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कचरा प्रबंधन पर NGT सख्त, राज्यों के आंकड़ों पर उठे सवाल

कचरा प्रबंधन को लेकर NGT ने राज्यों की रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं। मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल में आंकड़ों की जमीनी जांच और जवाबदेही के निर्देश दिए गए हैं।

By अजय त्यागी 1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली, दिल्ली। कचरा प्रबंधन को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण की सख्ती के बाद पर्यावरणविदों ने राज्यों की रिपोर्ट में सामने आई कमियों पर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि कागजों पर दर्ज अनुपालन और जमीन पर दिखने वाले परिणामों के बीच बड़ा अंतर है। आईएएनएस के अनुसार, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल हाल में अधिकरण की निगरानी के दायरे में आए हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों ने कहा कि ठोस और तरल कचरे के आंकड़ों की स्वतंत्र जांच जरूरी है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। [1]

जमीनी जांच पर जोर

पर्यावरणविद प्रकृति श्रीवास्तव ने कहा कि राज्यों के लिए कचरा प्रबंधन से जुड़े आंकड़ों की सख्त निगरानी और पारंपरिक कचरा स्थलों की सफाई की जवाबदेही तय करना स्वागत योग्य कदम है। उनके अनुसार, इससे प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ सकती है और सार्वजनिक स्वास्थ्य तथा पर्यावरण की सुरक्षा मजबूत हो सकती है। पर्यावरणविद अनिल गुप्ता ने कहा कि ठोस कचरा प्रबंधन नियम पूरे देश में लागू हैं। इसके बावजूद स्थानीय निकायों से प्राप्त आंकड़ों की वास्तविक जांच किए बिना उन्हें संबंधित विभागों तक भेजने की समस्या बनी हुई है।

गुप्ता के अनुसार दिल्ली एनसीआर और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में ठोस कचरे के निपटान से जुड़े उल्लंघन सामने आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को राष्ट्रीय हरित अधिकरण के समक्ष आंकड़े जमा करने से पहले उनका भौतिक सत्यापन करना चाहिए। पर्यावरणविद तनुजा चौहान ने भी कहा कि कागजों पर दिए आंकड़ों और जमीनी वास्तविकता के बीच गंभीर अंतर है। यदि कचरे की मात्रा और उसके उपचार की सही जानकारी नहीं होगी, तो प्रभावी समाधान तैयार करना मुश्किल होगा।

कागजी अनुपालन बनाम हकीकत

पर्यावरणविदों ने कहा कि कई स्थानीय निकायों में सीवेज उपचार की पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं और बड़ी मात्रा में अनुपचारित सीवेज नदियों तथा जलस्रोतों में पहुंच रहा है। तनुजा चौहान ने कहा कि अधिकरण का हस्तक्षेप केवल अनुपालन सुधारने का निर्देश नहीं बल्कि पर्यावरणीय आंकड़ों को सही तरीके से जुटाने और सत्यापित करने का अवसर भी है। बी एस वोहरा ने भी रिपोर्ट किए गए अनुपालन के बजाय सत्यापित अनुपालन की जरूरत बताई। उनके अनुसार स्वतंत्र ऑडिट, जमीनी निरीक्षण और वास्तविक क्षमता उपयोग पर ध्यान देना चाहिए।

वोहरा ने कहा कि गलत या असंगत रिपोर्टिंग, स्थापित क्षमता को वास्तविक उपचार मान लेना, अपर्याप्त सीवर कनेक्टिविटी और कमजोर निगरानी जैसी समस्याएं आंकड़ों और परिणामों के बीच अंतर पैदा करती हैं। मध्य प्रदेश के मामले में अधिकरण ने मुख्य सचिव के हलफनामे की समीक्षा करते हुए पाया कि राज्य की स्थिति 413 शहरी स्थानीय निकायों से मिले आंकड़ों पर आधारित थी और कोई क्षेत्रीय जांच नहीं की गई थी। अधिकरण ने जिला कलेक्टरों और जिला मजिस्ट्रेटों के जरिए आंकड़ों के सत्यापन का निर्देश दिया है।

मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल पर नजर

मध्य प्रदेश में राज्य के अनुसार प्रतिदिन 8467 दशमलव 87 टन ठोस कचरा पैदा होता है और 8412 दशमलव 48 टन कचरे के प्रसंस्करण का दावा किया गया है। इससे 55 दशमलव 39 टन प्रतिदिन का अंतर बताया गया है। तरल कचरे के मामले में 413 स्थानीय निकायों में से 352 निकाय प्रतिदिन 584 दशमलव 81 एमएलडी तरल कचरा पैदा करते हैं। अधिकरण ने कहा कि इन निकायों में कोई उपचार सुविधा नहीं है। इन आंकड़ों के सत्यापन को लेकर अब जिला स्तर पर निगरानी जरूरी होगी।

पश्चिम बंगाल के मामले में अधिकरण ने ठोस और तरल कचरा प्रबंधन में गंभीर कमियों पर राज्य सरकार को फटकार लगाई है। अधिकरण ने सभी 128 शहरी स्थानीय निकायों में कचरे के पृथक्करण को तेज करने और अगली रिपोर्ट में कवरेज का मात्रात्मक विवरण देने को कहा है। तरल कचरे के लिए प्रत्येक निकाय में सीवेज उपचार की कमी दूर करने हेतु बजट के साथ समयबद्ध कार्ययोजना मांगी गई है। राज्य की नगर विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने पिछली सरकारों को जिम्मेदार ठहराते हुए सुधार प्रक्रिया शुरू होने की बात कही है।

अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि पश्चिम बंगाल में पुराने कचरे को 2027 तक हटाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि पुराने कचरे की सफाई के बाद स्रोत पर गीले और सूखे कचरे का पृथक्करण कर उसे जैविक खाद, बायोगैस और सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक सामग्री में बदलने की योजना है। पर्यावरणविदों का कहना है कि कचरा प्रबंधन की सफलता केवल सरकारी दावों से नहीं बल्कि स्वतंत्र सत्यापन और वास्तविक परिणामों से तय होनी चाहिए। राज्यों में मजबूत निगरानी व्यवस्था लागू करना अब अहम चुनौती है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। कचरा प्रबंधन से जुड़े आंकड़े और सरकारी अनुपालन की स्थिति संबंधित विभागों की नई रिपोर्ट तथा स्वतंत्र सत्यापन के आधार पर बदल सकती है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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