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नेपाल में बाढ़ का कहर, गांव बहे, सड़कें, पुल और बिजली परियोजनाएं तबाह

नेपाल में बाढ़ ने तिब्बत सीमा से लगे इलाके में भारी तबाही मचाई। भोटेकोशी नदी में उफान आने से गांव, सड़क, पुल और बिजली परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं।

By अजय त्यागी 1 min read
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नेपाल में बाढ़

काठमांडू, नेपाल। नेपाल में बाढ़ ने तिब्बत सीमा से लगे रसुवा जिले में भारी तबाही मचा दी है। भोटेकोशी नदी में अचानक आए तेज बहाव ने टिमुरे और स्याफ्रुबेसी समेत कई इलाकों को प्रभावित किया है। बस्तियों के साथ सड़क पुल और जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। Reuters की एक रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने अभी जानमाल के नुकसान का अंतिम आंकड़ा जारी नहीं किया है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। [1]

तिब्बत से आया सैलाब

बाढ़ बुधवार सुबह अचानक भोटेकोशी नदी में आई और देखते ही देखते आसपास के इलाकों में फैल गई। नेपाली अधिकारियों के मुताबिक पानी तिब्बत की ओर से आया। रसुवा के टिमुरे और स्याफ्रुबेसी सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में बताए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर कई बस्तियों और बाजार क्षेत्रों में भारी नुकसान की खबर है। अधिकारियों के पास अभी यह स्पष्ट तस्वीर नहीं है कि कितने घर पूरी तरह बह गए हैं और कितने लोग प्रभावित हुए हैं। नुकसान का विस्तृत आकलन लगातार जारी है।

भोटेकोशी में बढ़े पानी का असर अब नीचे की ओर भी दिखाई दे रहा है। बाढ़ का पानी नुवाकोट और धादिंग की दिशा में आगे बढ़ने की जानकारी है। प्रशासन ने त्रिशूली नदी के किनारे रहने वाले लोगों को भी सतर्क कर दिया है। मुग्लिन तक नदी के आसपास बसे इलाकों में खतरा बढ़ने की आशंका जताई गई है। लोगों से नदी किनारे जाने और अनावश्यक यात्रा से बचने को कहा गया है। खासकर निचले और कमजोर इलाकों में रहने वाले लोगों से समय रहते सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की गई है।

बचाव में जुटी टीमें

अचानक आई बाढ़ के बाद नेपाल सरकार ने बचाव और राहत अभियान तेज कर दिया है। नेपाली सेना नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के जवानों को प्रभावित इलाकों में भेजा गया है। नेपाली सेना के 2 हेलीकॉप्टर खोज और बचाव अभियान के लिए लगाए गए हैं। उनके साथ मेडिकल टीमें भी भेजी गई हैं। जरूरत पड़ने पर निजी हेलीकॉप्टरों को भी इस्तेमाल के लिए तैयार रखा गया है। प्रशासन ने जोखिम वाले और निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।

रसुवा के टिमुरे इलाके में तैनात सुरक्षा कर्मियों को लेकर भी चिंता बढ़ी है। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक वहां ड्यूटी पर तैनात सशस्त्र पुलिस बल के 9 जवानों से संपर्क नहीं हो पाया है। साथ ही टिमुरे का इलाका पुलिस चौकी और रसुवागढ़ी क्षेत्र में स्थित पुलिस ढांचे को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। अधिकारी लगातार संपर्क और बचाव की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल प्रशासन ने किसी मानवीय क्षति की पुष्टि नहीं की है और लोगों से केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने को कहा है।

बाढ़ से उठे सवाल

इस प्राकृतिक आपदा के पीछे पानी का अचानक इतना बड़ा बहाव कैसे आया यह सवाल अभी पूरी तरह साफ नहीं हुआ है। कुछ शुरुआती रिपोर्टों में भारी बारिश का जिक्र है लेकिन नेपाल में बाढ़ पूर्वानुमान अधिकारियों ने बताया है कि रसुवा में हुई बारिश से ही इस बाढ़ को जोड़ना फिलहाल सही नहीं होगा। उपग्रह तस्वीरों में तिब्बत की तरफ भारी बारिश दिखाई देने की बात सामने आई है। इसलिए बाढ़ की वास्तविक वजह और इसके स्रोत को लेकर जांच और मौसम संबंधी विश्लेषण जारी है।

नेपाल में बाढ़ की यह घटना पिछले साल भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ की याद भी दिला रही है। उस घटना में 9 लोगों की मौत हुई थी और कई लोग लापता हुए थे। बाढ़ में नेपाल और चीन को जोड़ने वाला फ्रेंडशिप ब्रिज भी बह गया था जिससे व्यापार और परिवहन प्रभावित हुआ था। इस बार भी अधिकारियों की सबसे बड़ी चिंता नदी के बहाव के साथ खतरे के नीचे की ओर बढ़ने को लेकर है। प्रशासन ने लोगों से चेतावनी को गंभीरता से लेने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।

नेपाल में बाढ़ के कारण रसुवा और आसपास के इलाकों में हालात तेजी से बदल रहे हैं। टिमुरे और स्याफ्रुबेसी में बस्तियों और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान की पूरी तस्वीर अभी सामने नहीं आई है। सरकार ने सेना पुलिस और बचाव एजेंसियों को सक्रिय कर दिया है और नदी के नीचे वाले इलाकों में भी अलर्ट बढ़ाया गया है। सबसे अहम बात यह है कि फिलहाल मानवीय क्षति का अंतिम आंकड़ा स्पष्ट नहीं है। राहत और बचाव अभियान के साथ प्रशासन नुकसान और प्रभावित लोगों की वास्तविक संख्या जुटाने में लगा है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। बाढ़ से हुई मानवीय और संपत्ति क्षति के अंतिम आंकड़े आधिकारिक आकलन और जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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