तीज माता की सवारी शनिवार शाम किले से राजसी ठाट बाट के साथ निकली। पुरानी धान मंडी के तीज मेले में महिलाओं और बच्चों की भीड़ उमड़ी, खरीदारी भी हुई।
तीज माता की सवारी
कुचामन सिटी, राजस्थान। सावन की हरियाली तीज पर शनिवार शाम तीज माता की सवारी कुचामन किले से राजसी ठाट बाट के साथ निकाली गई। तीज के अवसर पर पुरानी धान मंडी में मेला भी लगाया गया और लोगों में उत्साह रहा। इस दौरान महिलाओं और बच्चों की भीड़ खरीदारी के लिए उमड़ी। पर्व को सुहागिनों के अखंड सौभाग्य, प्रेम और त्याग का प्रतीक माना जाता है। यह आयोजन भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन से जुड़ी परंपरा को भी दर्शाता है। [1]
श्रीसेवा समिति संस्था के मंत्री सुशील काबरा ने बताया कि तीज माता की सवारी राजा महाराजा के समय से ही कुचामन गढ़ से निकलती आ रही है। शनिवार को भी किले से बैंड बाजे के साथ पारंपरिक सवारी रवाना हुई। सवारी सदर बाजार, पलटन गेट, गोल प्याऊ, बस स्टैंड, अम्बेडकर सर्किल और आथूणा दरवाजा होते हुए वापस कुचामन फोर्ट पहुंची। पूरे मार्ग में पर्व का उत्साह नजर आया। राजसी परंपरा से जुड़ी यह सवारी शहर की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बनी हुई है।
महिला मंडल की ललिता वर्मा ने बताया कि तीज से एक दिन पहले सिंजारा मनाया जाता है। इस दिन सुहागिनें विशेष पूजन करती हैं और हाथों में मेहंदी लगाकर तीज माता की पूजा करती हैं। हरियाली तीज के मौके पर महिलाओं में पर्व को लेकर खास उत्साह रहता है। धार्मिक मान्यताओं के साथ यह पर्व सावन की हरियाली और मानसून के स्वागत से भी जुड़ा है। तीज माता की सवारी इसी परंपरा को सार्वजनिक उत्सव का रूप देती है और शहर में धार्मिक तथा सांस्कृतिक माहौल बनाती है।
महिला मंडल की हिमानी शर्मा ने बताया कि तीज के दिन घरों में विशेष मिठाई घेवर बनवाए जाते हैं। नवविवाहिताएं तीज माता की विशेष पूजा करती हैं और परिवार के साथ पर्व मनाती हैं। शहर की पुरानी धान मंडी में लगे तीज मेले में खरीदारी के लिए महिलाओं और बच्चों की भीड़ उमड़ी। मेले में पर्व से जुड़ी वस्तुओं की खरीदारी को लेकर भी लोगों में उत्साह दिखाई दिया। सवारी और मेले के आयोजन ने सावन के इस पर्व की रौनक को और बढ़ा दिया।
हरियाली तीज का पर्व सुहागिनों के लिए अखंड सौभाग्य, प्रेम और त्याग की भावना से जुड़ा माना जाता है। कुचामन में तीज माता की सवारी के साथ इस परंपरा की झलक राजसी अंदाज में देखने को मिली। किले से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरने वाली सवारी ने लोगों का ध्यान खींचा। पुरानी धान मंडी का मेला भी आयोजन का खास हिस्सा रहा। धार्मिक परंपरा, राजसी विरासत और सावन की उमंग ने मिलकर शहर में हरियाली तीज की रौनक बढ़ाई।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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