टैक्स नियमों में बदलाव से विदेशी निवेश, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण और डेटा सेंटर कारोबार को राहत मिलेगी, MDR नियमों का रास्ता भी साफ हुआ है।
प्रतीकात्मक फोटो
नई दिल्ली, दिल्ली। टैक्स नियमों में बदलाव को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी मिल गई है। राष्ट्रपति ने Taxation and Other Laws Amendment Act 2026 और Payment and Settlement Systems Act 2007 में संशोधन वाले कानून को 17 अगस्त को मंजूरी दी। दोनों विधेयक संसद में 10 अगस्त को पारित हुए थे। नए प्रावधानों का मकसद विदेशी पूंजी आकर्षित करना, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण बढ़ाना और विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए भारतीय डेटा सेंटर इस्तेमाल करना आसान बनाना है। सरकार इसे निवेश और कारोबार के लिए ज्यादा स्पष्ट व्यवस्था मानती है। [1]
टैक्स नियमों में बदलाव सम्बंधित नए कानून से विदेशी निवेशकों और फंड मैनेजरों के लिए भारत में कामकाज बढ़ाने का रास्ता आसान होगा। 5 जून के अध्यादेश की जगह लेने वाले इस कानून में सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की ब्याज आय और पूंजीगत लाभ को लेकर आयकर छूट का प्रावधान शामिल है। इसके साथ फंड मैनेजरों के लिए भारत में कामकाज स्थानांतरित करना आसान किया गया है। वैश्विक आय पर भारत में कर लगने से बचने वाली कई शर्तों को भी आसान किया गया है। इससे विदेशी पूंजी को भारत की ओर आकर्षित करने की कोशिश मजबूत होगी।
सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को लेकर भी लंबी अवधि की राहत दी है। भारत में कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर के जरिए इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने वाली विदेशी कंपनियों को मिलने वाली आयकर छूट 2040 41 तक जारी रहेगी। इसमें मोबाइल फोन, लैपटॉप, पर्सनल कंप्यूटर, टैबलेट और सर्वर जैसे उत्पाद शामिल हैं। इनके प्रमुख हिस्सों और सहायक उपकरणों को भी दायरे में रखा गया है। कंपोनेंट की आपूर्ति मजबूत करने के लिए कस्टम्स वेयरहाउस में सामान रखने वाली कुछ विदेशी कंपनियों को 15 साल की आयकर छूट देने का प्रावधान भी किया गया है।
डिजिटल भुगतान के मोर्चे पर भी कानून में अहम बदलाव किया गया है। सरकार अब अधिसूचना के जरिए तय कर सकेगी कि कौन से इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यम या लेनदेन MDR से मुक्त रहेंगे। अभी UPI और RuPay डेबिट कार्ड से भुगतान पर उपयोगकर्ताओं से शुल्क नहीं लिया जा सकता। नए प्रावधानों से कुछ कारोबारी लेनदेन के लिए MDR व्यवस्था बदलने का कानूनी रास्ता खुला है। हालांकि सरकार ने कहा है कि आम उपभोक्ताओं के लिए UPI भुगतान मुफ्त रहेगा। किसी भी संभावित MDR का असर सीमित कारोबारी श्रेणियों पर पड़ने की बात कही गई है। यहां MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट का मतलब उस शुल्क से है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले दुकानदार या कारोबारी से भुगतान की प्रक्रिया के लिए लिया जाता है। आम UPI ग्राहक से यह शुल्क नहीं लिया जाएगा।
टैक्स नियमों में बदलाव का कुल असर विदेशी पूंजी, घरेलू निर्माण और डिजिटल कारोबार के लिए लंबे समय की नीति स्पष्टता के रूप में देखा जा रहा है। विदेशी कंपनियों के लिए भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और कंपोनेंट आपूर्ति से जुड़ी कर राहत जारी रहने से निवेश को प्रोत्साहन मिल सकता है। विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए भारतीय डेटा सेंटर इस्तेमाल करने की प्रक्रिया भी आसान होगी। वहीं UPI से जुड़े बदलाव का वास्तविक असर आगे तय होने वाली सरकारी अधिसूचनाओं पर निर्भर करेगा और आम उपयोगकर्ताओं पर तत्काल शुल्क की घोषणा नहीं हुई है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। कर छूट और MDR से जुड़े प्रावधानों का वास्तविक प्रभाव संबंधित सरकारी अधिसूचनाओं और लागू नियमों के अनुसार तय होगा। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।