सुरंग में भूस्खलन से सिलक्यारा पोलगांव परियोजना में फिर चिंता बढ़ी, निर्माण एजेंसी ने घटना को सामान्य बताते हुए मलबा हटाने की बात कही है।
सुरंग में भूस्खलन
उत्तरकाशी, उत्तराखंड। सुरंग में भूस्खलन की ताजा घटना ने सिलक्यारा पोलगांव सुरंग परियोजना में सुरक्षा को लेकर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। 21 अगस्त को निर्माणाधीन सुरंग में पोलगांव बरकोट छोर से करीब 1300 से 1500 मीटर भीतर पहाड़ी से मलबा गिरने की सूचना सामने आई। घटना के बाद निर्माण कार्य प्रभावित हुआ और मलबा हटाने का काम शुरू किया गया। यह वही क्षेत्र है जहां नवंबर 2023 में निर्माण के दौरान 41 मजदूर 17 दिनों तक सुरंग के भीतर फंसे रहे थे। [1]
स्थानीय लोगों के मुताबिक, पहाड़ की तरफ से मलबा गिरने की घटना पोलगांव बरकोट छोर से करीब 1300 से 1500 मीटर अंदर हुई। घटना के बाद सुरंग के भीतर गिरे मलबे को हटाने का काम शुरू किया गया और निर्माण गतिविधियों पर असर पड़ा। घटना के चित्र और वीडियो भी सामने आए हैं, जिनसे परियोजना की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हुई। हालांकि निर्माण एजेंसी ने किसी बड़े खतरे की आशंका से इनकार किया है और इसे सुधार कार्य के दौरान होने वाली सामान्य घटना बताया है।
निर्माण एजेंसी के महाप्रबंधक रविकांत सिंह ने कहा कि सुरंगों की खुदाई और सुधार कार्य के दौरान कभी कभार मलबा गिरना सामान्य बात है। उनके मुताबिक, मौके पर मलबा हटाने का काम जारी है और सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जा रहा है। एजेंसी ने यह भी कहा कि मौजूदा स्थिति की तुलना 2023 की गंभीर घटना से नहीं की जानी चाहिए। इसके बावजूद सुरंग में भूस्खलन की घटना ने श्रमिकों की सुरक्षा और पहाड़ी क्षेत्र की भूगर्भीय स्थिति की निगरानी को लेकर सावधानी बढ़ाने की जरूरत सामने रखी है।
नवंबर 2023 में इसी सिलक्यारा बरकोट सुरंग में निर्माण के दौरान मलबा गिरने से 41 मजदूर अंदर फंस गए थे। यह घटना 12 नवंबर को हुई थी और बचाव अभियान करीब 17 दिनों तक चला। 28 नवंबर को सभी 41 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। सरकारी अभिलेखों के मुताबिक, सुरंग के करीब 60 मीटर हिस्से में मलबा गिरने से मजदूर फंसे थे। उस घटना के बाद सुरंग निर्माण में सुरक्षा, भूगर्भीय जोखिम और आपदा प्रबंधन को लेकर कई सवाल उठे थे।
सिलक्यारा पोलगांव सुरंग की लंबाई करीब 4.5 किलोमीटर है और यह यमुनोत्री राजमार्ग तथा चारधाम सड़क परियोजना से जुड़ी है। निर्माण कार्य 2018 में शुरू हुआ था, लेकिन तकनीकी और भूगर्भीय चुनौतियों के कारण परियोजना तय समय में पूरी नहीं हो सकी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सुरंग की खुदाई 2024 में पूरी हो चुकी थी और करीब 90 प्रतिशत नागरिक निर्माण कार्य पूरा बताया जा रहा है। अब लक्ष्य मार्च 2027 तक परियोजना पूरी करने का है। ताजा सुरंग में भूस्खलन के बाद लगातार निगरानी और सुरक्षा उपायों पर ध्यान देना अहम होगा।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट उपलब्ध तथ्यों और संबंधित अधिकारियों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। सुरंग में मलबा गिरने की घटना के कारण और उससे जुड़े सुरक्षा जोखिमों का आकलन संबंधित एजेंसियां कर रही हैं तथा निर्माण एजेंसी ने इसे सामान्य सुधार प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।