प्रादेशिक

त्याग की राखी से जुड़ा आत्मरक्षा का संदेश, रक्षाबंधन हुआ खास

चेंबूर में जैन संस्कार विधि से रक्षाबंधन कार्यशाला हुई। 150 से अधिक भाई बहनों ने त्याग की राखी बांधकर आत्मरक्षा और संयम का आध्यात्मिक संकल्प लिया।

By अजय त्यागी 1 min read
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जैन संस्कार विधि से रक्षाबंधन

चेंबूर, महाराष्ट्र। युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या साध्वीश्री निर्वाणश्रीजी ठाणा 6 के पावन सान्निध्य में तेरापंथ युवक परिषद चेंबूर की ओर से रक्षाबंधन कार्यशाला का आयोजन किया गया। तेरापंथ भवन में हुए इस कार्यक्रम का उद्देश्य रक्षाबंधन को जैन संस्कार विधि और आध्यात्मिक चिंतन से जोड़ना था। कार्यक्रम की शुरुआत नमस्कार महामंत्र के सामूहिक उच्चारण और मंगल भावना यंत्र की स्थापना से हुई। जैन संस्कारक मालचंदजी भंसाली ने विधि विधान से राखी बांधने का प्रशिक्षण दिया और उपस्थित लोगों को पूरी प्रक्रिया समझाई।

जैन विधि का पाठ

साध्वीश्री निर्वाणश्रीजी ने कहा कि रक्षाबंधन भले ही लौकिक पर्व है, लेकिन आत्मरक्षा का विचार पूरी तरह आध्यात्मिक है। उन्होंने कहा कि आत्मा की रक्षा, पुष्टि और तुष्टि के लिए राखी को नए दृष्टिकोण से समझने की जरूरत है। ज्ञान का प्रकाश बढ़ाने, अज्ञान को दूर करने और राग द्वेष घटाने से आत्मा अपने वास्तविक स्वरूप की ओर बढ़ती है। साध्वीश्री ने उपस्थित भाई बहनों को सर्वेन्द्रिय संयम का विशेष प्रयोग भी करवाया। कार्यक्रम में आत्मरक्षा और जीवन में संयम के महत्व पर विस्तार से समझाया गया।

प्रबुद्ध साध्वी डॉ. योगक्षेमप्रभाजी ने आत्मरक्षा के विभिन्न आध्यात्मिक उपायों की जानकारी दी और आत्मरक्षा तथा गृह रक्षा से जुड़े विशेष मंत्र जाप के प्रयोग करवाए। इसके बाद साध्वीश्री योगक्षेमप्रभाजी, साध्वीश्री लावण्यप्रभाजी, साध्वीश्री कुंदनयशाजी, साध्वीश्री मुदितप्रभाजी और साध्वीश्री मधुरप्रभाजी ने रक्षाबंधन पर भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किया। साध्वीवृंद ने अपने हाथों से तैयार की गई 9 प्रकार की राखियां भाई बहनों को भेंट कीं। इन राखियों को पाकर श्रद्धालु भावुक हुए और देर तक उत्साह के साथ त्याग की राखी बांधने का क्रम चलता रहा।

आत्मरक्षा का भाव

कार्यक्रम की सबसे खास बात रही कि साध्वीश्रीजी की प्रेरणा से श्रद्धालुओं ने सामान्य राखी के साथ त्याग का संकल्प भी जोड़ा। लगभग 150 से अधिक भाई बहनों ने त्याग की राखी बांधते हुए आध्यात्मिक भेंट अर्पित की। बहनों ने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा और भाइयों ने बहनों का मुंह मीठा करवाया। इस दौरान सभी ने जैन संस्कार विधि से रक्षाबंधन मनाने का संकल्प लिया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि पर्व केवल परंपरा निभाने तक सीमित न रहकर आत्मसंयम, त्याग और आध्यात्मिक जागरूकता का अवसर भी बन सकता है।

तेरापंथ युवक परिषद चेंबूर के अध्यक्ष हिमांशु गन्ना और मंत्री कपिल मेहता ने आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई। मंत्री ने चेंबूर में जैन संस्कार विधि के बढ़ते प्रयोगों की जानकारी देते हुए उपस्थित लोगों का स्वागत किया और जैन संस्कारक के प्रति आभार जताया। कार्यक्रम में उपाध्यक्ष अरुण धाकड़, सहमंत्री मुकेश डूंगरवाल, निलेश राठौड़, ज्ञानशाला प्रशिक्षिका तारा आच्छा, महिला मंडल, तेरापंथ सभा ट्रस्ट, तेरापंथ सभा और चेंबूर श्रावक समाज के लोग मौजूद रहे। मंगलपाठ के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ और त्याग की राखी ने आयोजन को यादगार बना दिया।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजनों से जुड़े विचार संबंधित साध्वीश्री और आयोजकों के वक्तव्यों के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं, इन्हें किसी अन्य धार्मिक मत के विरुद्ध या अंतिम धार्मिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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