मक्का रक्षा समझौता को शहबाज ने क्षेत्र में शांति और एकता का संदेश बताया तीनों देशों के बीच सामूहिक सुरक्षा सहयोग को भी अहम माना है।
प्रतीकात्मक फोटो
इस्लामाबाद पाकिस्तान। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को कहा कि पाकिस्तान सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुआ मक्का रक्षा समझौता तीनों देशों को और करीब लाया है। उन्होंने कहा कि इस समझौते ने पूरे क्षेत्र में एकता और शांति का संदेश दिया है। पाकिस्तान सऊदी अरब और तुर्किये ने 7 अगस्त को मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। यह समझौता पश्चिम एशिया में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच हुआ है और इसमें तीनों देशों की सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। [1]
मक्का रक्षा समझौता के तहत पाकिस्तान सऊदी अरब और तुर्किये ने सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसकी सबसे अहम व्यवस्था यह है कि तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने पर उसे सभी तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इस प्रावधान का उद्देश्य संभावित आक्रमण के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध को मजबूत करना है। समझौते में रक्षा सहयोग के विभिन्न पहलुओं को आगे बढ़ाने और तीनों देशों के बीच सुरक्षा समन्वय को मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी सामने आई है।
तीनों देशों की यह व्यवस्था ऐसे समय बनी है जब पश्चिम एशिया में सुरक्षा चिंताएं और क्षेत्रीय तनाव लगातार बने हुए हैं। समझौते के तहत सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करने के साथ क्षेत्र और उससे बाहर शांति सुरक्षा तथा स्थिरता को बढ़ावा देने की बात कही गई है। किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति को सभी सदस्यों पर हमला मानने का प्रावधान इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे पाकिस्तान सऊदी अरब और तुर्किये के बीच साझा सुरक्षा प्रतिबद्धता को स्पष्ट आधार मिलता है।
7 अगस्त को मक्का में आयोजित त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान सऊदी अरब और तुर्किये ने संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के जरिए तीनों देशों ने सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करने और रक्षा सहयोग को गहरा करने की प्रतिबद्धता जताई। इस समझौते का उद्देश्य संभावित आक्रमण के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध को मजबूत करना और क्षेत्रीय शांति स्थिरता तथा सुरक्षा को बढ़ावा देना बताया गया है। समझौते के बाद तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को लेकर उनकी साझा प्रतिबद्धता अधिक स्पष्ट हुई है।
समझौते की पारस्परिक सुरक्षा व्यवस्था के अनुसार किसी एक देश पर सशस्त्र हमला होने पर उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। यह प्रावधान पाकिस्तान सऊदी अरब और तुर्किये के बीच सुरक्षा संबंधों को साझा ढांचे में जोड़ता है। समझौते में रक्षा सहयोग के सभी पहलुओं को बढ़ाने की बात भी शामिल है। तीनों देशों ने इसे क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के व्यापक उद्देश्य से जोड़ा है। मौजूदा परिस्थितियों में इस मक्का रक्षा समझौता को तीनों देशों के बीच बढ़ते सुरक्षा सहयोग के महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
28 अगस्त को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने समझौते को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुआ यह मक्का रक्षा समझौता तीनों देशों को और करीब लाया है। प्रधानमंत्री ने इसे पूरे क्षेत्र में एकता और शांति का संदेश बताया। उनका बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। शहबाज के अनुसार तीनों देशों की साझेदारी का संदेश केवल सुरक्षा सहयोग तक सीमित नहीं है बल्कि क्षेत्रीय शांति और एकता से भी जुड़ा है।
शहबाज शरीफ के बयान से समझौते के सुरक्षा पक्ष के साथ उसके व्यापक क्षेत्रीय संदेश पर भी जोर सामने आया है। तीनों देशों ने सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करने और रक्षा सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति को सभी सदस्यों पर हमला मानने की व्यवस्था इस साझेदारी का मुख्य आधार है। प्रधानमंत्री ने इसी संदर्भ में इसे क्षेत्र में एकता और शांति का संदेश बताया है। आगे इस सहयोग का महत्व पश्चिम एशिया की सुरक्षा परिस्थितियों के अनुसार और बढ़ सकता है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। क्षेत्रीय सुरक्षा परिस्थितियों और समझौते के भविष्य के प्रभाव में बदलाव संभव है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।