अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाया है। तेहरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है और चीन ने अमेरिकी दबाव का विरोध किया है।
प्रतीकात्मक फोटो
काहिरा मिस्र और वॉशिंगटन अमेरिका। अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाते हुए उसकी आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ा दिया है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने सोमवार को नई कार्रवाई की घोषणा की। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ कारोबार जारी रखने वाले देशों को डॉलर आधारित वित्तीय व्यवस्था से बाहर किए जाने का जोखिम हो सकता है। हालांकि सबसे कड़े संभावित कदम तत्काल लागू नहीं किए गए हैं। ईरान ने प्रतिबंधों के जवाब में कार्रवाई की चेतावनी दी है। Reuters के अनुसार तेहरान को उम्मीद है कि उसके प्रमुख व्यापारिक साझेदार अमेरिकी दबाव का विरोध करेंगे। [1]
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने 60 व्यक्तियों संस्थाओं और जहाजों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। बेसेंट ने यह नहीं बताया कि आगे किन देशों को निशाना बनाया जा सकता है और संभावित दंड कब से लागू होंगे। उन्होंने कहा कि संबंधित देशों और कंपनियों को नए निर्देशों का पालन करने के लिए समय दिया जाएगा। अमेरिका का कहना है कि प्रतिबंधों का उद्देश्य ईरान की आर्थिक जीवनरेखा को कमजोर करना है। नए कदमों में सबसे कठोर माध्यमिक प्रतिबंध फिलहाल नहीं लगाए गए हैं। इससे वॉशिंगटन ने दबाव और तत्काल कार्रवाई के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है।
नई सूची में चीन के उन वित्तीय संस्थानों को शामिल नहीं किया गया जिन पर ईरान के तेल कारोबार को सुविधा देने का संदेह है। चीन लंबे समय से ईरानी तेल का प्रमुख खरीदार रहा है। बेसेंट ने कहा कि कोई भी संस्था अमेरिकी प्रतिबंधों की पहुंच से ऊपर नहीं है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रतिबंध और दबाव समस्या का समाधान नहीं करते। बीजिंग ने अपने हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की बात कही है। इससे अमेरिका और चीन के बीच आर्थिक और रणनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है।
ईरान के अर्थव्यवस्था मंत्री अली मदनीजादेह ने कहा कि उनका देश अमेरिकी प्रतिबंधों के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने अमेरिकी कदम को आर्थिक हमला बताते हुए जवाब देने की क्षमता का दावा किया। उन्होंने कहा कि चीन और रूस ने अमेरिकी उपायों को स्वीकार नहीं किया है और दूसरे देश भी उनका विरोध कर सकते हैं। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल होसैन मोहेब्बी ने भी चेतावनी दी कि ईरानी बुनियादी ढांचे को खतरा हुआ तो अमेरिका के महत्वपूर्ण हितों और ऊर्जा मार्गों पर भारी प्रहार किया जा सकता है।
ईरान पर प्रतिबंध बढ़ाने का फैसला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष को करीब छह महीने हो चुके हैं। अमेरिकी और इजरायली हमलों ने ईरान की पारंपरिक सैन्य क्षमता को नुकसान पहुंचाया है। इसके बावजूद ईरान के पास मिसाइल और ड्रोन क्षमता बनी हुई है। वह खाड़ी क्षेत्र के देशों और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों के लिए खतरा पैदा कर सकता है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम की मौजूदा स्थिति भी स्पष्ट नहीं है। हाल के हफ्तों में बड़े हमले कम हुए हैं लेकिन कूटनीतिक समाधान की संभावना अभी कमजोर दिखाई देती है।
अमेरिकी दबाव का बड़ा असर चीन के साथ संबंधों पर भी पड़ सकता है। चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार रहा है और चीनी बैंकों पर कार्रवाई से वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच तनाव बढ़ सकता है। अमेरिका अगले महीने संभावित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की वार्ता को लेकर भी सावधानी बरत रहा है। इस बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने तेहरान में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की। यह यात्रा शांति प्रयासों से जुड़ी बताई गई है और मुनीर की ट्रंप से हालिया बातचीत के बाद हुई है।
पाकिस्तान इससे पहले भी अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर चुका है। जून में उसकी मध्यस्थता से एक अंतरिम शांति समझौता हुआ था लेकिन बाद में वह प्रयास कमजोर पड़ गया। ईरान पर प्रतिबंधों का ताजा दौर ऐसे समय आया है जब अमेरिका तेहरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाकर संघर्ष को समाप्त करने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर ईरान अपने व्यापारिक साझेदारों से अमेरिकी कदमों का विरोध करने की उम्मीद कर रहा है। इस टकराव का असर तेल आपूर्ति वैश्विक वित्तीय व्यवस्था और खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा पर आगे भी पड़ सकता है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। ईरान पर प्रतिबंधों और संभावित जवाबी कार्रवाई से जुड़ी स्थिति तेजी से बदल सकती है तथा अमेरिका ईरान चीन या अन्य देशों की नई घोषणाओं से घटनाक्रम में बदलाव संभव है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।