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स्विट्जरलैंड का बड़ा फैसला, NATO और प्रतिबंधों पर जनता करेगी फैसला

स्विट्जरलैंड का बड़ा फैसला अब जनता के हाथ में है। 27 सितंबर को वोट होगा कि देश की तटस्थता को और सख्त किया जाए या मौजूदा व्यवस्था कायम रखी जाए।

By अजय त्यागी 1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो

ज्यूरिख, स्विट्जरलैंड। स्विट्जरलैंड का बड़ा फैसला 27 सितंबर को होने वाले जनमत संग्रह में सामने आएगा। जनता से पूछा जाएगा कि देश की तटस्थता को संविधान में और सख्त बनाया जाए या मौजूदा व्यवस्था जारी रहे। प्रस्ताव पारित होने पर स्विट्जरलैंड किसी सैन्य या रक्षा गठबंधन में शामिल होने या उसके साथ सहयोग करने से बच सकेगा और युद्धरत देशों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने की गुंजाइश भी काफी सीमित हो जाएगी। Reuters की एक रिपोर्ट के अनुसार हालिया सर्वेक्षण में 62 प्रतिशत लोग प्रस्ताव के खिलाफ और 36 प्रतिशत इसके पक्ष में हैं।  [1]

तटस्थता पर बड़ा सवाल

स्विट्जरलैंड की तटस्थता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 1815 से मान्यता मिली हुई है और यह 1848 से देश के संविधान में दर्ज है। प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि मौजूदा नीति धीरे धीरे कमजोर हुई है। उनका खास तर्क रूस के खिलाफ स्विट्जरलैंड की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर है। दक्षिणपंथी स्विस पीपुल्स पार्टी से जुड़े समर्थक चाहते हैं कि संविधान में स्थायी और सशस्त्र तटस्थता को ज्यादा स्पष्ट तरीके से दर्ज किया जाए।

प्रस्ताव के तहत स्विट्जरलैंड पर सैन्य या रक्षा गठबंधन के साथ सहयोग पर भी कड़ी पाबंदी होगी। अपवाद तभी होगा जब देश पर सीधा सैन्य हमला हो या ऐसा हमला होने की तैयारी हो। युद्धरत देशों पर प्रतिबंध लगाने की भी मनाही होगी, हालांकि संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों और प्रतिबंधों की चोरी रोकने वाले उपायों के लिए अपवाद रखा गया है। समर्थकों का कहना है कि इससे स्विट्जरलैंड की तटस्थ पहचान मजबूत होगी और वह अंतरराष्ट्रीय संघर्षों से दूरी बनाए रख सकेगा।

सरकार ने प्रस्ताव ठुकराया

स्विट्जरलैंड की सरकार और अधिकांश राजनीतिक दल इस पहल का विरोध कर रहे हैं। विदेश मंत्री इग्नाजियो कैसिस का कहना है कि संविधान में तटस्थता को इस तरह कठोर करने से देश की सुरक्षा और पड़ोसी देशों के साथ संबंध प्रभावित हो सकते हैं। सरकार का तर्क है कि मौजूदा व्यवस्था स्विट्जरलैंड को बदलती परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेने की पर्याप्त गुंजाइश देती है। NATO के साथ कुछ सुरक्षा सहयोग भी इसी लचीलेपन का हिस्सा है।

सरकारी विशेषज्ञों के मुताबिक तटस्थता का मौजूदा कानूनी ढांचा पहले से स्पष्ट है और नए संवैधानिक प्रतिबंध की जरूरत नहीं है। सरकार यह भी मानती है कि सुरक्षा हालात बिगड़ने पर सहयोग के विकल्प खुले रखना देश के हित में है। दूसरी ओर अभियान चलाने वाले समूहों ने शांति और युद्ध से दूरी के संदेश वाले पोस्टर पूरे देश में लगाए हैं। इस अभियान को रूस का समर्थन भी मिला है, जिससे बहस और ज्यादा राजनीतिक हो गई है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। स्विट्जरलैंड के जनमत संग्रह का अंतिम परिणाम मतदाताओं के मतदान पर निर्भर करेगा और मौजूदा सर्वेक्षण परिणाम अंतिम नतीजे का संकेत मात्र हैं। प्रस्ताव पारित होने की स्थिति में उसके कानूनी और विदेश नीति संबंधी प्रभाव संबंधित संस्थाओं की आगे की प्रक्रिया से स्पष्ट होंगे। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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