राजस्थान

नीलकंठ पर कार्रवाई, 9 पंजीकरण निलंबित, नियमों के उल्लंघन पर सख्ती

नीलकंठ पर कार्रवाई के बाद 9 ART और सरोगेसी पंजीकरण निलंबित, विज्ञापन में नीले भ्रूण को लेकर लिंग चयन के प्रचार का प्रथम दृष्टया संकेत मिला।

By अजय त्यागी 1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो

जयपुर, राजस्थान। नीलकंठ पर कार्रवाई के तहत नीलकंठ फर्टिलिटी एंड वूमेन केयर हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड के अधीन चल रहे ART क्लिनिक, ART बैंक और सरोगेसी क्लिनिक के कुल 9 पंजीकरण प्रमाणपत्र तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक निलंबित कर दिए गए हैं। विभाग के अनुसार, एक अंग्रेजी समाचार पत्र में प्रकाशित IVF और टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर के विज्ञापन में भ्रूण को नीले रंग में दिखाया गया था। इसे प्रथम दृष्टया लिंग चयन संबंधी सेवा के प्रचार का संकेत माना गया है।  [1]

विज्ञापन जांच

मामले में विभाग की नजर उस विज्ञापन पर गई जिसमें भ्रूण को नीले रंग में दिखाया गया था। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक नीला रंग मेल बच्चे से संबंधित संकेत के तौर पर लिया गया। इसी आधार पर प्रथम दृष्टया यह सवाल उठा कि विज्ञापन कहीं लिंग चयन जैसी प्रतिबंधित सेवा के प्रचार की ओर तो इशारा नहीं कर रहा था। राज्य के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने इसी प्रारंभिक निष्कर्ष के आधार पर संबंधित संस्थान के खिलाफ कार्रवाई की। हालांकि उपलब्ध तथ्यों में किसी वास्तविक लिंग चयन प्रक्रिया कराए जाने की पुष्टि नहीं कही गई है। 

ART यानी सहायताप्राप्त जननीय प्रौद्योगिकी के तहत इलाज और प्रजनन संबंधी सेवाओं को तय कानून और नैतिक मानकों के मुताबिक चलाना जरूरी है। ART विनियमन अधिनियम 2021 की धारा 26 बच्चे के पूर्व निर्धारित लिंग की पेशकश और भ्रूण का लिंग पहचानने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाती है। इसी कानून की धारा 32 सेक्स सेलेक्टिव ART सुविधाओं के विज्ञापन पर भी रोक लगाती है। इसलिए विभाग ने विज्ञापन में दिखाई गई प्रस्तुति को गंभीरता से लिया और पंजीकरण निलंबित करने की कार्रवाई की। 

9 केंद्रों पर रोक

विभाग के मुताबिक, नीलकंठ पर कार्रवाई का असर राजस्थान में संचालित संस्थान के 9 पंजीकरणों पर पड़ा है। इनमें जयपुर के 3 केंद्र और भीलवाड़ा, उदयपुर, कोटा, जोधपुर तथा अजमेर के 1 1 केंद्र शामिल हैं। जयपुर में 2 ART क्लिनिक लेवल 2, 1 सरोगेसी क्लिनिक और 1 ART बैंक का पंजीकरण निलंबित किया गया है। दूसरे जिलों में ART क्लिनिक लेवल 1 और लेवल 2 के पंजीकरण प्रभावित हुए हैं। राष्ट्रीय ART और सरोगेसी रजिस्ट्री में भी संस्थान के कई पंजीकरण दर्ज हैं। 

राज्य सरकार ने साफ किया है कि ART और सरोगेसी सेवाओं का संचालन कानून, नियम और तय नैतिक मानकों के मुताबिक होना चाहिए। लिंग चयन जैसे प्रतिबंधित काम के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रचार को स्वीकार नहीं किया जाएगा। नीलकंठ पर कार्रवाई फिलहाल प्रथम दृष्टया उल्लंघन के आधार पर की गई है और पंजीकरण अगले आदेश तक निलंबित हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि विज्ञापन के आधार पर किसी वास्तविक लिंग चयन प्रक्रिया का अंतिम रूप से प्रमाण मिल गया है। मामले से जुड़े तथ्यों और जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा। 

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार स्रोतों और आधिकारिक उपलब्ध जानकारी से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। विज्ञापन में दिखाई गई प्रस्तुति को लेकर विभाग ने प्रथम दृष्टया लिंग चयन के प्रचार का संकेत माना है, लेकिन किसी वास्तविक लिंग चयन प्रक्रिया के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच और सक्षम प्राधिकारी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही माना जाएगा। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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