राजस्थान

अच्छे कर्म से सुख का रास्ता, विद्यार्थियों को समझाई जीवन की सही सीख

बीकानेर में स्वामी विवेकानंद परिव्राजक ने विद्यार्थियों को अच्छे कर्म से सुख, सही पढ़ाई, रुचि पहचानने और संस्कारों की अहमियत समझाई।

By अजय त्यागी 1 min read
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तीन दिवसीय संवाद कार्यक्रम

बीकानेर, राजस्थान। माता कौशल्या देवी की स्मृति में पर्यावरण पोषण यज्ञ समिति और आरएसवी ग्रुप ऑफ स्कूल्स की ओर से आयोजित तीन दिवसीय संवाद कार्यक्रम में विद्यार्थियों और अभिभावकों को जीवन में अच्छे कर्म से सुख शांति की राह समझाई गई। रोजड़ गुजरात से आए दर्शन योग महाविद्यालय के निदेशक योगाचार्य और दर्शनाचार्य स्वामी विवेकानंद परिव्राजक ने पढ़ाई, रुचि, संस्कार और कर्म के संबंध को सरल भाषा में सामने रखा। दर्शन योग महाविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट भी उन्हें संस्थान का निदेशक बताती है।

पढ़ाई की समझ

संवाद में विद्यार्थियों को बताया गया कि पढ़ाई सिर्फ परीक्षा पास करने या नौकरी हासिल करने का जरिया नहीं है। शिक्षा का असली मकसद व्यक्ति की सोच, व्यवहार और जीवन को बेहतर बनाना भी है। स्वामी जी ने विद्यार्थियों से अपनी रुचियों को पहचानने और उनके मुताबिक काम चुनने की बात कही। उनका कहना था कि जिस काम में व्यक्ति की रुचि होती है, उसे करने में प्रसन्नता बढ़ती है और मानसिक परेशानी कम हो सकती है। इसी सोच को जीवन के बेहतर संतुलन से जोड़ा गया।

कार्यक्रम में माता पिता और गुरु की भूमिका पर भी खास जोर दिया गया। समझाया गया कि बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ परिवार के संस्कार और चरित्र की शिक्षा देना जरूरी है। विद्यार्थियों को बताया गया कि जीवन में कई गलतियां अनजाने में होती हैं और कुछ गलतियां व्यक्ति जानबूझकर करता है। इसलिए अपनी आदतों और फैसलों पर समय समय पर विचार करना जरूरी है। स्वामी जी ने कहा कि सही मार्गदर्शन मिलने पर बच्चे अपनी क्षमता पहचानकर बेहतर दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

कर्म का असर

संवाद के दौरान कर्म को सुख और दुःख से जोड़ते हुए कहा गया कि अच्छे कर्म से सुख प्राप्त होते हैं। व्यक्ति पहले कर्म करता है और उसके बाद उसका फल मिलता है। मनुष्य को अच्छे काम करने के कई मौके मिलते हैं लेकिन स्वार्थ के कारण वह कई बार उनका सही इस्तेमाल नहीं करता। स्वामी जी ने विद्यार्थियों और अभिभावकों से अच्छे कामों के अवसर पहचानने तथा उनका सदुपयोग करने की अपील की। उनके मुताबिक बच्चों को सद्बुद्धि और सन्मार्ग की प्रेरणा मिले तो उनका जीवन सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ सकता है।

कार्यक्रम में यह भी समझाया गया कि मनुष्य दूसरे प्राणियों की तुलना में अधिक सुख सुविधाएं हासिल कर सकता है लेकिन केवल स्वार्थ के कारण वह पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो पाता। इसलिए जीवन में अपनी इच्छाओं के साथ जिम्मेदारियों को समझना भी जरूरी है। स्वामी विवेकानंद परिव्राजक वैदिक दर्शन और आध्यात्मिक शंका समाधान से जुड़े संवाद के लिए लंबे समय से कार्यक्रम करते रहे हैं। उपलब्ध ऑनलाइन सामग्री में उनके वैदिक शंका समाधान और दर्शन संबंधी व्याख्यान भी दर्ज हैं।

अच्छे कर्म से सुख

तीन दिवसीय कार्यक्रम में स्वामी विवेकानंद परिव्राजक विद्यार्थियों को पढ़ाई के उद्देश्य, अपनी रुचि पहचानने, संस्कारों की अहमियत और कर्म के परिणाम जैसे विषयों पर सरल तरीके से समझा रहे हैं। कार्यक्रम 21, 22 और 23 अगस्त को शाम 5:45 से 8:00 बजे तक रानी बाजार स्थित होटल पाणिग्रहण में आयोजित हो रहा है। होटल पाणिग्रहण के रानी बाजार स्थित होने की स्वतंत्र ऑनलाइन पुष्टि भी उपलब्ध है। संदेश का मूल जोर यही है कि सही सोच, शिक्षा, संस्कार और अच्छे कर्म से सुख की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। रिपोर्ट में प्रस्तुत आध्यात्मिक और दार्शनिक विचार कार्यक्रम में व्यक्त वक्ता के विचार हैं और इन्हें व्यक्तिगत, चिकित्सकीय या पेशेवर सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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