्शनी राजपुरोहित
बाड़मेर, राजस्थान। बाड़मेर की बेटी प्रियदर्शनी राजपुरोहित ने जिले की पहली वायुवीर बनकर परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। इंडियन एयरफोर्स से वायुवीर की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद शुक्रवार को बाड़मेर लौटने पर पीजी कॉलेज के एनसीसी साथियों और स्थानीय लोगों ने फूल मालाओं से उनका स्वागत किया। प्रियदर्शनी ने कॉलेज के स्वागत कार्यक्रम में अपनी सफलता की कहानी साझा की और बताया कि पहली कोशिश में 0.25 फीसदी कम अंक आने से उन्हें असफलता मिली थी। [1]
प्रियदर्शनी ने बताया कि पहली असफलता के बाद वह काफी निराश हो गई थीं। परिवार को उनसे पूरी उम्मीद थी और नतीजा मनमुताबिक नहीं आने से उन्हें सबसे ज्यादा दुख इसी बात का हुआ। इसके बाद उन्होंने करीब 6 महीने तक खुद को घर तक सीमित रखा। इस दौरान परिवार और शिक्षकों ने उनका हौसला बढ़ाया और समझाया कि एक कोशिश में सफलता नहीं मिली तो अगली कोशिश की जा सकती है। उन्होंने दोबारा तैयारी शुरू की और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर आगे बढ़ने का फैसला किया।
प्रियदर्शनी का कहना है कि असफलता के समय लोगों की बातें और ताने मनोबल कमजोर कर सकते हैं। इसलिए किसी बड़े लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश करते समय उसका ज्यादा प्रचार नहीं करना चाहिए। उनका मानना है कि लोगों की बातों का जवाब आपकी सफलता ही देती है। प्रियदर्शनी ने कहा कि उन्होंने दोबारा तैयारी करते समय लोगों की राय से ज्यादा अपने लक्ष्य पर भरोसा किया। यही सोच उन्हें आगे बढ़ाती रही और आखिरकार इंडियन एयरफोर्स की ट्रेनिंग पूरी करने में कामयाबी मिली।
प्रियदर्शनी ने बताया कि उन्होंने बचपन में ही परिवार से कह दिया था कि वह सेना में जाना चाहती हैं। उनके दादा बागसिंह राजपुरोहित बीएसएफ में रहे हैं, इसलिए परिवार ने उनके सपने को पूरा करने में पूरा साथ दिया। परिवार और शिक्षकों के सहयोग के साथ एनसीसी से जुड़ाव ने भी उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। अब प्रियदर्शनी का लक्ष्य यहीं रुकना नहीं है। वह मेहनत जारी रखकर भविष्य में फोर्स में ऑफिसर बनने का सपना पूरा करना चाहती हैं।
पीजी कॉलेज में आयोजित स्वागत कार्यक्रम में कॉलेज प्राचार्य मृणाली चौहान, एनसीसी कैप्टन आदर्श किशोर जाणी, रघुवीर सिंह तमलोर समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। प्रियदर्शनी की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है जो पहली कोशिश में असफल होने के बाद निराश हो जाते हैं। उनका कहना है कि असफलता को अंतिम परिणाम नहीं मानना चाहिए और लक्ष्य पर लगातार मेहनत करनी चाहिए। वायुवीर बनी बेटी ने अपनी उपलब्धि से यह संदेश दिया कि धैर्य और मेहनत से रास्ता फिर खुल सकता है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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