प्रादेशिक

पर्युषण में सोच बदलेगी, जीवन बदलेगा, युवाओं ने दिखाया अनोखा अंदाज

सोच बदलेगी, जीवन बदलेगा, पर्युषण पर्व पर मुंबई में किशोर मंडल ने कव्वाली और संवाद के जरिए आत्मचिंतन, सकारात्मक सोच और जीवन बदलाव का संदेश दिया।

By अजय त्यागी 1 min read
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सोच बदलेगी, जीवन बदलेगा विषय पर प्रेरणादायी कार्यक्रम

मुंबई, महाराष्ट्र। तेरापंथ युवक परिषद दक्षिण मुंबई के निर्देशन में तेरापंथ किशोर मंडल दक्षिण मुंबई ने महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल, कालबादेवी में सोच बदलेगी, जीवन बदलेगा विषय पर प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया। आचार्यश्री महाश्रमणजी की प्रबुद्ध सुशिष्या शासन श्री साध्वीश्री कंचनप्रभाजी, शासन श्री साध्वीश्री मंजुरेखाजी और सहवर्ती साध्वीवृंद के पावन सान्निध्य में हुए आयोजन का उद्देश्य पर्युषण पर्व को केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित न रखकर आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक विकास का अवसर बनाने का संदेश देना रहा। कार्यक्रम में युवाओं ने अपनी रचनात्मक प्रस्तुति से इस विचार को सहज रूप में सामने रखा।

पर्युषण का असली अर्थ

कार्यक्रम में समझाया गया कि पर्युषण केवल कुछ दिनों तक चलने वाली धार्मिक गतिविधियों का नाम नहीं है। इसका वास्तविक उद्देश्य व्यक्ति को अपने विचारों, व्यवहार और जीवनशैली पर विचार करने की प्रेरणा देना है। आयोजकों ने बताया कि पर्व की शिक्षाओं को रोजमर्रा के जीवन में उतारने से निर्णय लेने की क्षमता बेहतर हो सकती है और सकारात्मक संस्कार मजबूत हो सकते हैं। सोच बदलेगी, जीवन बदलेगा का संदेश इसी विचार को सरल तरीके से सामने लाता है कि स्थायी बदलाव बाहर से नहीं, बल्कि व्यक्ति के भीतर से शुरू होता है।

कार्यक्रम की खास प्रस्तुति में पर्युषण के दौरान क्या करें और क्या न करें जैसे सवालों को मनोरंजक कव्वाली के रूप में पेश किया गया। संवाद और प्रश्नोत्तर के साथ तैयार की गई इस प्रस्तुति ने धार्मिक शिक्षाओं को युवाओं के लिए सहज और दिलचस्प बना दिया। किशोर मंडल के सदस्यों ने विषय को अपनी उम्र और समझ के अनुरूप रचनात्मक अंदाज में प्रस्तुत किया। इससे उपस्थित लोगों को मनोरंजन के साथ आत्ममंथन का अवसर भी मिला और पर्युषण की जीवनोपयोगी सीख को समझने का एक अलग तरीका सामने आया।

शुरुआत खुद से

कार्यक्रम में इस बात पर जोर रहा कि पर्युषण के दौरान किए जाने वाले धार्मिक कार्य तभी सार्थक होंगे, जब उनके प्रभाव को जीवन के व्यवहार में भी दिखाई देने दिया जाए। अच्छे संस्कार, सकारात्मक सोच, संयम और बेहतर निर्णय रोजमर्रा की आदतों का हिस्सा बनें, यही पर्व की सार्थकता है। युवाओं की प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि केवल कुछ दिनों तक नियमों का पालन करने के बजाय अपनी सोच और व्यवहार में स्थायी सुधार की दिशा में आगे बढ़ना जरूरी है। इसी सोच से आत्मचिंतन को जीवन का हिस्सा बनाया जा सकता है।

तेरापंथ किशोर मंडल के सदस्यों ने पूरे कार्यक्रम को सहज, मनोरंजक और युवाओं के अनुकूल शैली में प्रस्तुत किया। आयोजन का केंद्रीय संदेश रहा कि पर्युषण को केवल परंपरा निभाने तक सीमित रखने के बजाय इसे आत्मपरिवर्तन का अवसर बनाया जाना चाहिए। सोच बदलेगी, जीवन बदलेगा की भावना इसी बदलाव की ओर संकेत करती है। कार्यक्रम की जानकारी तेयुप उपाध्यक्ष दर्शन डागलिया ने दी। आयोजन ने धार्मिक शिक्षा को रचनात्मक प्रस्तुति के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंचाने और उसे दैनिक जीवन से जोड़ने की कोशिश को सामने रखा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। कार्यक्रम में व्यक्त धार्मिक और आध्यात्मिक विचार संबंधित साध्वीवृंद तथा आयोजकों के वक्तव्यों के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। इन्हें किसी अन्य धार्मिक परंपरा या मत के संबंध में अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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