उत्तर प्रदेश

महिला उद्यमिता पर बड़ा जोर, बायफ के 60 साल में बदली गांव की तस्वीर

महिला उद्यमिता को नई पहचान देने की पहल, बायफ के 60वें स्थापना दिवस पर पिपराइच में ब्रांडिंग बोर्ड दिए गए और ग्रामीण आजीविका पर जोर रहा।

By अजय त्यागी 1 min read
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महिला सशक्तिकरण पर विशेष कार्यक्रम

पिपराइच, गोरखपुर। बायफ संस्था के 60वें स्थापना दिवस पर ग्रामीण विकास, आजीविका संवर्धन और महिला सशक्तिकरण को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। पिपराइच ब्लॉक में हुए आयोजन में डिजिटल सखियों और महिला उद्यमियों ने संस्था की छह दशक लंबी विकास यात्रा को याद किया। कार्यक्रम में ग्रामीण समुदायों के जीवन में बायफ के योगदान पर चर्चा हुई और आगे भी अधिक प्रभावी ढंग से काम करने का संकल्प लिया गया। इस मौके पर महिला उद्यमियों को ब्रांडिंग बोर्ड भी दिए गए, ताकि उनके कारोबार को स्थानीय स्तर पर बेहतर पहचान मिल सके।

महिलाओं को मिला मंच

कार्यक्रम की शुरुआत बायफ के संस्थापक डॉ. मणि भाई देसाई के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। इस दौरान ग्रामीण विकास, पशुपालन, आजीविका और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनके विचारों और योगदान को याद किया गया। स्थापना दिवस के मौके पर ग्रामीण इलाकों में व्यवसाय कर रहीं महिलाओं को ब्रांडिंग बोर्ड वितरित किए गए। इसका उद्देश्य उनके उत्पाद और कारोबार को अलग पहचान देना था। इससे स्थानीय बाजार में व्यवसाय की पहचान मजबूत करने और महिलाओं को अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

महिला उद्यमिता को लेकर कार्यक्रम में यह संदेश भी सामने आया कि गांवों में कारोबार कर रही महिलाओं को केवल आर्थिक गतिविधियों तक सीमित नहीं देखा जाना चाहिए। उनकी मेहनत को पहचान और बाजार तक पहुंच मिले तो छोटे कारोबार आगे बढ़ सकते हैं। ब्रांडिंग बोर्ड इसी दिशा में एक व्यावहारिक पहल के रूप में सामने आए। कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने ग्रामीण आजीविका और महिलाओं के कारोबार को मजबूत करने वाले प्रयासों की सराहना की। इससे स्थानीय स्तर पर महिलाओं के काम को पहचान दिलाने और आत्मनिर्भरता को बढ़ाने की कोशिश दिखाई दी।

डिजिटल सखियों की भूमिका

महिला उद्यमिता कार्यक्रम में पीडीएस अधिकारी सह बीडीओ श्याम लाल, एडीओ मो. अशरफ अली अंसारी और बीएमएम गोरख कुमार की मौजूदगी रही। अधिकारियों ने ग्रामीण आजीविका और महिला सशक्तिकरण से जुड़े प्रयासों की सराहना की। डिजिटल सखियों और महिला उद्यमियों के साथ संवाद के दौरान उन्हें अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने, ब्रांड पहचान बनाने और उपलब्ध सरकारी तथा वित्तीय अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया गया। इससे कार्यक्रम केवल स्थापना दिवस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के सामने मौजूद व्यावहारिक अवसरों और चुनौतियों पर भी चर्चा का मंच बना।

डिजिटल सखियों के जरिए ग्रामीण महिलाओं को डिजिटल सेवाओं, वित्तीय समावेशन और आजीविका के अवसरों से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। बायफ की आधिकारिक जानकारी में भी डिजिटल सखियों और महिला केंद्रित विकास को संस्था के काम का हिस्सा बताया गया है। स्थानीय स्तर पर ऐसी भूमिका महिलाओं को सरकारी सेवाओं, वित्तीय सुविधाओं और कारोबारी अवसरों की जानकारी तक पहुंचाने में मदद कर सकती है। कार्यक्रम में इसी समन्वय को मजबूत करने और महिलाओं को अपने कारोबार के लिए नए अवसर तलाशने के लिए प्रेरित करने की बात सामने आई।

60 साल की बड़ी विरासत

डिजिटल सखी परियोजना की ज्वाइंट प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर गीता कौर ने बायफ संस्था के 60 गौरवपूर्ण वर्षों की उपलब्धि पर अधिकारियों और प्रतिभागियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण समुदायों के साथ लंबे समय से जुड़कर संस्था ने आजीविका, महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने डिजिटल सखियों और महिला उद्यमियों की भूमिका को रेखांकित करते हुए स्थानीय स्तर पर महिलाओं को डिजिटल सेवाओं, वित्तीय समावेशन और उद्यमिता से जोड़ने को ग्रामीण विकास की दिशा में अहम कदम बताया।

महिला उद्यमिता कार्यक्रम में महिला उद्यमियों, डिजिटल सखियों और विभागीय अधिकारियों के बीच संवाद से स्थानीय समन्वय को भी बढ़ावा मिला। महिलाओं को अपने कारोबार की ब्रांडिंग मजबूत करने और उपलब्ध अवसरों का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया गया। बायफ के 60वें स्थापना दिवस का यह आयोजन संस्था की छह दशकों की सेवा और ग्रामीण विकास की प्रतिबद्धता को सामने लाने वाला अवसर बना। महिला उद्यमिता को आगे बढ़ाने, स्थानीय कारोबार को पहचान देने और ग्रामीण महिलाओं को नए अवसरों से जोड़ने का संदेश इस पूरे आयोजन के केंद्र में रहा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। सरकारी योजनाओं, वित्तीय अवसरों और उद्यमिता संबंधी सुविधाओं का लाभ संबंधित पात्रता एवं नियमों के अधीन होता है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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