राजस्थान

आचार्य परंपरा से जुड़े लोगों को मौका देने की मांग, सियासत में नई चर्चा

जयपुर नगर निगम चुनाव के बीच योगाचार्यों और आयुर्वेदाचार्यों ने ज्ञान योग्यता और लोकसेवा के आधार पर आचार्य परंपरा को प्रतिनिधित्व देने का प्रस्ताव रखा है।

By अजय त्यागी 1 min read
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आचार्य परंपरा को प्रतिनिधित्व देने का प्रस्ताव

जयपुर, राजस्थान। जयपुर नगर निगम चुनाव में 150 वार्डों के प्रतिनिधित्व को लेकर योगाचार्यों और आयुर्वेदाचार्यों ने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ से मुलाकात की और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को लिखित प्रस्ताव भेजा। प्रस्ताव में भारतीय आचार्य परंपरा से जुड़े योग्य और जनसेवी व्यक्तित्वों को स्थानीय निकाय में प्रतिनिधित्व देने की मांग की गई है। योगाचार्य मनीष विजयवर्गीय सूर्यवंशी और योगाचार्य रूपनारायण जेदिया ने भाजपा कार्यालय में प्रदेशाध्यक्ष से उम्मीदवार चयन को लेकर निवेदन रखा। प्रस्ताव में सामाजिक पहचान के साथ ज्ञान योग्यता कर्म और लोकसेवा को भी कसौटी बनाने की बात कही गई है।

15 वार्डों का प्रस्ताव

प्रस्ताव में कहा गया कि भारतीय लोकतंत्र में प्रतिनिधित्व अक्सर सामाजिक और जातीय समीकरणों के आधार पर तय होता रहा है। इसके साथ ज्ञान कर्म योग्यता संस्कार और लोकसेवा को भी महत्व दिया जाना चाहिए। भगवद्गीता की प्रेरणा का हवाला देते हुए कहा गया कि व्यक्ति का मूल्यांकन उसके गुण और कर्म से होना चाहिए। इसी आधार पर जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में करीब 10 प्रतिशत यानी 15 वार्डों में आचार्य परंपरा से जुड़े योग्य जनसेवी लोगों को प्रतिनिधित्व देने का सुझाव रखा गया है।

योग और आयुर्वेद पर जोर

गीता प्रचारक योगाचार्य मनीष सूर्यवंशी ने कहा कि प्रस्ताव में योगाचार्यों आयुर्वेदाचार्यों वेदाचार्यों संस्कृताचार्यों और धर्माचार्यों को निकाय चुनाव में प्रतिनिधित्व देने का आग्रह किया गया है। उनके मुताबिक इन क्षेत्रों में लंबे समय से काम कर रहे लोग स्वास्थ्य शिक्षा संस्कार संस्कृति नैतिक जीवन और सामाजिक समरसता के लिए योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे विशेषज्ञों की स्थानीय निकाय में सहभागिता लोककल्याण को नई दिशा दे सकती है। प्रस्ताव को किसी जाति या वर्ग के खिलाफ नहीं बल्कि प्रतिनिधित्व की कसौटी को व्यापक बनाने की पहल बताया गया है।

ज्ञान और लोकसेवा

प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि योग आयुर्वेद वेद संस्कृत और धर्म से जुड़े आचार्यों का योगदान केवल धार्मिक या सांस्कृतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। इन क्षेत्रों का सीधा संबंध स्वस्थ समाज संस्कारवान पीढ़ी भारतीय भाषाओं और संस्कृति के संरक्षण तथा नैतिक जीवन से भी है। प्रस्ताव रखने वालों का कहना है कि स्थानीय शासन में ऐसे लोगों की सहभागिता से विशेषज्ञता और जनसेवा का अनुभव नीति और स्थानीय कामकाज तक पहुंच सकता है। जयपुर से शुरू होने वाली ऐसी पहल भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था के बीच संवाद का माध्यम बन सकती है।

समर्थन में उठी आवाज

प्रस्ताव के समर्थन में आयुर्वेदाचार्य भानु प्रकाश शर्मा योगाचार्य सरोज शर्मा योगाचार्य सुधा रमण शर्मा योगाचार्य हरीश और योगाचार्य अशोक शर्मा ने भी आचार्य परंपरा के सामाजिक योगदान को स्थानीय प्रतिनिधित्व में स्थान देने के विचार का समर्थन किया। प्रस्ताव रखने वालों ने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य किसी मौजूदा सामाजिक या राजनीतिक प्रतिनिधित्व को चुनौती देना नहीं बल्कि उम्मीदवार चयन में ज्ञान योग्यता और लोकसेवा जैसे पक्षों को भी जगह दिलाना है। अब इस प्रस्ताव पर भाजपा नेतृत्व और सरकार की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी। चुनावी माहौल में यह मांग प्रतिनिधित्व के नए आधार को लेकर चर्चा बढ़ा सकती है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। आचार्य परंपरा को प्रतिनिधित्व देने संबंधी 15 वार्डों का प्रस्ताव संबंधित प्रतिनिधियों द्वारा रखा गया सुझाव है और इसे किसी राजनीतिक दल या सरकार की स्वीकृत नीति नहीं माना जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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