डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में शरिया कानून पर रोक का समर्थन किया है। जानिए एक कानूनी व्यवस्था पर उनका तर्क और महंगाई से जुड़े उनके दावे क्या हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
वॉशिंगटन, अमेरिका। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह अमेरिका में शरिया कानून को प्रतिबंधित करने वाले कानून का समर्थन करेंगे। उन्होंने तर्क दिया कि देश में केवल एक कानूनी व्यवस्था होनी चाहिए। IANS के अनुसार ट्रंप ने यह बात रूढ़िवादी प्रसारक ग्लेन बेक के साथ एक इंटरव्यू में कही। बेक ने उनसे अमेरिका के लिए नो शरिया लॉ एक्ट लाने या उस पर हस्ताक्षर करने को लेकर सवाल किया था। ट्रंप ने जवाब में प्रतिबंध का स्पष्ट समर्थन जताया। [1]
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका के कुछ हिस्सों में शरिया कानून पहले से लागू हो रहा है। हालांकि उन्होंने ऐसे स्थानों की पहचान नहीं की और इस दावे के समर्थन में कोई प्रमाण भी प्रस्तुत नहीं किया। उन्होंने लंदन और पेरिस का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां इस्लामी धार्मिक कानून को अलग जीवन पद्धति के रूप में देखा जाता है। ट्रंप ने कहा कि वह किसी ऐसी व्यवस्था के पक्ष में नहीं हैं जो अमेरिकी कानूनी ढांचे के समानांतर काम करे। उन्होंने इसे विचारधारा के बजाय सामान्य समझ का विषय बताया।
ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह इस दिशा में नया संघीय कानून लाने की कोशिश करेंगे या किसी मौजूदा प्रस्ताव का समर्थन करेंगे। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि ऐसी रोक को व्यवहार में किस तरह लागू किया जाएगा। राष्ट्रपति ने कहा कि जहां भी ऐसी व्यवस्था लागू होती दिखाई देगी वहां अधिकारी कार्रवाई करेंगे। उनका कहना था कि अमेरिका में एक ही प्रणाली होनी चाहिए। इस बयान के बाद बहस का केंद्र यह सवाल भी बन गया है कि धार्मिक मान्यताओं और देश के मौजूदा कानूनों के बीच कानूनी सीमा किस तरह तय की जाएगी।
ग्लेन बेक ने बातचीत के दौरान इस मुद्दे को इस्लाम और लोकतांत्रिक समाजवादियों के कथित रेड ग्रीन अलायंस से भी जोड़ा। इसके साथ ही उन्होंने युवाओं की महंगाई और जीवन यापन की लागत से जुड़ी चिंता को लेकर रिपब्लिकन पार्टी की रणनीति पर भी ट्रंप से सवाल किया। ट्रंप ने इसके जवाब में घरेलू कीमतों का मुद्दा उठाया और महंगाई के लिए डेमोक्रेट्स को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने सत्ता संभाली तब ईंधन और किराने सहित कई जरूरी वस्तुओं की कीमतें काफी ऊंची थीं।
ट्रंप ने दावा किया कि उनके प्रशासन के दौरान ईंधन, किराने का सामान और अंडों की कीमतों में काफी कमी आई है। उन्होंने यह भी कहा कि बीफ की कीमतें अब नीचे आना शुरू हो गई हैं। affordability के सवाल पर उन्होंने अपने प्रशासन की आर्थिक नीतियों का बचाव किया और कहा कि उन्हें ऊंची कीमतों वाली स्थिति विरासत में मिली थी। बातचीत में उन्होंने राजनीतिक विचारधारा के बजाय सामान्य समझ को प्राथमिकता देने की बात भी दोहराई। हालांकि इंटरव्यू में शरिया कानून पर उनके प्रस्ताव की कानूनी प्रक्रिया को लेकर कोई विस्तृत खाका सामने नहीं आया।
ट्रंप की टिप्पणी फिलहाल उनके राजनीतिक रुख और समर्थन की अभिव्यक्ति के रूप में सामने आई है। उन्होंने यह जरूर कहा कि वह प्रतिबंध का समर्थन करेंगे लेकिन किसी प्रस्तावित संघीय कानून का मसौदा या उसकी कानूनी संरचना सामने नहीं रखी। इसलिए उनके बयान को तत्काल लागू होने वाले नए कानून की घोषणा के रूप में नहीं देखा जा सकता। अमेरिका में किसी भी संघीय कानून को लागू करने के लिए विधायी प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसी कारण बयान और वास्तविक कानूनी कार्रवाई के बीच अंतर समझना महत्वपूर्ण है।
ट्रंप ने अपने बयान में यह भी कहा कि जहां अधिकारियों को ऐसी व्यवस्था दिखाई देगी वहां उसे हटाया जाएगा। लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि वह किन विशिष्ट संस्थाओं या प्रक्रियाओं की बात कर रहे थे। उनके दावे में जिन अमेरिकी क्षेत्रों का उल्लेख किया गया वहां किसी विशेष उदाहरण या प्रमाण की जानकारी भी नहीं दी गई। इस कारण इस पूरे मुद्दे पर आगे की राजनीतिक और कानूनी बहस महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में मुख्य बात ट्रंप का प्रतिबंध के पक्ष में दिया गया सार्वजनिक समर्थन है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। शरिया कानून से संबंधित ट्रंप के दावे के समर्थन में उनके द्वारा कोई विशिष्ट स्थान या प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है और प्रस्तावित कानूनी प्रक्रिया का स्वरूप भी स्पष्ट नहीं है। पाठकों को ऐसे राजनीतिक और कानूनी दावों को आधिकारिक विधायी दस्तावेजों तथा विश्वसनीय स्रोतों के संदर्भ में समझना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।