केंद्र ने गेहूं निर्यात खुला और आटा, मैदा, सूजी और दूसरे संबंधित उत्पादों के निर्यात पर लगी रोक हटा दी है। अब इन उत्पादों का निर्यात मुक्त श्रेणी में होगा।
प्रतीकात्मक फोटो
नई दिल्ली, दिल्ली। गेहूं निर्यात खुला करने के केंद्र के फैसले से भारतीय कारोबारियों और आटा मिलों के लिए विदेशी बाजार का रास्ता आसान हो गया है। डीजीएफटी ने गेहूं या मैस्लिन आटा, मैदा, सूजी, साबुत आटा और परिणामी आटे की निर्यात नीति को प्रतिबंधित से मुक्त श्रेणी में कर दिया है। यह बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू हुआ है। IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने यह फैसला ऐसे समय लिया है जब देश में गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा है और घरेलू उपलब्धता को लेकर स्थिति पहले से बेहतर हुई है। [1]
सरकार ने मई 2022 में घरेलू खाद्य सुरक्षा और बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए गेहूं के निर्यात को प्रतिबंधित किया था। उसी साल अगस्त में गेहूं से बने आटे के निर्यात पर भी रोक बढ़ाई गई थी। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के बाद दुनिया भर में गेहूं की आपूर्ति प्रभावित हुई थी, जिससे भारतीय गेहूं की विदेशों में मांग बढ़ी और घरेलू कीमतों पर दबाव आया। अब बदली नीति के तहत आटा और उससे जुड़े कई उत्पाद बिना पहले जैसी निर्यात पाबंदी के विदेश भेजे जा सकेंगे।
इससे पहले सरकार ने फरवरी 2026 में 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं और अतिरिक्त 5 लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी थी। यह फैसला बेहतर भंडार उपलब्धता को देखते हुए लिया गया था। इसके बाद अप्रैल में गेहूं निर्यात के लिए अतिरिक्त मात्रा की अनुमति और प्रक्रियाएं तय की गईं। अब गेहूं निर्यात खुला होने से कारोबारियों को मात्रा आधारित सीमित अनुमति के बजाय व्यापक अवसर मिलेंगे। हालांकि घरेलू कीमतों और उपलब्धता पर नजर रखना आगे भी सरकार के लिए अहम बना रहेगा।
सरकार के तीसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक 2025 26 में देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन 376.563 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 357.732 मिलियन टन से 5.3 प्रतिशत ज्यादा है। गेहूं उत्पादन 120.657 मिलियन टन आंका गया है, जबकि 2024 25 में यह 117.945 मिलियन टन था। यानी गेहूं उत्पादन में 2.712 मिलियन टन की बढ़ोतरी हुई है। बढ़े उत्पादन और बेहतर उपलब्धता ने सरकार को निर्यात नीति में बदलाव के लिए ज्यादा गुंजाइश दी है।
गेहूं निर्यात खुला होने से भारतीय गेहूं और उसके उत्पादों को विदेशी बाजारों में पहुंच बढ़ाने का अवसर मिलेगा। आटा, मैदा और सूजी बनाने वाली इकाइयों के लिए भी कारोबार बढ़ाने की संभावना बन सकती है। दूसरी ओर घरेलू उपभोक्ताओं के लिए इसका असर गेहूं और आटे की कीमतों पर निर्भर करेगा। यदि घरेलू आपूर्ति पर्याप्त बनी रहती है तो निर्यात बढ़ने के बावजूद बाजार में संतुलन बना रह सकता है। फिलहाल सरकार का फैसला खाद्य उपलब्धता और बढ़ते उत्पादन के बीच नए संतुलन की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और सरकारी स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। निर्यात नीति में बदलाव के बाद घरेलू कीमतों और उपलब्धता पर वास्तविक असर भविष्य के बाजार हालात पर निर्भर करेगा। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।