होर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र बताने का ट्रंप का दावा और ईरान को परमाणु हथियार से दूर रखने की चेतावनी ने पश्चिम एशिया में तनाव के बीच नई बहस छेड़ दी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप - File Photo
वॉशिंगटन, अमेरिका। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमला बोलते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र बताया और कहा कि ईरान को कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। ट्रंप ने दक्षिण कैरोलिना की एक चुनावी रैली में यह बात कही। होर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र बताने का यह बयान ऐसे समय आया है जब इस रणनीतिक जलमार्ग को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पहले से काफी बढ़ा हुआ है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक दोनों पक्ष इस जलमार्ग की स्थिति को लेकर एक दूसरे से बिल्कुल अलग दावे कर रहे हैं। [1]
ट्रंप ने रैली में कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई ने ईरान की परमाणु क्षमता से जुड़े खतरे को खत्म कर दिया है और ईरान अब परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा। ट्रंप ने ईरानी सैन्य नेतृत्व और बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचने का दावा किया। हालांकि उनके इन दावों के अलग अलग हिस्सों की स्वतंत्र पुष्टि हर मामले में उपलब्ध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि संघर्ष के कारण उनका घरेलू आर्थिक एजेंडा प्रभावित हुआ है।
ट्रंप ने बातचीत की संभावनाओं पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि ईरान के नेतृत्व को हुए नुकसान के बाद यह समझना मुश्किल है कि बातचीत आखिर किससे की जाए। उन्होंने रैली में हल्के अंदाज में यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो ईरान पर फिर बमबारी क्यों न की जाए। उनके बयान से साफ है कि अमेरिका की मौजूदा नीति में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना अभी भी प्रमुख मुद्दों में शामिल है। व्हाइट हाउस भी पहले कह चुका है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना समझौते का अहम हिस्सा है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस का समुद्री परिवहन होता है। इसी वजह से इस जलमार्ग में तनाव बढ़ने का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहता बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने कहा है कि स्ट्रेट तब तक बंद रहेगा जब तक अमेरिका जून में हुए अंतरिम समझौते से जुड़ी उसकी शर्तें पूरी नहीं करता।
ट्रंप का रुख इसके उलट है। उन्होंने पहले कहा था कि स्ट्रेट खुला और सुरक्षित है जबकि ईरानी पक्ष इसे बंद रखने की बात कह रहा है। हाल के दिनों में ट्रंप ने इसे अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने के विचार का भी समर्थन किया था। हालांकि इस दावे का कोई कानूनी या क्षेत्रीय आधार उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया। होर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र बताने वाला बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि जलमार्ग की स्थिति पर पहले से ही अमेरिका और ईरान के दावे आमने सामने हैं।
ट्रंप ने रैली में ईरान संघर्ष को तेल और पेट्रोल की कीमतों से भी जोड़ा। उन्होंने दावा किया कि ईरान के साथ टकराव खत्म होते ही तेल की कीमतें हाल की तुलना में काफी नीचे जा सकती हैं। उनका यह बयान ऐसे वक्त आया है जब होर्मुज में तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है। ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत को लेकर भी तस्वीर साफ नहीं है। ट्रंप ने हाल में कहा था कि फिलहाल ईरान के साथ कोई बातचीत नहीं हो रही है और न ही ऐसी बातचीत तय है।
रैली का मुख्य मकसद रिपब्लिकन सीनेट उम्मीदवार डार्लिन ग्राहम के लिए समर्थन जुटाना था। ट्रंप ने समर्थकों से चुनाव को ऐसे लेने को कहा जैसे खुद उनका नाम मतपत्र पर हो। लेकिन ईरान और होर्मुज पर उनकी टिप्पणियां रैली के राजनीतिक संदेश से आगे निकल गईं। होर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र बताने के बयान ने खास तौर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है क्योंकि इस जलमार्ग का महत्व वैश्विक तेल आपूर्ति से सीधे जुड़ा है और इसके भविष्य को लेकर अमेरिका तथा ईरान के बीच मतभेद अभी खत्म नहीं हुए हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। ट्रंप के बयानों और अमेरिका ईरान संघर्ष से जुड़े सैन्य तथा कूटनीतिक दावों में कुछ बातें संबंधित पक्षों के दावों पर आधारित हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि अलग अलग स्तर पर उपलब्ध हो सकती है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।