गंगा सागर, विभिन्न तीर्थों और 27 कुओं के पवित्र जल से भगवान भोलेनाथ का सहस्रधारा अभिषेक हुआ। मंदिर में जयकारों के बीच सैकड़ों श्रद्धालु उमड़े।
भगवान भोलेनाथ का सहस्रधारा अभिषेक
भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। काशीपुरी स्थित राधा कृष्ण मंदिर में पहली बार गंगा सागर, विभिन्न तीर्थों और 27 कुओं के पवित्र जल को एकत्रित कर भगवान भोलेनाथ का सहस्रधारा अभिषेक किया गया। शाम 6 से 7.30 बजे तक चले आयोजन में महिला पुरुषों, वरिष्ठजनों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साह से भाग लिया। अभिषेक के दौरान पूरा मंदिर परिसर भोलेनाथ के जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने विधि विधान से पूजा अर्चना कर भगवान से सुख शांति और परिवार की खुशहाली की कामना की।
आयोजन से पहले सुप्रसिद्ध पंडितों ने विधि विधान और मंत्रोच्चार के साथ भगवान भोलेनाथ की पूजा कराई। इसके बाद गंगा सागर, विभिन्न तीर्थों और 27 कुओं से एकत्रित पवित्र जल से भगवान का सहस्रधारा अभिषेक शुरू किया गया। राजस्थान जन मंच के अध्यक्ष और भाजपा नेता कैलाश सोनी के नेतृत्व में हुए इस आयोजन में काशीपुरी वकील कॉलोनी के भक्तों और जिला टीम का सहयोग रहा। अभिषेक के दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल बना रहा और श्रद्धालु लगातार भोलेनाथ के जयकारे लगाते रहे।
आयोजन संत राधा रमन, वृंदावन धाम, महंत बनवारी शरण काठिया बाबा, हनुमान टेकरी, महंत संत दास महाराज, हाथीभाटा आश्रम, पुजारी मुरारी पांडे, पंचमुखी हनुमान मंदिर पुर रोड और कथा वाचक पंडित विजेंद्र शास्त्री के सानिध्य में संपन्न हुआ। इस दौरान पंडित देवीलाल शर्मा, पंडित घनश्याम शर्मा, पंडित जय शंकर और पंडित बालमुकुंद उपाध्याय सहित कई लोग मौजूद रहे। श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना में भाग लेकर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद लिया।
कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश प्रवक्ता रमेश नवहाल, जय नारायण जोशी, रामचंद्र मुंदड़ा, सुभाष गोयल, जगदीश सेन और प्रदीपनाथ सहित सैकड़ों भक्त एवं श्रद्धालु मौजूद रहे। महिला पुरुषों और वरिष्ठजनों ने भी पूरे उत्साह के साथ धार्मिक अनुष्ठान में हिस्सा लिया। मंदिर परिसर में मंत्रोच्चार और जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ के दर्शन किए। आयोजन के दौरान अलग अलग पवित्र जल स्रोतों को एकत्र कर भगवान शिव का अभिषेक किए जाने को लेकर भक्तों में खास उत्साह नजर आया।
काशीपुरी के राधा कृष्ण मंदिर में हुआ यह सहस्रधारा अभिषेक श्रद्धालुओं के लिए खास धार्मिक अनुभव रहा। गंगा सागर, विभिन्न तीर्थों और 27 कुओं के जल को एकत्र कर भगवान भोलेनाथ को अर्पित किए जाने के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। मंत्रोच्चार के बीच भक्तों ने पूजा की और सुख शांति तथा समृद्धि की प्रार्थना की। संतों, पंडितों और सैकड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने आयोजन की रौनक बढ़ाई। भीलवाड़ा में हुआ यह सहस्रधारा अभिषेक आस्था और सामूहिक भक्ति का खास नजारा बन गया।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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