प्रादेशिक

वैज्ञानिक सोच से अंधविश्वास पर वार तीन शिक्षकों का सम्मान

डोंगरगढ़ में राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान तीन शिक्षकों को सम्मान मिला वैज्ञानिक सोच और तर्कशीलता के जरिए अंधविश्वास से लड़ने का संदेश दिया गया।

By अजय त्यागी 1 min read
Twitter Facebook WhatsApp

शिक्षकों का सम्मान

डोंगरगढ़, छत्तीसगढ़। डोंगरगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं जन जागरूकता कार्यक्रम में समाज के बीच वैज्ञानिक सोच और तर्कशीलता को बढ़ावा देने वाले तीन शिक्षकों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम माता बमलेश्वरी अतिथि गृह में हुआ। सम्मान पाने वालों में प्राथमिक विद्यालय बेलदरिया के प्रधान शिक्षक रोहित कुमार, उर्दू प्राथमिक विद्यालय कोहनासराय के विशिष्ट शिक्षक मो नजमुद्दीन और शीतला +2 उच्च विद्यालय मघड़ा के शिक्षक डॉ मो एजाज अहमद शामिल रहे। आयोजन का उद्देश्य लोगों, खासकर बच्चों और युवाओं, में सवाल पूछने तथा तथ्यों को परखने की आदत विकसित करना रहा।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण 

प्रधान शिक्षक रोहित कुमार ने कहा कि वैज्ञानिक सोच की शुरुआत घर और विद्यालय से होती है। उन्होंने बताया कि बच्चों को डराने या तत्काल संतुष्ट करने के लिए कई बार ऐसे उदाहरण दिए जाते हैं जिनका विज्ञान से कोई संबंध नहीं होता। ऐसी बातें धीरे धीरे बच्चों के मन में बैठ सकती हैं और अंधविश्वास को बढ़ावा दे सकती हैं। उन्होंने कहा कि हमारी ज्ञानेंद्रियां भी हर समय सही जानकारी नहीं देतीं और कई बार भ्रमित कर सकती हैं। इसलिए किसी भी बात को प्रमाण और तर्क की कसौटी पर परखने के बाद ही विश्वास करना चाहिए।

मो नजमुद्दीन ने कहा कि विज्ञान लोगों को तर्क करना सवाल पूछना और किसी घटना के पीछे कारण तलाशना सिखाता है। इसके विपरीत अंधविश्वास प्रश्न करने की स्वतंत्रता को रोकता है। उन्होंने कहा कि विज्ञान के प्रसार के साथ अंधविश्वास जादू टोना डायन प्रथा और झाड़ फूंक जैसी कुप्रथाएं धीरे धीरे सिमट रही हैं। डॉ मो एजाज अहमद ने कहा कि हर घटनाक्रम के पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक कारण होता है। जानकारी के अभाव में पाखंडी लोग भ्रम पैदा कर उसका लाभ उठाते हैं और इसे रोजगार का माध्यम बना लेते हैं।

समझाए गए भ्रम

कार्यक्रम में प्रतिभागियों के सामने विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से वैज्ञानिक तथ्यों और तर्कों को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया। जलते हुए कपूर को खाने का भ्रम सूखे नारियल में पानी डालने पर आग लगने की प्रक्रिया कागज पर पानी डालने से छिपा लेख दिखाई देना और तांत्रिक सामग्री से सवालों के सही जवाब मिलने का भ्रम दिखाया गया। इसके अलावा हाथ में दिए गए चावल का रंग बदलना आत्मा को मुक्त करने जैसी कथित घटना और ज्ञानेंद्रियों के भ्रमित होने का प्रदर्शन भी किया गया। हर गतिविधि के पीछे छिपे वैज्ञानिक कारणों को समझाया गया।

आयोजकों ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य केवल गतिविधियों का प्रदर्शन करना नहीं बल्कि उनके पीछे छिपे वैज्ञानिक कारणों को समझाना भी था। प्रतिभागियों को बताया गया कि किसी असामान्य घटना को देखकर तुरंत चमत्कार या रहस्य मानने के बजाय उसके कारण की खोज करनी चाहिए। वैज्ञानिक सोच व्यक्ति को सवाल करने प्रमाण तलाशने और उपलब्ध जानकारी की जांच करने के लिए प्रेरित करती है। इसी दृष्टिकोण से बच्चों और युवाओं में तर्कशीलता विकसित हो सकती है और वे भ्रम फैलाने वाली बातों को समझकर उनसे सावधान रहने की क्षमता हासिल कर सकते हैं।

समाज को संदेश

कार्यक्रम में शिक्षकों के विचारों और वैज्ञानिक गतिविधियों के माध्यम से यह संदेश सामने आया कि जागरूक समाज के निर्माण में वैज्ञानिक चेतना की अहम भूमिका है। वैज्ञानिक सोच को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर लोग सुनी सुनाई बातों पर आंख मूंदकर विश्वास करने से बच सकते हैं। आयोजन में बच्चों युवाओं और आम लोगों के बीच सवाल पूछने प्रमाण देखने और कारण समझने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। तीन शिक्षकों का सम्मान भी इसी सामाजिक उद्देश्य के लिए उनके योगदान को प्रोत्साहित करने की पहल के रूप में सामने आया।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है और इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। वैज्ञानिक गतिविधियों और अंधविश्वास से संबंधित किसी भी प्रयोग या प्रक्रिया को विशेषज्ञ मार्गदर्शन और उचित सुरक्षा व्यवस्था के बिना दोहराने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

#Dongargarh #Chhattisgarh #ScientificThinking #ScienceAwareness #RationalThinking #AntiSuperstition
Read Full Article on RexTV India