राजस्थान

लहरिया तीज उत्सव में परंपरा और उल्लास का संगम, सिंजारे से सजा समारोह

माहेश्वरी महिला मंडल के लहरिया तीज उत्सव में राजस्थानी परंपरा की छटा दिखाई दी। करीब 50 महिलाओं ने गीत, खेल और सिंजारे के साथ मनाया तीज पर्व।

By अजय त्यागी 1 min read
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लहरिया तीज उत्सव

भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। सावन की उमंग और राजस्थानी परंपराओं से सजे माहौल में बसंत विहार गांधीनगर माहेश्वरी महिला मंडल का लहरिया तीज उत्सव उल्लास के रंग में नजर आया। भगवान उमा महेश की वंदना से शुरू हुए आयोजन में महिलाओं ने तीज की लोक संस्कृति को गीतों, खेलों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए जीवंत किया। रंग बिरंगे लहरिया परिधानों में सजी करीब 50 महिलाओं ने उत्साह से भाग लिया। धार्मिक वंदना, मनोरंजक गतिविधियों और पारंपरिक सिंजारे ने आयोजन को खास बना दिया और महिलाओं ने मिलकर पर्व की खुशियां साझा कीं।

परंपरा के रंग

मंडल अध्यक्ष शोभा राठी और सचिव सुनीता लढा ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन तथा भगवान उमा महेश की संगीतमय वंदना से हुई। इसके बाद साधारण सभा आयोजित की गई, जिसमें कोषाध्यक्ष आरती लढा ने मंडल का आय व्यय और लागत विवरण प्रस्तुत किया। समारोह की मुख्य अतिथि निवर्तमान राष्ट्रीय संयुक्त मंत्री शिखा भदादा रहीं। मंडल की महिलाओं ने पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा पहनाकर उनका आत्मीय स्वागत किया। इसके बाद मनोरंजक खेलों, समूह गतिविधियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का दौर चला, जिससे पूरे आयोजन में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।

लहरिया तीज उत्सव के दौरान सिंजारे की पारंपरिक रस्म ने महिलाओं के बीच अपनापन और सौहार्द बढ़ाया। महिलाओं ने एक दूसरे को तीज की शुभकामनाएं दीं और पर्व की खुशियां साझा कीं। रंग बिरंगे लहरिया परिधानों ने आयोजन की खूबसूरती बढ़ाई, वहीं तीज गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने राजस्थानी लोक रंग को और जीवंत कर दिया। धार्मिक आस्था और मनोरंजन के इस मेल में महिलाओं ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। आयोजन में निभाई गई परंपराओं ने सावन के पर्व को सामाजिक मेलजोल और सांस्कृतिक जुड़ाव से जोड़ने का काम किया।

सिंजारे ने बढ़ाई रौनक

समारोह में राजस्थानी दाल बाटी चूरमा सहित पारंपरिक व्यंजनों का सामूहिक स्वाद भी लिया गया। इससे आयोजन की सांस्कृतिक गरिमा और बढ़ गई। महिलाओं ने मिलकर पारंपरिक खानपान का आनंद लिया और एक दूसरे के साथ खुशियां बांटीं। कार्यक्रम की मुख्य प्रभारी जया राठी, अमिता लड्ढा और सुनीता ढाकेड़ा का आयोजन को सफल बनाने में विशेष योगदान रहा। आयोजन में संरक्षिका लीला राठी, शशि अजमेरा, पायल काबरा, नेहा मून्द्रडा, श्वेता भूतड़ा, लीला काबरा, नम्रता काकानी और सरिता अजमेरा सहित कई महिलाएं शामिल रहीं और कार्यक्रम में उत्साह बढ़ाया।

अर्चना बिहानी, दीपशिखा समदानी, नीलू गगरानी और मंजू न्याति सहित मंडल की अन्य सदस्याओं ने भी आयोजन में सक्रिय भागीदारी निभाई। करीब 50 महिलाओं की मौजूदगी में हुए लहरिया तीज उत्सव ने धार्मिक आस्था, राजस्थानी लोक परंपरा और महिला सहभागिता का सुंदर मेल पेश किया। तीज गीतों, खेलों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, सिंजारे और पारंपरिक व्यंजनों के बीच महिलाओं ने पर्व का आनंद लिया। आयोजकों के अनुसार ऐसे आयोजन समाज में आपसी जुड़ाव बढ़ाने के साथ नई पीढ़ी तक पारंपरिक संस्कृति और त्योहारों की खुशियां पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट उपलब्ध कराए गए तथ्यों और आयोजन से संबंधित स्रोत सामग्री पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। कार्यक्रम में शामिल व्यक्तियों और आयोजन से संबंधित विवरण उपलब्ध कराई गई सूचना के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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