रिटायर पुलिस डॉग्स अब गोद नहीं दिए जाएंगे। वे पुलिस फोर्स के साथ रहेंगे और सरकार उनके खाने, इलाज और देखभाल की जिम्मेदारी उठाएगी।
रिटायर पुलिस डॉग्स
मुंबई, महाराष्ट्र। रिटायर पुलिस डॉग्स को अब सेवा खत्म होने के बाद किसी दूसरे घर में भेजने की जरूरत नहीं होगी। PTI की एक रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार ने तय किया है कि 10 साल की सेवा पूरी करने के बाद भी इन कुत्तों को पुलिस फोर्स के साथ रखा जाएगा। सरकार उनके भोजन, मेडिकल देखभाल और रोजमर्रा के रखरखाव की जिम्मेदारी उठाएगी। सरकारी रिपोर्ट में बताया गया कि कुछ कुत्ते अपने हैंडलर्स से अलग होने के बाद खाना तक छोड़ देते थे। इसी परेशानी को देखते हुए यह बदलाव किया गया है। [1]
रिटायर पुलिस डॉग्स ने अपनी सक्रिय सेवा के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ लंबे समय तक काम किया है। इस दौरान उनका अपने हैंडलर्स के साथ मजबूत भावनात्मक जुड़ाव बन जाता है। गृह विभाग की रिपोर्ट में सामने आया कि सेवा पूरी होने के बाद जब कुछ कुत्तों को उनके हैंडलर्स से अलग करके दूसरे घरों में भेजा गया तो उन्हें काफी परेशानी हुई। कुछ मामलों में उन्होंने खाना भी छोड़ दिया। सरकार अब ऐसे कुत्तों को परिचित लोगों और माहौल से दूर नहीं करना चाहती।
नए प्रस्ताव के तहत रिटायर पुलिस डॉग्स को पुलिस फोर्स के साथ ही रहने दिया जाएगा। इसका मतलब यह है कि सक्रिय ड्यूटी खत्म होने के बाद भी उनकी देखभाल की जिम्मेदारी पुलिस विभाग की रहेगी। उनके खाने और इलाज का खर्च सरकार उठाएगी। लंबे समय तक साथ रहने वाले हैंडलर्स भी उनके संपर्क में रह सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे कुत्तों को रिटायरमेंट के बाद अचानक नए माहौल में जाने की परेशानी से बचाया जा सकेगा और उनके जीवन के अंतिम वर्षों में बेहतर देखभाल सुनिश्चित होगी।
रिटायर पुलिस डॉग्स की देखभाल को लेकर सरकार ने अब जिम्मेदारी स्पष्ट करने का फैसला किया है। सक्रिय सेवा से हटने के बाद भी इन कुत्तों के भोजन, चिकित्सा और रखरखाव की जरूरतों को पुलिस विभाग पूरा करेगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश के बाद यह प्रस्ताव सामने आया है। सरकार की कोशिश है कि जिन कुत्तों ने करीब 10 साल तक पुलिस बल के लिए काम किया है, उन्हें सेवा समाप्त होने के बाद भी सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिल सके।
इस व्यवस्था से पुलिस डॉग्स के हैंडलर्स को भी राहत मिलने की उम्मीद है। वर्षों तक साथ काम करने के बाद हैंडलर और कुत्ते के बीच सिर्फ ड्यूटी का रिश्ता नहीं रहता बल्कि गहरा लगाव भी बन जाता है। रिटायर पुलिस डॉग्स को किसी दूसरे घर में भेजे जाने पर यह जुड़ाव अचानक खत्म हो जाता था। नई व्यवस्था में उन्हें उसी फोर्स के साथ रहने का अवसर मिलेगा जहां उन्होंने अपना सक्रिय जीवन बिताया है। इससे उनकी भावनात्मक और शारीरिक जरूरतों का ध्यान रखना आसान हो सकता है।
पहले सेवा पूरी करने वाले पुलिस कुत्तों को गोद देने की व्यवस्था थी। इसका मकसद रिटायरमेंट के बाद उनकी देखभाल के लिए सुरक्षित घर उपलब्ध कराना था। लेकिन गृह विभाग की रिपोर्ट में सामने आई परेशानियों ने इस व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। रिटायर पुलिस डॉग्स में कुछ ने हैंडलर्स से अलग होने के बाद खाना छोड़ दिया था। अब सरकार ऐसे मामलों से बचने के लिए उन्हें पुलिस फोर्स के साथ ही रखने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इससे उनके लिए परिचित माहौल बनाए रखना संभव होगा।
रिटायर पुलिस डॉग्स ने पुलिस बल की कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में योगदान दिया है। प्रशिक्षित कुत्तों का इस्तेमाल अलग अलग पुलिस अभियानों में किया जाता है और उनकी ट्रेनिंग के दौरान हैंडलर्स के साथ मजबूत तालमेल बनाया जाता है। करीब 10 साल की सेवा के बाद सक्रिय ड्यूटी भले खत्म हो जाए, लेकिन महाराष्ट्र सरकार अब उनकी जिम्मेदारी खत्म नहीं करना चाहती। नई व्यवस्था के तहत उन्हें जीवनभर भोजन, इलाज और देखभाल मिलती रहेगी। इससे सेवा देने वाले इन कुत्तों को रिटायरमेंट के बाद भी सुरक्षित जीवन मिल सकेगा।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। रिटायर पुलिस डॉग्स की देखभाल से जुड़ी प्रस्तावित व्यवस्था के क्रियान्वयन में सरकारी दिशा निर्देश और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के अनुसार बदलाव संभव हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।