प्रादेशिक

75 दिन बाद मां को मिला बच्चा, भावुक कर देगा पूरा मामला

मां को मिला बच्चा, 75 दिन की जुदाई के बाद कोर्ट के आदेश से हुई मां और नवजात की मुलाकात। 20 वर्षीय आदिवासी मां ने हार नहीं मानी।

By अजय त्यागी 1 min read
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नंबिकोल्ली न्जांगनकोल्ली बस्ती की रहने वाली मिनी

वायनाड, केरल। 20 वर्षीय आदिवासी महिला मिनी आखिरकार अपने नवजात बच्चे को वापस पाकर भावुक हो गई। नंबिकोल्ली न्जांगनकोल्ली बस्ती की रहने वाली मिनी करीब 75 दिन तक अपने बच्चे से अलग रही। बच्चे के जन्म के बाद गंभीर स्वास्थ्य परेशानियों के चलते वह कुछ समय तक उसकी देखभाल करने की स्थिति में नहीं थी। परिवार में कोई दूसरा सहारा नहीं होने के कारण उसकी बुजुर्ग दादी के अनुरोध पर तमिलनाडु बाल संरक्षण समिति ने बच्चे को अस्थायी संरक्षण में ले लिया था। [1]

इंतजार खत्म

मिनी की जिंदगी में मुश्किलें बच्चे के जन्म से पहले ही शुरू हो गई थीं। उसने कम उम्र में अपने माता पिता को खो दिया था और बाद में तमिलनाडु के पट्टावायल निवासी कृष्णन से शादी की। गर्भावस्था के दौरान कृष्णन की अचानक मौत हो गई। इसके बाद मिनी अपनी बुजुर्ग दादी पर निर्भर हो गई। बच्चे के जन्म के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने से वह नवजात की देखभाल नहीं कर सकी। ठीक होने के बाद जब उसने बच्चे को वापस पाने की कोशिश की तो उसे कई प्रशासनिक और कानूनी अड़चनों का सामना करना पड़ा।

मिनी ने हालात के आगे झुकने के बजाय अपने दिवंगत पति की बस्ती में लौटकर स्थानीय लोगों और पुलिस से मदद मांगी। उनकी सहायता से वह ऊटी की अदालत पहुंची और अपनी पूरी स्थिति न्यायपालिका के सामने रखी। अदालत ने बच्चे के हित और मां की उसकी देखभाल करने की क्षमता को ध्यान में रखते हुए बच्चे को मिनी को सौंपने का आदेश दिया। इसके बाद बाल संरक्षण समिति ने भी जरूरी प्रक्रिया पूरी कराई। स्थानीय पुलिस ने तमिलनाडु में बच्चे का पता लगाने और कानूनी प्रक्रिया समझने में मदद की जिसके चलते मेहनत रंग लाई और आखिर मां को मिला बच्चा।

कोर्ट का फैसला

मां को मिला बच्चा तो करीब ढाई महीने की दूरी आखिर खत्म हो गई। मिनी के बच्चे से अलग होने की वजह उसकी बीमारी और उस समय की मजबूरी थी, न कि बच्चे को छोड़ने की उसकी इच्छा। बाल संरक्षण समिति ने भी शुरुआत में बच्चे को अस्थायी संरक्षण में इसी वजह से रखा था। मिनी के स्वस्थ होने और बच्चे की देखभाल करने में सक्षम होने के बाद अदालत के आदेश ने दोनों को फिर साथ आने का रास्ता साफ किया। इस फैसले के बाद सीमा से लगे आदिवासी इलाके में भी खुशी का माहौल बन गया।

बच्चे को गोद में लेने के बाद मिनी ने राहत और खुशी के साथ सभी मददगार लोगों का शुक्रिया अदा किया। करीब 75 दिन तक अपने नवजात से दूर रहने के बाद हुआ यह मिलन उसके लिए बेहद भावुक पल था। स्थानीय लोगों ने भी उसकी वापसी और बच्चे के साथ पुनर्मिलन पर खुशी जताई। मां को मिला बच्चा की यह कहानी बताती है कि मुश्किल हालात में भी मदद, कानूनी हस्तक्षेप और सही समय पर सहयोग किसी परिवार को फिर से जोड़ सकता है। मिनी के लिए लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हुआ।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। बच्चे की देखभाल और संरक्षण से जुड़े कानूनी निर्णय संबंधित अदालत और बाल संरक्षण व्यवस्था के आदेशों के अनुसार होते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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