फर्जी खबरों पर कार्रवाई के लिए सरकार की नई व्यवस्था। मंत्रालयों की QRT अब वायरल और भ्रामक पोस्ट की जांच कर 2 घंटे में तथ्यात्मक जवाब देने की दिशा मे काम करेंगी।
प्रतीकात्मक फोटो
नई दिल्ली, भारत। सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों, गलत सूचनाओं और भ्रामक पोस्ट पर सरकार ने तेज प्रतिक्रिया की तैयारी शुरू कर दी है। केंद्र के अलग अलग मंत्रालय और विभाग क्विक रिस्पॉन्स टीम यानी QRT गठित कर रहे हैं। इन टीमों का उद्देश्य संदिग्ध सामग्री की तुरंत जांच करना और सही तथ्य सामने रखना है। अधिकारियों के अनुसार कोशिश होगी कि ऐसी सामग्री सामने आने के 2 घंटे के भीतर संबंधित मंत्रालय की ओर से तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट कर दी जाए। यही फर्जी खबरों पर कार्रवाई की नई व्यवस्था है। [1]
नई व्यवस्था के तहत मंत्रालयों की सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया टीमें अपने विभाग से जुड़ी ऑनलाइन सामग्री पर लगातार निगरानी रखेंगी। इसमें नीतियां, योजनाएं, कार्यक्रम, फैसले और घोषणाएं शामिल होंगी। कोई पोस्ट फर्जी, भ्रामक, तथ्यात्मक रूप से गलत, बदली हुई या संदर्भ से हटाकर पेश की गई नजर आती है तो उसे QRT के सामने रखा जाएगा। टीम उपलब्ध तथ्यों की जांच करेगी और संबंधित विभाग की वास्तविक स्थिति तैयार करेगी। इसके बाद जरूरत के मुताबिक आधिकारिक जवाब जारी किया जाएगा।
सरकार का जोर केवल किसी पोस्ट का विरोध करने पर नहीं, बल्कि लोगों तक सही तथ्य समय पर पहुंचाने पर है। अधिकारियों के अनुसार सोशल मीडिया पर गलत सूचना तेजी से फैल सकती है और देर से दिया गया स्पष्टीकरण कई बार कम असरदार साबित होता है। इसलिए फर्जी खबरों पर कार्रवाई को तेज और तथ्य आधारित बनाने पर जोर दिया जा रहा है। मंत्रालयों की सोशल मीडिया टीमें जरूरत पड़ने पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की न्यू मीडिया विंग से इनपुट लेंगी और PIB फैक्ट चेक इकाई के साथ भी समन्वय करेंगी।
हर संदिग्ध पोस्ट को समान स्तर की कार्रवाई के दायरे में नहीं रखा जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक जिस सामग्री की वायरलिटी बहुत अधिक हो, जिसमें व्यापक जनहित जुड़ा हो या जिससे जनता को नुकसान पहुंचने की आशंका हो, उसे प्राथमिकता दी जाएगी। संवेदनशील नीतिगत मामलों, कानूनी प्रभाव वाले मामलों, समन्वित गलत सूचना अभियानों और एक से अधिक मंत्रालयों से जुड़े मुद्दों को वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाया जा सकता है। इससे गंभीर मामलों में प्रतिक्रिया की प्रक्रिया को और तेज करने का प्रयास किया जाएगा।
बिजली, कृषि और वाणिज्य जैसे कुछ विभाग पहले ही QRT गठित कर चुके हैं। इन टीमों की जिम्मेदारी सोशल मीडिया पर सामने आने वाली संदिग्ध सामग्री की जांच, संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय और तथ्यात्मक स्थिति तैयार करना होगी। सरकार चाहती है कि किसी वायरल दावे पर प्रतिक्रिया केवल सोशल मीडिया चर्चा के आधार पर नहीं हो, बल्कि उपलब्ध रिकॉर्ड और प्रमाणों की जांच के बाद आधिकारिक स्थिति सामने रखी जाए। इससे फर्जी खबरों पर कार्रवाई अधिक व्यवस्थित और भरोसेमंद तरीके से की जा सकेगी।
सोशल मीडिया पर सरकारी योजनाओं या फैसलों को लेकर गलत दावे सामने आने पर आम लोगों में भ्रम पैदा हो सकता है। इसी वजह से नई व्यवस्था में निगरानी के साथ समयबद्ध प्रतिक्रिया को भी महत्वपूर्ण माना गया है। अधिकारियों का कहना है कि मंत्रालयों को जनता के साथ रचनात्मक संवाद बनाए रखना होगा। किसी भ्रामक दावे का जवाब केवल खंडन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सही तथ्य और जरूरी संदर्भ भी सामने रखने की कोशिश होगी। इससे सरकारी जानकारी और जनता के बीच डिजिटल संवाद मजबूत हो सकेगा।
सरकार की यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट बहुत कम समय में बड़े स्तर पर फैल सकती है। हालांकि किसी सामग्री को फर्जी या भ्रामक मानने से पहले उसकी तथ्यात्मक जांच जरूरी होगी। QRT इसी प्रक्रिया में प्रारंभिक भूमिका निभाएगी और गंभीर मामलों को वरिष्ठ स्तर तक भेजा जा सकेगा। पूरी व्यवस्था का लक्ष्य यही है कि फर्जी खबरों पर कार्रवाई समय रहते हो और जनता तक आधिकारिक तथा सत्यापित जानकारी पहुंचे। इसके लिए मंत्रालयों के बीच समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया को अहम माना गया है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। सोशल मीडिया पर किसी सामग्री को फर्जी या भ्रामक मानने से पहले संबंधित तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों से उसकी पुष्टि करना आवश्यक है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।