CAG की रिपोर्ट में 512 स्टेशनों की जांच के दौरान स्टेशन पर ई कोलाई मिलने, सफाई की कमी और जरूरी सुविधाओं के अभाव ने यात्रियों की चिंता बढ़ाई है।
प्रतीकात्मक फोटो
नई दिल्ली, भारत। भारतीय रेलवे के गैर उपनगरीय स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं और स्वच्छता को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की एक रिपोर्ट के अनुसार, 12 अगस्त को संसद में रखी गई रिपोर्ट में 512 चयनित स्टेशनों की जांच की गई। कई जगह पीने के पानी की गुणवत्ता और साफ सफाई में खामियां मिलीं। स्टेशन पर ई कोलाई मिलने के मामले भी सामने आए। रिपोर्ट के मुताबिक 458 स्टेशन न्यूनतम जरूरी यात्री सुविधाओं के मामले में तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। [1]
CAG ने बताया कि 6 जोन के 59 स्टेशनों पर पीने के पानी की बैक्टीरियोलॉजिकल जांच ही नहीं की गई। वहीं पानी के कूलरों से लिए गए नमूनों में कोयंबटूर और पालक्काड जंक्शन समेत कई स्टेशनों पर E coli पॉजिटिव पाया गया। इसके अलावा प्लेटफॉर्म के नलों से लिए गए नमूनों में भी टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मौजूदगी मिली। 2022-23 में 49 और 2023-24 में 56 स्टेशनों के नमूनों की जांच में ऐसी स्थिति सामने आई।
ई कोलाई यानी Escherichia coli एक प्रकार का बैक्टीरिया है जो इंसानों और गर्म खून वाले जानवरों की आंतों में सामान्य रूप से पाया जाता है। इसकी ज्यादातर किस्में नुकसानदायक नहीं होतीं, लेकिन कुछ किस्में गंभीर बीमारी पैदा कर सकती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दूषित पानी के मामले में E coli को मल से होने वाले प्रदूषण का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। इसलिए स्टेशन पर ई कोलाई मिलने का मतलब पानी की स्वच्छता और स्रोत की जांच को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
हर E coli संक्रमण एक जैसा नहीं होता। कुछ बीमारी पैदा करने वाली किस्में दस्त, पेट में ऐंठन और उल्टी जैसी समस्याएं पैदा कर सकती हैं। कुछ गंभीर किस्मों में खूनी दस्त और हेमोलिटिक यूरेमिक सिंड्रोम जैसी जानलेवा जटिलताएं भी हो सकती हैं। हालांकि CAG रिपोर्ट में जिन पानी के नमूनों में E coli मिला, उनसे किसी व्यक्ति के बीमार होने का निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। यहां चिंता मुख्य रूप से पीने के पानी की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था की कमी को लेकर है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दूषित पानी पीने से कई तरह के संक्रमण फैल सकते हैं और सुरक्षित पेयजल की सबसे अहम शर्तों में माइक्रोबियल प्रदूषण से बचाव शामिल है। इसी वजह से स्टेशन पर ई कोलाई मिलने की खबर को केवल एक बैक्टीरिया की मौजूदगी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह पानी की जांच, स्वच्छता और आपूर्ति व्यवस्था की नियमित निगरानी से जुड़ा मामला है। CAG ने भी पेयजल की व्यापक जांच और निर्धारित प्रोटोकॉल के पालन की जरूरत बताई है।
CAG ने पाया कि चुने गए 512 स्टेशनों में से 458 यानी 89 प्रतिशत से अधिक स्टेशनों पर Minimum Essential Amenities के मानक पूरे नहीं हुए। अप्रैल 2018 में रेलवे बोर्ड ने NSG 1 से NSG 6 श्रेणी के स्टेशनों के लिए न्यूनतम जरूरी सुविधाएं तय की थीं और 31 अगस्त 2018 तक उन्हें सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा था। इनमें पीने का पानी, प्रतीक्षालय, बैठने की व्यवस्था, प्लेटफॉर्म शेल्टर, शौचालय, पंखे, फुट ओवर ब्रिज और कूड़ेदान जैसी सुविधाएं शामिल थीं।
रिपोर्ट के अनुसार CSMT, हावड़ा, सियालदह, नई दिल्ली और मुंबई सेंट्रल जैसे NSG 1 श्रेणी के प्रमुख स्टेशनों पर भी बैठने की व्यवस्था, शौचालय, कूड़ेदान और इलेक्ट्रॉनिक ट्रेन संकेतक जैसी सुविधाओं में कमियां मिलीं। Passenger Amenities Management System के विश्लेषण में 201 स्टेशनों पर लैट्रिन, 403 स्टेशनों पर यूरिनल और 2035 स्टेशनों पर पानी के नलों की कमी सामने आई। यानी समस्या केवल सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरी यात्री सुविधाओं के तय मानकों के पालन से भी जुड़ी है।
CAG की रिपोर्ट में 2019-20 से 2023-24 के बीच हुई जांच में सामने आए मामले शामिल किए गए हैं। जरूरत के अनुसार पहले के ऐसे मामले भी शामिल किए गए जो पहले रिपोर्ट नहीं हुए थे और 2023-24 के बाद के कुछ उदाहरण भी लिए गए। रिपोर्ट के मुताबिक देश में 5908 गैर उपनगरीय समूह के स्टेशन हैं। 2023-24 में भारतीय रेलवे ने रोजाना 7424 से अधिक गैर उपनगरीय यात्री ट्रेनें चलाईं और इनसे 292.4 करोड़ यात्रियों ने सफर किया।
CAG ने रेलवे को पानी की आपूर्ति व्यवस्था की जांच के तय प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने और Uniform Drinking Water Quality Protocol के तहत पेयजल की सभी जरूरी जांच कराने की सिफारिश की है। स्टेशन पर ई कोलाई मिलने जैसे मामले यह बताते हैं कि पेयजल की नियमित निगरानी को केवल औपचारिक जांच नहीं माना जा सकता। करोड़ों यात्रियों के इस्तेमाल वाले स्टेशनों पर साफ पानी, स्वच्छ शौचालय और जरूरी सुविधाओं की लगातार निगरानी जरूरी है, ताकि तय मानकों की कमियां समय रहते दूर की जा सकें।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। ई कोलाई की मौजूदगी की स्वास्थ्य संबंधी गंभीरता उसकी किस्म और संक्रमण की स्थिति पर निर्भर करती है तथा CAG की रिपोर्ट में किसी व्यक्ति के संक्रमित होने का निष्कर्ष नहीं दिया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।