प्रादेशिक

NICU में लगी आग ने खोली सुरक्षा व्यवस्था की पोल, 3 नवजात झुलसे

छिंदवाड़ा जिला अस्पताल के NICU में लगी आग से 3 नवजात झुलसे। वार्मर में चिंगारी के बाद जबलपुर रेफर, फायर सेफ्टी व्यवस्था और अस्पताल की जवाबदेही पर जांच तेज।

By अजय त्यागी 1 min read
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बच्चों को बेहतर इलाज के लिए जबलपुर भेजा

छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश। रात करीब 2 बजे जिला अस्पताल के NICU में लगी आग से अचानक अफरा तफरी मच गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक एक बेबी वार्मर मशीन में तकनीकी खराबी के बाद फिलामेंट से चिंगारी निकली और आग भड़क गई। इसकी चपेट में आकर 3 नवजात झुलस गए। अस्पताल कर्मचारियों ने तत्काल बच्चों को बाहर निकाला और उन्हें बेहतर इलाज के लिए जबलपुर भेजा। जिला प्रशासन की वेबसाइट पर छिंदवाड़ा जिला अस्पताल को सरकारी जिला अस्पताल के रूप में दर्ज किया गया है। [1]

बच्चों का इलाज जारी

तीनों नवजातों को इलाज के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर ले जाया गया। वहां विशेषज्ञ डॉक्टर उनकी स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। शुरुआती जानकारी में बच्चों को अलग अलग स्तर की सतही जलने की चोटें होने की बात सामने आई है। NICU में लगी आग की घटना के दौरान अस्पताल स्टाफ ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बच्चों को सुरक्षित निकालने और उन्हें दूसरे अस्पताल तक पहुंचाने की व्यवस्था की। अब डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है और उनकी हालत से जुड़ी आगे की जानकारी चिकित्सा टीम के आकलन पर निर्भर करेगी।

प्रारंभिक जांच में आग की वजह बेबी वार्मर में तकनीकी खराबी और उससे निकली चिंगारी मानी जा रही है। हालांकि जांच पूरी होने से पहले इसे अंतिम कारण नहीं कहा जा सकता। स्वास्थ्य विभाग ने जिला स्तर के NICU में इस्तेमाल हो रही वार्मर मशीनों और विद्युत प्रणालियों की सुरक्षा जांच शुरू की है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि मशीन का रखरखाव कब हुआ था और घटना के समय सुरक्षा इंतजाम किस स्थिति में थे। इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही लापरवाही की जिम्मेदारी तय हो सकेगी।

सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

मामले का दूसरा बड़ा पहलू अस्पताल की फायर सेफ्टी व्यवस्था है। उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड में जिला अस्पताल छिंदवाड़ा के लिए 2021 में प्रोविजनल फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र जारी होने का उल्लेख मिलता है। एक सरकारी स्वास्थ्य समीक्षा में यह भी दर्ज किया गया था कि जिला अस्पताल में फायर सेफ्टी लाइसेंस उपलब्ध नहीं था। इन पुराने रिकॉर्ड के आधार पर मौजूदा स्थिति को सीधे गैरकानूनी कहना सही नहीं होगा। अब जांच का अहम हिस्सा यही है कि घटना के समय अस्पताल के पास वैध और प्रभावी अग्नि सुरक्षा व्यवस्था मौजूद थी या नहीं।

प्रारंभिक निरीक्षण में अस्पताल की फायर फाइटिंग व्यवस्था के कुछ हिस्सों के काम नहीं करने की बात भी सामने आई है। अगर यह तथ्य जांच में सही साबित होता है तो सवाल केवल मशीन की खराबी तक सीमित नहीं रहेगा। यह भी देखा जाएगा कि नियमित सुरक्षा निरीक्षण किस स्तर पर हुआ और पहले मिली चेतावनियों पर क्या कार्रवाई की गई। फिलहाल 3 नवजातों का जबलपुर में इलाज चल रहा है। NICU में लगी आग के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सुरक्षा में चूक हुई तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। घटना की तकनीकी वजह, फायर सेफ्टी व्यवस्था की मौजूदा स्थिति और किसी व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी से जुड़े निष्कर्ष संबंधित जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम माने जाएंगे। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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