बीकानेर में नवग्रह शांति अनुष्ठान के दौरान जैन साधना, मंत्र जाप और आत्मशक्ति जागरण के जरिए जीवन में सकारात्मकता और मानसिक संतुलन का संदेश दिया गया।
नवग्रह शांति अनुष्ठान आयोजित
बीकानेर, राजस्थान। रामपुरिया हवेली मार्ग स्थित बीकानेर तुलसी साधना केन्द्र में युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी की आज्ञानुवर्ती शासनश्री साध्वी मंजुप्रभाजी के सान्निध्य में नवग्रह शांति अनुष्ठान आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत साध्वी मंजुप्रभाजी ने नमस्कार महामंत्र के साथ की। साध्वी जयंतप्रभाजी ने अनुष्ठान से पहले पंचपरमेष्ठी वंदना कर अध्यात्म के रक्षा कवच का प्रयोग करवाया। इस दौरान साध्वी मंजुप्रभाजी ने कहा कि जैन साधना पद्धति में आत्मा की उपासना और आत्मशक्ति जागरण के अनेक आयाम हैं।
साध्वी मंजुप्रभाजी ने कहा कि व्यक्ति के जीवन में ग्रह और महाग्रह की दशा या महादशा जैसी मान्यताओं के कारण आने वाली परेशानियों का सामना अध्यात्म और मंत्र शक्ति के जरिए किया जा सकता है। उन्होंने 24 तीर्थंकर अनुष्ठान को आत्मशक्ति जागरण का महत्वपूर्ण प्रयोग बताते हुए कहा कि इसकी साधना के जरिए व्यक्ति अपने जीवन में शांति और आनंद की दिशा में आगे बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि जैन परंपरा में मंत्र, ध्यान और साधना को आत्मबल बढ़ाने के साधन के रूप में देखा जाता है। साधना का उद्देश्य व्यक्ति को भीतर से मजबूत और सकारात्मक बनाना है।
साध्वी गुरुयशाजी ने ज्योतिष शास्त्र के संदर्भ में नवग्रहों की मान्यता पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शास्त्रों में 12 राशियों और 9 ग्रहों का उल्लेख मिलता है। इनमें 7 मुख्य ग्रह और 2 छाया ग्रह माने जाते हैं। उनके अनुसार ग्रहों को अलग अलग स्थानों में अलग प्रभाव देने वाला माना गया है। साध्वी गुरुयशाजी ने कहा कि बाहरी समस्याओं के समाधान के लिए ज्योतिष के पीछे भागने के बजाय धर्मगुरुओं और धर्माचार्यों द्वारा बताए गए मंत्रों की साधना, ध्यान और जाप पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। सामूहिक अनुष्ठान में साधना की ऊर्जा कई गुना बढ़ने की बात भी उन्होंने कही।
नवग्रह शांति अनुष्ठान में साध्वी गुरुयशाजी और साध्वी जयंतप्रभाजी ने मंत्रों का उच्चारण कर पूरे वातावरण को आध्यात्मिक और मंगलमय बनाया। इस दौरान तीर्थंकर स्तुति जाप और पंचपरमेष्ठी जाप को ऊर्जा का अक्षय स्रोत बताते हुए नियमित आराधना और साधना के महत्व पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि ऐसी साधना व्यक्ति में आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को मजबूत करने में सहायक हो सकती है। कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि आध्यात्मिक अभ्यास जीवन में खुशहाली, रिश्तों में मधुरता और आपसी समरसता की भावना को बढ़ाने की दिशा में प्रेरित करता है।
नवग्रह शांति अनुष्ठान के दौरान तेरापंथी सभा, तेरापंथ महिला मंडल और तेरापंथ युवक परिषद् के पदाधिकारियों के साथ श्रावक समाज की भी मौजूदगी रही। सामूहिक मंत्र जाप और आध्यात्मिक प्रयोगों में उपस्थित श्रद्धालुओं ने सहभागिता निभाई। आयोजकों के अनुसार ऐसे अनुष्ठानों का उद्देश्य समाज को आध्यात्मिक साधना से जोड़ना और व्यक्ति को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करना है। कार्यक्रम के दौरान साध्वीवृंद ने धार्मिक साधना और आत्मशक्ति जागरण के महत्व को सरल तरीके से समझाया।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट उपलब्ध कराए गए आयोजकीय तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। ग्रहों, मंत्रों और आध्यात्मिक साधना से जुड़े प्रभाव धार्मिक मान्यताओं और वक्ताओं के विचारों के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं, इन्हें वैज्ञानिक चिकित्सकीय या ज्योतिषीय प्रमाण के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।